अस्मद् शब्द के रूप asmad ke roop sanskrit

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अस्मद् शब्द के रूप

अस्मद् सर्वनाम,(मैं हम) अस्मद् के रूप अस्मद् युष्मद् ,इदम, अदस आदि सर्वनाम शब्दों के तीनों लिंगों में रूप एक समान ही चलते हैं । किसी भी सर्वनाम शब्द का संबोधन नहीं होता है अतः जितने भी सर्वनाम शब्द हैं उनमें केवल प्रथमा से लेकर सप्तमी विभक्ति तक ही रूप लिखे जाते हैं इनमें संबोधन के रूप नहीं लिखे जाते हैं ।

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाअहम्आवाम्वयम्
द्वितीयामाम्आवाम्अस्मान्
तृतीयामयाआवाभ्याम्अस्माभि:
चतुर्थीमह्यंआवाभ्याम्अस्मभ्य:
पंचमीमत्आवाभ्याम्अस्मभ्य:
षष्ठीममआवयो:अस्माकम्
सप्तमीमयिआवयो:अस्माषु
अस्मद के रूप

संस्कृत शब्दकोश :–

मिठाइयाँ, मिष्टान्नानि, खाद्याः वस्तूनि

1) रसगुल्ला – रसगोलः
2) लड्डू – मोदकम्
3) जलेबी – कुण्डलिका,
4) खीर – पायसम्
5) बर्फी – हैमी
6) रबड़ी – कूर्चिका
7) श्रीखंड – श्रीखण्डम्

इतने शब्द आज याद कर लें ।


वाक्य अभ्यास :—

तुम दोनों मुझे खीर देते हो।
अनुवाद– युवां मह्यं पायसं यच्छथः। ( यच्छ् – देना धातु)

हम दोनों तुम सबको सेवइयाँ देते हैं।
अनुवाद– आवां युष्मभ्यं सूत्रिकाः यच्छावः।

क्या तुझमें बुद्धि नहीं है ?
अनुवाद- किं त्वयि बुद्धिः नास्ति ?

मुझमें बुद्धि है, तुम क्यों कुपित होते हो ?
अनुवाद- मयि बुद्धिः अस्ति, त्वं कथं कुपितः भवसि ?

तुम ये मिठाईयाँ खाते हो ?
अनुवाद-त्वम् इमानि मिष्टान्नानि खादसि ?(खाद्= खाना)

हाँ, क्यों ?
अनुवाद- आम्, कथम् ?

क्या तुम शास्त्र का यह वाक्य नहीं मानते ?
अनुवाद– किम् त्वं शास्त्रस्य इदं वाक्यं न मन्यसे ?

ओह ! अब समझा !
अनुवाद– अहो ! इदानीम् अवगतम् !

ये रसगुल्ले हम दोनों के हैं।
अनुवाद– इमे रसगोलाः आवयोः सन्ति।

किन्तु ये लड्डू हमारे नहीं हैं।
अनुवाद— किन्तु इमानि मोदकानि आवयोः न सन्ति।

ये मीठी जलेबियाँ तुम्हारी ही हैं।
अनुवाद– इमाः मधुराः कुण्डलिकाः तव एव सन्ति।

मैं तो इन्हें तुम्हें भी देता हूँ।
अनुवाद–अहं तु इमाः तुभ्यम् अपि ददामि ।

इसी प्रकार के अन्य वाक्यों का अनुवाद कीजिए ।।

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