Up board class 10 full solution social science chapter 39 ऊर्जा संसाधन (कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस, परमाणु खनिज, जल, वैकल्पिक साधन-उपयोग एवं संरक्षण)

ऊर्जा संसाधन (कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस, परमाणु खनिज, जल, वैकल्पिक साधन-उपयोग एवं संरक्षण)

लघुउत्तरीय प्रश्न
प्रश्न–1. ऊर्जा संसाधन किसे कहते हैं? दो परंपरागत तथा दो गैर-परंपरागत ऊर्जा के स्रोतों के नाम लिखिए।
उ०- ऊर्जा संसाधन- जिन पदार्थों से मनुष्य को उद्योग, कृषि, एवं परिवहन के साधनों हेतु ऊर्जा की प्राप्ति होती है, उन्हें ऊर्जा के साधन या शक्ति के साधन कहते हैं। ऊर्जा के दो परंपरागत साधन– कोयला, खनिज तेल (पेट्रोलियम)।
ऊर्जा के दो गैर-परंपरागत साधन- सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा।
प्रश्न–2. ऊर्जा के परंपरागत तथा गैर-परंपरागत स्रोतों की तुलना कीजिए।
उ०- ऊर्जा के परंपरागत तथा गैर-परंपरागत (वैकल्पिक) स्रोतों की तुलना- ऊर्जा के परंपरागत तथा गैर-परंपरागत स्रोतों की तुलना उनके निम्नलिखित अंतरों के आधार पर की जाती है

ऊर्जा के परंपरागत स्त्रोत ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोत
ऊर्जा के प्राचीन तथा परंपरागत रूप से उपयोग में किए जा रहे संसाधन ऊर्जा के परंपरागत स्रोत हैं।ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों का विकास नवीन वैकल्पिक संसाधन के रूप में किया गया है।
सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस, भूतापीय ऊर्जा, ऊर्जा के परंपरागत स्रोत हैं।ज्वारीय ऊर्जा, कूड़े कचरे से बनी ऊर्जा तथा लहरों की शक्ति से विकसित ऊर्जा, ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोत हैं।
परंपरागत ऊर्जा के स्रोत सीमित और नाशवान है | 3. गैर-परंपरागत ऊर्जा के स्रोत असीमित और स्थायी (अनवीकरणीय) हैं।
4. परंपरागत ऊर्जा के स्रोत एक बार में उपयोग होनेपर नष्ट हो जाते हैं।गैर-परंपरागत ऊर्जा के स्रोतों का नवीनीकरण किया जा सकता है |
5. परंपरा गत स्रोत के साधन सीमित है अत: इनके नाश ओर क्षय का भी बना रहता है गैर-परंपरागत ऊर्जा के स्रोत स्थायी तथा अविरल है अतः इनके नाश होने का भी नहीं रहता है |

प्रश्न–3. भारत के दो प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन कीजिए ।

उत्तर—-भारत के दो प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र निम्नलिखित हैं(i) झारखंड- झारखंड भारत का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है । यहाँ भारत का 36% कोयला झरिया, बोकारो, गिरिडीह, कर्णपुरा तथा डाल्टगंज की खानों से निकलता है । झरिया भारत की सबसे बड़ी कोयला खान है । इस खान से उत्तम कोटि का कोयला निकाला जाता है ।
(ii) छत्तीसगढ़- कोयला उत्पादन में छत्तीसगढ़ राज्य का दूसरा स्थान है । यहाँ पर भारत का 28% कोयला निकाला जाता है । इस राज्य में लखनपुर, सेंदूरगढ़, रामकोला, कुरसिया, चिरमिरी, विश्रामपुर, झिलमिली तथा सोनारहाट जनपदों में कोयले की खानें हैं ||यहाँ कोयला उत्पादक प्रसिद्ध क्षेत्र कोरबा, मांड-रायगढ़ एवं हामदी-अरंड आदि हैं।
प्रश्न—4. भारत में खनिज तेल उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखिए ।
उत्तर—-भारत में खनिज तेल उत्पादक क्षेत्रों के नाम निम्नलिखित हैं
(i) असम तेल क्षेत्र- डिगबोई, नहर कटिया, सूलमा घाटी।
(ii) गुजरात तेल क्षेत्र- अंकलेश्वर, लुनेज, अहमदाबाद-कलोल एवं बड़ोदरा।
(iii) महाराष्ट्र तेल क्षेत्र- अरब सागर, मुंबई-हाई, ट्राम्बे।
(iv) अन्य- कृष्णा बेसिन, कावेरी डेल्टा का नरीमनम एवं कोविलप्पल।
प्रश्न–5. भारत के पाँच परमाणु ऊर्जा उत्पादक केंद्रों के नाम लिखिए ।
उत्तर—-भारत के पाँच परमाणु ऊर्जा उत्पादक केन्द्र निम्नलिखित हैं(i) मुंबई के निकट तारापुर में = महाराष्ट्र
(ii) कोटा के निकट रावतभाटा में = राजस्थान
(iii) चेन्नई के निकट कलपक्कम में = तमिलनाडु
(iv) बुलंदशहर के निकट नरौरा में = उत्तर प्रदेश
(v) काकरापारा में = गुजरात
प्रश्न–6. भारत की किन्हीं चार तेल शोधनशालाओं के नाम उनके राज्यों के नाम सहित लिखिए।
उत्तर—-भारत की चार तेल शोधनशालाओं के नाम उनके राज्यों के नाम सहित निम्नलिखित हैं
(i) ट्राम्बे तेल शोधनशाला= महाराष्ट्र
(ii) मथुरा तेल शोधनशाला= उत्तर प्रदेश
(iii) अंकलेश्वर तेल शोधनशाला = गुजरात
(iv) डिगबोई तेल शोधनशाला= असम


प्रश्न—7. ऊर्जा के संसाधनों के महत्व की विवेचना कीजिए ।
उत्तर—-आर्थिक विकास की दौड़ लगा रहे राष्ट्रों को औद्योगिकरण का ढाँचा खड़ा करने के लिए सर्वाधिक आवश्यकता ऊर्जा संसाधनों की होती है । ऊर्जा औद्योगिक क्षेत्र का प्राण है । बिजली न होने पर घर के काम रूक जाते हैं, पेट्रोल के अभाव में परिवहन के उपकरण ठप्प पड़ जाते हैं ||स्वस्थ शरीर के लिए जितनी ऊर्जा आवश्यक हैं उतने ही ऊर्जा संसाधन देश के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं ||
प्रश्न—8. भारत में परमाणु ऊर्जा के महत्व पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर—-भारत में परमाणु ऊर्जा का महत्व- परमाणु ऊर्जा का विकास जितना अधिक जोखिम भरा है, यह उतना ही उपयोगी और महत्वपूर्ण भी है । यही कारण है, कि प्रत्येक राष्ट्र परमाणु ऊर्जा और शक्ति के विकास में लगा हुआ है । भारत में परमाणु ऊर्जा के महत्व को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है
(i) परमाणु ऊर्जा में अपार शक्ति और क्षमता विद्यमान होती है ।
(ii) परमाणु ऊर्जा के संयंत्र देश में सुविधानुसार कहीं पर भी स्थापित किए जा सकते हैं || किंतु सामान्यतः इनकी स्थापना ऐसे स्थानों पर की जाती है जहाँ परमाणु ऊर्जा का ईंधन उपलब्ध नहीं होता ।
(ii) परमाणु ऊर्जा का उपयोग, ईंधन, ऊर्जा तथा बम बनाने में, विविध ढंग से किया जा सकता है ।
(iv) परमाणु शक्ति चिकित्सा तथा अनुसंधानात्मक जैसे क्षेत्रों में अपने शांतिपूर्ण उपयोग के लिए भी प्रयुक्त होती है ।
(v) परमाणु शक्ति का भरपूर विकास कर लेने वाला राष्ट्र विश्व में शक्ति संपन्न माना जाता है ।
(vi) परमाणु शक्ति राष्ट्र की सुरक्षा के लिए आवश्यक बन गई है ।
प्रश्न– 9. सौर ऊर्जा क्या है? इसके विकास पर अधिक बल क्यों दिया जा रहा है?
उत्तर—-सौर ऊर्जा- सूर्य की किरणों की विकिरण शक्ति को प्राप्त कर बनाई गई ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहते हैं ||वैज्ञानिकों ने सूर्य के प्रकाश की अपार शक्ति को नवीनतम तकनीकी का प्रयोग कर उपयोगी ऊर्जा में बदलकर, मानवता को अनूठा उपहार दिय है । अतः हम कह सकते हैं कि सूर्य की किरणों से प्राप्त ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहते हैं ||सौर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए फोटो वोल्टाइक सैलों के पैनल का प्रयोग किया जाता है । सौर ऊर्जा के विकास पर बल- सौर ऊर्जा के विकास पर निम्नलिखित कारणों से बल दिया जा रहा है
(i) कोयला, गैस तथा खनिज तेल जैसे ऊर्जा के परंपरागत स्रोत सदा के लिए रहने वाले नहीं है ।
(ii) सौर ऊर्जा का उपयोग पर्यावरण प्रदूषण मुक्त है ।
(ii) भारत में सूर्य की धूप सालभर चमकती रहती है, अतः यहाँ सौर ऊर्जा के विकास की अधिक संभावना है ।
(iv) भारत में कोयला, खनिज तेल और बिजली की खपत अधिक होने के कारण अक्सर ऊर्जा की कमी रहती है । सौर ऊर्जा इस कमी को पूरा करने का उत्तम साधन है ।

भारत के औद्योगिक विकास में ऊर्जा के महत्व को स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर—-भारत के औद्योगिक विकास में ऊर्जा के महत्व को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है |
(i) औद्योगिक विकास का आधार ऊर्जा है ।
(ii) ऊर्जा के अभाव में औद्योगिक विकास संभव नहीं है ।
(ii) ऊर्जा औद्योगिक क्षेत्र का प्राण है, इसके बिना सभी उपकरण निष्क्रिय हो जाते हैं।
(iv) ऊर्जा संसाधनों से उद्योगों को चलाने तथा वस्तुओं के उत्पादन की शक्ति प्राप्त होती है ।

* विस्तृत उत्तरीय प्रश्न


प्रश्न—1. ऊर्जा संसाधन से आप क्या समझते हैं? भारत के प्रमुख ऊर्जा संसाधनों का वर्णन कीजिए ।
उत्तर—-ऊर्जा संसाधन का अर्थ- जिस प्रकार शरीर को जीवित तथा सक्रिय रखने के लिए भोजन की आवश्यकता पड़ती है, उसी
प्रकार मशीनों को सक्रिय तथा गतिमान बनाने के लिए ईंधन की आवश्यकता पड़ती है । ऊर्जा के संसाधन मशीनों का ईंधन कहलाते हैं ||इन संसाधनों से ही मशीनें गतिमान होकर उत्पादन में सहयोग देती हैं ||ऊर्जा के संसाधन उन पदार्थों को कहते हैं, जिनसे मनुष्य को उद्योग, कृषि एवं परिवहन के साधनों हेतु ऊर्जा की प्राप्ति होती है । इसीलिए ऊर्जा के संसाधन शक्ति के संसाधन भी कहलाते हैं ||कोयला, खनिज तेल और बिजली ऊर्जा संसाधनों के उदाहरण हैं ||इनमें कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं परमाणु खनिज भूगर्भ से निकाले जाते हैं तथा इनके भंडार सीमित हैं और ये कभी भी समाप्त हो सकते हैं ||इन्हें ‘परंपरागत ऊर्जा संसाधन’ भी कहा जाता है । सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायो ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, आदि ऊर्जा के गैर परंपरागत और अक्षय स्रोत माने जाते हैं ||
आर्थिक विकास की दौड़ लगा रहे राष्ट्रों को औद्योगिकरण का ढाँचा खड़ा करने के लिए सर्वाधिक आवश्यकता, ऊर्जा संसाधनों की ही होती है । ऊर्जा औद्योगिक क्षेत्र का प्राण है । बिजली न हो, तो घर के सभी काम रुक जाते हैं, पेट्रोल के अभाव में परिवहन के उपकरण ठप पड़ जाते हैं ||ऊर्जा शरीर के लिए जितनी आवश्यक है ऊर्जा संसाधन राष्ट्र के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए उतने ही आवश्यक हैं ||ऊर्जा के संसाधनों का वर्गीकरण- ऊर्जा के संसाधनों का वर्गीकरण निम्नवत किया जा सकता है
(i) पंरपरागत स्रोत (ii) गैर-परंपरागत स्रोत
(i) ऊर्जा के परंपरागत स्रोत- प्राचीनकाल से ऊर्जा के जिन स्रोतों का प्रयोग होता चला आ रहा है, उन्हें ऊर्जा के परंपरागत स्रोत कहा जाता है । ऊर्जा के परंपरागत स्रोतों में कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस ऐसे पदार्थ हैं जिनका एक बार उपभोग करने के उपरांत ये सदैव के लिए समाप्त हो जाते हैं अर्थात् इनका नवीनीकरण संभव नहीं है । दूसरे, इनके उपभोग से निकलने वाली राख, धुआँ आदि पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं ||
ऊर्जा के प्रमुख परंपरागत स्रोत निम्नलिखित हैं (क) कोयला- कोयला ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है । कोयला ऊर्जा, ताप और शक्ति का स्रोत होते हुए भी अन्य उत्पादों का स्रोत भी बना हुआ है ।
कोयले का उपयोग- ऊर्जा तथा तापमान देने के अतिरिक्त कोयले से कोलतार, गंधक, नौसादर, सिंथेटिक धागे, कुकिंग कोल तथा भाप बनाकर विद्युत का उत्पादन किया जाता है । इसलिए प्रत्येक राष्ट्र कोयले के नए भंडारों की खोज तथा उत्पादन बढ़ाने में लगा हुआ है । कोयले के महत्व को जैफरे ने इन शब्दों में व्यक्त किया है, “आधुनिक संस्कृति ऊर्जा के जिन संसाधनों पर टिकी हुई है, उनमें कोयले को प्रथम स्थान मिलना चाहिए।” कोयला समूचे विश्व में ऊर्जा का 40% अंश पूरा करता है ।
(ख) खनिज तेल ( पेट्रोलियम)- चट्टानों से प्राप्त तेल खनिज तेल कहलाता है । खनिज तेल के निक्षेप भूगर्भीय चट्टानों में पाए जाते हैं, खनिज तेल की उत्पत्ति भूगर्भ में वनस्पतियों तथा जलजीवों के दबने तथा रासायनिक परिवर्तनों के कारण आश्मीकरण के फलस्वरूप हुई है । इसे भूगर्भीय चट्टानों से अशुद्ध रूप में खोदकर निकाला जाता है, इसलिए इसे खनिज तेल या पेट्रोलियम भी कहते हैं ||खनिज तेल को शोधनशालाओं में शुद्ध करके विविध उपयोगों के लिए तैयार किया जाता है ।
खनिज तेल का उपयोग- पैट्रोलियम ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत तथा औद्योगिक विकास का आधार है । औद्योगिक दृष्टि से उपयोगी तथा महत्वपूर्ण होने के कारण खनिज तेल को तरल सोना कहा जाता है । खनिज तेल को साफ करने पर इससे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन के अतिरिक्त मोम, ग्रीस तथा क्रूड ऑयल भी मिलता है जिनका उपयोग विविध पेट्रो-रसायन उद्योगों में कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करके उनसे 3000 से अधिक उपयोगी पदार्थ तैयार किए जाते हैं ||खनिज तेल से पेट्रो-रसायन उद्योग चलाया जाता है । इससे उर्वरक, कृत्रिम रेशे, वैसलीन, मोम, सौंदर्य प्रसाधन रंग-रोगन, प्लास्टिक तथा डिटर्जेंट साबुन एवं पाउडर आदि बनाए जाते हैं ||पेट्रो-रसायन उद्योग महाराष्ट्र के मुंबई तथा गुजरात के हजीरा में स्थित हैं ||उपयोगिता के कारण ही खनिज तेल विश्व राजनीति का केंद्र बिंदु बन रहा है ।


(ग) प्राकृतिक गैस- प्रकृति बड़ी उदार है । उसने मानव को खनिज तेल के साथ-साथ प्राकृतिक गैस भी प्रदान की है । भारत के कुछ स्थानों पर प्राकृतिक गैस के भंडार प्राप्त हुए हैं ||प्राकृतिक गैस पैराफिन युक्त उच्च हाईड्रोकार्बन के मिश्रण का रासायनिक संगठन होती है, जो ऑक्सीजन का संपर्क पाते ही ज्वलनशील बन जाती है ।
भारत में प्राकृतिक गैस का उपयोग गत तीन दशकों से ऊर्जा के स्रोत के रूप में किया जा रहा है । प्रकृति द्वारा प्रदत्त ज्वलनशील उपयोगी गैस को ही प्राकृतिक गैस कहा जाता है । अब भारत में खनिज तेल के स्थान पर प्राकृतिक गैस की ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ती जा रही है । यही कारण है कि “प्राकृतिक गैस वर्तमान ऊर्जा का स्रोत तथा भविष्य की आशा बन गई है ।
” भारत में प्राकृतिक गैस का परिवहन पाइपलाइन के माध्यम से किया जाता है । भारत में 1,240 किमी० लंबी पाइपलाइन इस कार्य में लगी है । यह पाइपलाइन गुजरात के जामनगर से प्रारंभ होकर गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली होती हुई उत्तर प्रदेश राज्य तक जाती है । यह पाइप लाइन 17 लाख 50 हजार टन वार्षिक रसोईगैस की आपूर्ति करती है । वर्तमान में प्राकृतिक गैस का उपयोग निम्न कार्यों के लिए किया जा रहा है
(अ) घरों में भोजन पकाने के ईंधन के रूप में।
(ब) उद्योगों में ऊर्जा के स्रोत के रूप में।
(स) रासायनिक उद्योग, रासायनिक उर्वरक उद्योग तथा पेट्रो-रसायन उद्योग में कच्चे माल के रूप में।
(द) बस, कार, ट्रक आदि को चलाने के लिए सी.एन.जी. ऊर्जा के रूप में।


(घ) परमाणु खनिज- परमाणु ऊर्जा वर्तमान युग की एक आवश्यक बुराई बनकर उभरी है । सभी राष्ट्र इस महाविनाशक ऊर्जा के विकास में जी-जान से जुटे हैं ||परमाणु ऊर्जा कुछ प्रमुख खनिजों के विखंडन से प्राप्त होती है । परमाणु ऊर्जा प्रदान करने वाले खनिज तत्व परमाणु खनिज कहलाते हैं ||परमाणुओं के विखंडन तथा संलयन से जो महान शक्ति प्राप्त होती है, उसे परमाणु ऊर्जा या नाभिकीय ऊर्जा कहा जाता है । परमाणु खनिज मुख्य रूप से निम्नलिखित हैंयूरेनियम, थोरियम, ग्रेफाइट, एंटीमनी, बोरीलियम, प्लूटोनियम, चेरोलिट, जर्कोनियम, इल्मेनाइट आदि उपर्युक्त खनिजों में यूरेनियम और थोरियम सर्वाधिक महत्वपूर्ण है । इन दोनों खनिजों में अपार परमाणु ऊर्जा छिपी होती है । परमाणु ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए पर्याप्त संसाधनों तथा उच्चकोटि की तकनीक की आवश्यकता होती है । परमाणु भट्टी में हुई जरा-सी असावधानी से यह रेडियोधर्मी पदार्थ जन-जीवन तथा पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचा सकता है । कहावत है “सावधानी हटी, दुर्घटना घटी”। सोवियत संघ के चेरनोबिल परमाणु संयत्र में हुआ रिसाव इसका ज्वलंत उदाहरण है ।


(ii) ऊर्जा के गैर-परंपरागत ( वैकल्पिक) स्रोत– संसार के सभी राष्ट्रों में बढ़ती जनसंख्या की दैनिक तथा औद्योगिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में ऊर्जा के परंपरागत स्रोत असमर्थ सिद्ध हो रहे हैं, अत: ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को खोजने की आवश्यकता अनुभव की गई है । “वैज्ञानिकों ने ऊर्जा के जिन नए स्रोतों को खोज निकाला हैं, उन्हें ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत या गैर-परंपरागत स्रोत कहा जाता है ।” यदि ऊर्जा के इन वैकल्पिक स्रोतों की खोज न की गई होती, तो समूचा विश्व ऊर्जा संसाधनों के अभाव के भीषण संकट से ग्रसित हो गया होता। जैसे पुरानी और घिसी-पिटी परंपराओं को नई विचारधाराएँ भुलवा देती हैं, वैसे ही नवीन गैर-परंपरागत ऊर्जा के साधनों ने परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के महत्व को घटा दिया है । वैकल्पिक ऊर्जा के मुख्य स्रोत निम्नलिखित हैं
(क) सौर ऊर्जा- प्रकृति ने सूर्य की रश्मियों में अपरिमित शक्ति छिपा रखी है । सूर्य की किरणों से प्राप्त ऊर्जा को ‘सौर ऊर्जा’ कहते हैं ||वैज्ञानिकों ने धूप की शक्ति को पहचाना और अपने अथक प्रयासों से उसे ऊर्जा के रूप में परिवर्तित कर उपयोगी बना लिया। सौर ऊर्जा वर्तमान में ऊर्जा के सर्वाधिक महत्वपूर्ण वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोत के रूप में उभरी है । जिन देशों में सालभर धूप चमकती है, वे इस ऊर्जा स्रोत से लाभान्वित हो रहे हैं ||
भारत भी उन्हीं में से एक भाग्यशाली देश है । सूर्य की किरणों की विकिरण शक्ति प्राप्त कर बनाई गई ऊर्जा ही, सौर ऊर्जा कहलाती है । वैज्ञानिकों ने सूर्य के प्रकाश की अपार शक्ति को नवीनतम तकनीकी का प्रयोग कर उपयोगी ऊर्जा में बदलकर, मानवता को अनूठा उपहार दिया है । सौर ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए फोटो वोल्टाइक सैलों के पैनल का प्रयोग किया जाता है । सौर ऊर्जा पानी गरम करने, सड़कों पर प्रकाश करने, ग्रामीण क्षेत्रों का विद्युतिकरण करने, खाना बनाने तथा घरों के लिए ऊर्जा प्राप्ति में बड़ी उपयोगी सिद्ध हो रही है ।


(ख) पवन ऊर्जा- पवन संचार, प्रकृति का एक ओर चमत्कार है । पवन वर्षा, सर्दी, गर्मी, के साथ-साथ जीव धारियों को शीतलता और प्राणवायु भी प्रदान करती है । वैज्ञानिकों ने पवन की अपारशक्ति को अनुभव करके उसकी अपरिचित शक्ति को ऊर्जा के रूप में परिवर्तित करके ऊर्जा के अभाव को दूर करने का सफल प्रयास किया है । पवन ऊर्जा पवन-चक्कियों के माध्यम से विण्ड मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित करके उत्पन्न की जाती है । पवन की शक्ति के प्रयोग से तैयार की जा रही ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहा जाता है । निकट भविष्य में वैज्ञानिक पवन की गति से टरबाइन चलाकर विद्युत उत्पादन कर सकेंगे। इस कार्य में सफलता मिलते ही ऊर्जा आपूर्ति में क्रांतिकारी सुधार आ जाएँगे। पवन ऊर्जा का प्रयोग प्रकाश करने, नलकूप चलाने, दैनिक कार्य संपन्न करने तथा औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाजनक ढंग से किया जा सकता है । पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता के मामले में भारत का विश्व में पाँचवा तथा एशिया में दूसरा स्थान है । पवन ऊर्जा उत्पादन में विश्व के चार अग्रणी देश क्रमशः संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, स्पेन तथा चीन हैं ||


(ग) बायोगैस ऊर्जा– वैज्ञानिकों ने गोबर के उपयोग से गैस बनाकर बायोगैस ऊर्जा की उत्पत्ति की। यह बायोगैस गो–पालक ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत बनकर प्रकट हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका प्रयोग घरों को प्रकाशित करने तथा भोजन पकाने में किया जाता है । इसके महत्व को बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में यह नारा उभरा, “बेटी दो वहाँ, गोबर गैस हो जहाँ।” बायोगैस पक्के गढढों में गोबर को सड़ाकर प्राप्त की जाती है । बाद में सड़ा हुआ गोबर खाद के रूप में प्रयोग में आने के कारण ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ की कहावत चरितार्थ कर देता है । भारत के ग्रामीण अंचल में 40 लाख गोबर गैस प्लांट गाँवों में प्रकाश और ऊर्जा की आपूर्ति कर रहे हैं।
(घ) भूतापीय ऊर्जा– पृथ्वी के आंतरिक भाग में गहराई के साथ-साथ ताप में निरंतर वृद्धि होती जाती है । जिन भागों में गर्म जल के स्रोत आदि पाए जाते हैं वहाँ भूताप की मात्रा अधिक पाई जाती है । भूताप की शक्ति के प्रयोग से जो ऊर्जा बनाई जाती है, उसे भूतापीय ऊर्जा कहते हैं ||विश्व के अनेक देशों जैसे न्यूजीलैंड, इटली तथा आइसलैंड ने भूतापीय ऊर्जा का खूब विकास कर लिया है । भारत के हिमाचल प्रदेश की काँगड़ा घाटी में ज्वालादेवी में भूतापीय ऊर्जा का विकास किया जा रहा है । सभी देशों में भूतापीय ऊर्जा के उत्पादन की अनुकूल दशाएँ नहीं पाई जाती हैं ||
(ङ) ज्वारीय ऊर्जा- महासागरों में ज्वार उठने की दैनिक क्रिया है । ज्वार सागर के जल को ऊँचा उठा देता है, जिसमें अपार शक्ति होती है । ज्वार के जल की गतिज ऊर्जा से टरबाइन चलाकर जो बिजली बनाई जाती है, उसे ज्वारीय ऊर्जा कहते हैं ||फ्रांस और जापान देशों के साथ-साथ भारत में भी ज्वारीय ऊर्जा के विकास की दिशा में शोध कार्य किए जा रहे हैं।
(च) औद्योगिक कूड़े-कचरे से उत्पन्न ऊर्जा- महानगरों में दैनिक उपभोग और औद्योगिक उत्पादन के बाद छिलके, फल-सब्जियों के अवशेष, घरेलू अपशिष्ट, डब्बे तथा पैकिंग्स के रूप में हजारों टन कूड़ा-कचरा उत्पन्न होता है । इसके प्रबंधन की समस्या बड़ी विकट थी। वैज्ञानिकों ने इसे जलाकर जहाँ इसके उचित प्रबंधन की समस्या हल कर ली है, वहीं इससे ऊर्जा उत्पादन की विधि निकालकर एक तीर से दो निशाने लगाए हैं ||औद्योगिक कूड़ा-कचरा अब प्रदूषक न रहकर ऊर्जा का स्रोत बन गया है । कूड़े-कचरे को जलाकर शक्ति से जो ऊर्जा बनाई जाती है, उसे कूड़े-कचरे से उत्पन्न ऊर्जा कहते हैं ||भारत में मुंबई, कोलकाता, चेन्नई तथा दिल्ली आदि महानगरों में इस ऊर्जा के विकास के सघन प्रयास किए जा रहे हैं ||

(छ) सागरीय लहरों से उत्पन्न ऊर्जा- लहरें उठना सागरीय जल की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है । लहरों के आगे बढ़ने पर उनमें गतिज ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है । वैज्ञानिकों ने लहरों की इसी शक्ति से टरबाइन चलाकर जो ऊर्जा प्राप्त करने की विधि निकाली है, वह भविष्य के लिए ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन जाएगी। सागरीय लहरों की शक्ति के उपयोग से बनाई जाने वाली विद्युत को लहरों से उत्पन्न ऊर्जा कहा जाता है ।


प्रश्न—2. भारत के प्रमुख तीन परंपरागत एवं तीन गैर-परंपरागत ऊर्जा संसाधनों का वर्णन कीजिए ।

उत्तर—-उत्तर के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या- 1 के उत्तर का अवलोकन कीजिए ।


प्रश्न—3. भारत में कोयला उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन कीजिए तथा कोयले का महत्व बताइए।
उत्तर—-भारत में कोयले का उत्पादन और क्षेत्र- भारत में कोयले के सुरक्षित भंडारों का जो अनुमान 2011 में लगाया गया है
उसके अनुसार कोयले का भंडार 25360 करोड़ टन हो सकता है । भारत का 98% कोयला गोंडवाना क्षेत्र से तथा 2% टरशियरी क्षेत्र से प्राप्त किया जाता है । भारत के कुल कोयला उत्पादन में 80% भाग बिटुमिनस कोयले का होता है । भारत के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य निम्नलिखित हैं
(i) झारखंड- झारखंड भारत का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है । यहाँ भारत का 36% कोयला झरिया, बोकारो, गिरिडीह, कर्णपुरा तथा डाल्टगंज की खानों से निकलता है । झारिया भारत की सबसे बड़ी कोयला खान है । इस खान से उत्तम कोटि का कोयला निकाला जाता है ।
(ii) पश्चिमी बंगाल- कोयला उत्पादन में पश्चिमी बंगाल का भारत में तृतीय स्थान है । यह राज्य भारत का लगभग 13% कोयला निकालता है । यहाँ रानीगंज की खान से सर्वाधिक कोयला निकाला जाता है । बॉकुडा, वर्दवान तथा पुरूलिया जनपद इस राज्य के प्रमुख कोयला उत्पादक जिले हैं ||


(iii) छत्तीसगढ़- कोयला उत्पादन में छत्तीसगढ़ राज्य का दूसरा स्थान है । यहाँ पर भारत का 28% कोयला निकाला जाता है । इस राज्य में लखनपुर, सेंदूरगढ़, रामकोला, कुरसिया, चिरमिरी, विश्रामपुर, झिलमिली तथा सोनारहाट जनपदों में कोयले की खानें हैं ||यहाँ कोयला उत्पादक प्रसिद्ध क्षेत्र कोरबा, मांड-रायगढ़ एवं हामदी-अरंड़ आदि हैं।
(iv) मध्य प्रदेश- मध्य प्रदेश राज्य भी पर्याप्त मात्रा में कोयला निकालता है । इसके कोयला उत्पादक क्षेत्र पूर्व में छत्तीसगढ़ के कोयला उत्पादक क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं ||सिंगरौली, सोहागपुर, उमरिया, जोहिल्ला, पेंच घाटी, कान्हन तथा पंथखेड़ा मध्य प्रदेश की प्रमुख कोयला निकालने वाली खानें हैं ||

(v) भारत के अन्य कोयला उत्पादक राज्य- महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात तथा असम आदि राज्य भी थोड़ी मात्रा में कोयला निकालते हैं ||कोयले का उपयोग- ऊर्जा तथा तापमान देने के अतिरिक्त कोयले से कोलतार, गंधक, नौसादर, सिंथेटिक धागे, कुकिंग कोल तथा भाप बनाकर विद्युत का उत्पादन एवं लोह-अयस्क के प्रगलन में इसका उपयोग किया जाता है । इसलिए प्रत्येक राष्ट्र कोयले के नए भंडारों की खोज तथा उत्पादन बढ़ाने में लगा हुआ है । कोयले के महत्व को जैफरे ने इन शब्दों में व्यक्त किया है, “आधुनिक संस्कृति ऊर्जा के जिन संसाधनों पर टिकी हुई है, उनमें कोयले को प्रथम स्थान मिलना चाहिए।” कोयला समूचे विश्व में ऊर्जा का 40% अंश पूरा करता है । कोयले की ऊर्जा से ही विश्व का औद्योगिक विकास संभव हो पाता है । यह औद्योगिक क्रांति का प्रमुख आधार है । इसकी उपयोगिता के कारण इसे काला सोना तथा काला हीरा भी कहते हैं ||


up board class 10 full solution social science chapter 36 भूमि संसाधन (महत्व, विभिन्न उपयोग, मानव जीवन पर प्रभाव-मृदा के संदर्भ में

प्रश्न—4. भारत में खनिज तेल उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन करते हुए खनिज तेल के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर—-भारत में खनिज तेल का उत्पादन एवं वितरण- भारत में खनिज तेल के स्रोत कम हैं, अत: भारत अपनी आवश्यकता से कम खनिज तेल का उत्पादन कर पाता है । वह अपनी अधिकतम माँग की पूर्ति विदेशों से खनिज तेल आयात करके करता है, सन् 1890 ई० में असम में डिगबोई तथा ओडिशा में कटक केवल दो ही तेल उत्पादक क्षेत्र थे। भारत में 1956 ई० में तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग की स्थापना उत्तराखंड राज्य के देहरादून नगर में की गई। इस आयोग ने खनिज तेल संभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण कराकर भारत में खनिज तेल उत्पादन के क्षेत्र में क्रांति ला दी। किंतु देश में प्रतिवर्ष नवीन तेल उत्पादक क्षेत्रों की खोज होने पर भी भारत खनिज तेल उत्पादन के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है । भारत के निम्नलिखित राज्यों में खनिज तेल निकाला जाता है
(i) असम तेल क्षेत्र- असम भारत का प्राचीन एवं प्रमुख खनिज तेल उत्पादक राज्य है । यहाँ के खनिज तेल उत्पादक क्षेत्र का विस्तार उत्तरी पूर्वी छोर से प्रारंभ होकर सूरमा नदी की घाटी तक चला गया है । असम के प्रमुख खनिज तेल उत्पादक क्षेत्र डिगबोई, तेल क्षेत्र, नहरकटिया तथा सूलमाघाटी तेल क्षेत्र हैं ||इन तेल उत्पादक क्षेत्रों से निकाला गया कच्चा और अशुद्ध खनिज तेल डिगबोई, गुवाहाटी, बरौनी, नूनामती तथा बोगई गाँव आदि तेल शोधनशालाओं को पाइप लाइन द्वारा भेज दिया जाता है ।
(ii) गुजरात तेल क्षेत्र- गुजरात भारत का प्रमुख खनिज तेल उत्पादक राज्य बनकर उभरा है । यहाँ तेल के नए क्षेत्र खोज निकाले गए हैं, जिनसे पर्याप्त मात्रा में खनिज तेल निकाला जाने लगा है । महासागर में खनिज तेल के नए क्षेत्र खोजने का कार्य यहाँ निरंतर चल रहा है । अंकलेश्वर तेल क्षेत्र, लुनेज तेल क्षेत्र, अहमदाबाद-कलोल तेल क्षेत्र एवं वड़ोदरा खनिज तेल क्षेत्र गुजरात के प्रमुख खनिज तेल उत्पादक क्षेत्र है । यहाँ दूर अरब सागर में स्थित अलियाबेट द्वीप में भी तेल निकाला जाता है । गुजरात का अशुद्ध खनिज तेल अंकलेश्वर और कोयली की तेल शोधनशालाओं में साफ किया जाता है ।
(iii) महाराष्ट्र के तेल क्षेत्र- महाराष्ट्र भी भारत का उल्लेखनीय खनिज तेल उत्पादक राज्य बन गया है । इस राज्य के पश्चिमी तट पर अरब सागर के गहरे जल से खनिज तेल प्राप्त किया जाता है । मुंबई-हाई यहाँ का प्रमुख खनिज तेल उत्पादक क्षेत्र बन गया है, जहाँ ‘सागर सम्राट’ नामक जापानी जल मंच की सहायता से खनिज तेल निकालने का कार्य किया जाता है । मुंबई-हाई के निकट बेसीन क्षेत्र में भी खनिज तेल निकालने के प्रयास किए जा रहें हैं ||ट्राम्बे में महाराष्ट्र का खनिज तेल शोधन कारखाना है ।
(iv) नवीन खनिज तेल उत्पादक क्षेत्र- भारत के पूर्वी तटीय क्षेत्र में कृष्णा बेसिन तथा कावेरी बेसिन में खनिज तेल के नए भंडार खोजे गए हैं ||कावेरी डेल्टा के नारीमनम एवं कोविलप्पल क्षेत्रों में खनिज तेल निकालने का कार्य प्रारंभ हो चुका है जबकि, कृष्णा बेसिन में शोध कार्य चल रहे हैं ||भारत भारी मात्रा में सऊदी अरब, कुवैत, ईरान, इराक, तथा इंडोनेशिया आदि देशों से खनिज तेल का आयात करता है ।
उत्तर प्रदेश की मथुरा तेल शोधनशाला को यही कच्चा तेल शोधन के लिए प्राप्त होता है । खनिज तेल का महत्व- खनिज तेल ऊर्जा का महत्पपूर्ण स्रोत तथा औद्योगिक विकास का आधार है । औद्योगिक दृष्टि से उपयोगी तथा महत्वपूर्ण होने के कारण खनिज तेल को तरल सोना कहा जाता है । खनिज तेल को साफ करने पर इससे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन के अतिरिक्त मोम, ग्रीस तथा क्रूड ऑयल भी मिलता है जिनका उपयोग विविध पेट्रो-रसायन उद्योगों में कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करके उनसे 3000 से अधिक उपयोगी पदार्थ तैयार किए जाते हैं ||खनिज तेल से पेट्रो-रसायन उद्योग चलाया जाता है । इससे उर्वरक, कृत्रिम रेशे, वैसलीन, मोम, सौंदर्य प्रसाधन रंग-रोगन, प्लास्टिक तथा डिटर्जेंट साबुन एवं पाउडर आदि बनाए जाते हैं ||पेट्रो-रसायन उद्योग महाराष्ट्र के मुंबई तथा गुजरात के हजीरा में स्थित हैं ||उपयोगिता के कारण ही खनिज तेल विश्व राजनीति का केंद्र बिंदु बन रहा है ।

प्रश्न— 5. भारत में परमाणु ऊर्जा और सौर ऊर्जा के बारे में विवरण दीजिए।
उत्तर—-भारत में परमाणु ऊर्जा- भारत में सर्वप्रथम सन् 1960 ई० में मुंबई के तारापुर में परमाणु ऊर्जा केंद्र स्थापित किया गया था। भारत ने सन् 1974 तथा 1998 में शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए राजस्थान के पोखरन नामक स्थान पर चार परमाणु परीक्षण किए जिसके कारण भारत विश्व का छठा परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बन गया है । भारत में निम्नलिखित परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की गई है
(i) मुंबई के निकट तारापुर में—महाराष्ट्र
(ii) कोटा के निकट रावतभाटा में—-राजस्थान
(iii) चेन्नई के निकट कलपक्कम में—-तमिलनाडु
(iv) बुलंदशहर के निकट नरौरा में—–उत्तर प्रदेश
(v) काकरापारा में——-गुजरात
(vi) कैगा में—–कर्नाटक
उपर्युक्त के अतिरिक्त 6800 मेगावाट क्षमता के 8 नए परमाणु रिएक्टर लगाने की अनुमति सरकार ने दे दी है । भारत की वर्तमान परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता 4120 मेगावाट है ।
भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य (महत्व)- सौर ऊर्जा भारत जैसे विशाल और विकासशील देश के लिए एक अलौकिक उपहार सिद्ध हुई है । भारत में सौर ऊर्जा का महत्व तथा भविष्य उज्ज्वल रहने की संभावनाएँ हैं, क्योंकि
(i) भारत में सूर्य की धूप सालभर चमकती रहती है, अतः यहाँ सौर ऊर्जा के विकास की संभावनाएँ बहुत उज्ज्वल हैं ||
(ii) भारत में फोटो वोल्टेइक सैल पैनल सुविधापूर्वक कम खर्च में तैयार हो जाते हैं।
(iii) भारत गाँवों में बसता हैं ||ग्रामीण जन-जीवन में सुख-सुविधा का प्रकाश फैलाने में सौर ऊर्जा प्राकृतिक उपहार से कम नहीं है ।
(iv) भारत में कोयला, खनिज तेल और बिजली की भारी खपत है जिसके कारण अक्सर ऊर्जा की कमी रहती है । ऐसे में सौर ऊर्जा उसी कमी को पूरा करने का उत्तम साधन बन गई है ।
(v) भारत में घटते जीवांश ईंधन के स्थानापन्न के रूप में सौर ऊर्जा नवजीवन लेकर प्रकट हुई है ।
भारत में सौर ऊर्जा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली राजधानी क्षेत्र, बिहार, मध्य प्रदेश, तथा छत्तीसगढ़ राज्यों में विकसित की जा रही है । सौर ऊर्जा वर्तमान की आवश्यकता और भविष्य की ऊर्जा बन जाएगी।

up board class 10 social science full solution chapter 37 वन एवं जीव संसाधन
प्रश्न—6. गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों से क्या अभिप्राय है? इन स्रोतों के महत्व बताइए।
उत्तर—-ऊर्जा के गैर-परंपरागत (वैकल्पिक) स्रोत- संसार के सभी राष्ट्रों में बढ़ती जनसंख्या की दैनिक तथा औद्योगिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में ऊर्जा के परंपरागत स्रोत असमर्थ सिद्ध हो रहे हैं, अतः ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को खोजने की आवश्यकता अनुभव की गई है । “वैज्ञानिकों ने ऊर्जा के जिन नए स्रोतों को खोज निकाला हैं, उन्हें ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत या गैर-परंपरागत स्रोत कहा जाता है ।” यदि ऊर्जा के इन वैकल्पिक स्रोतों की खोज न की गई होती, तो समूचा विश्व ऊर्जा संसाधनों के अभाव के भीषण संकट से ग्रसित हो गया होता। जैसे पुरानी और घिसी-पिटी परंपराओं को नई विचारधाराएँ भुलवा देती हैं, वैसे ही नवीन गैर-परंपरागत ऊर्जा के साधनों ने परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के महत्व को घटा दिया है । वैकल्पिक ऊर्जा के मुख्य स्रोत निम्नलिखित हैं
(i) सौर ऊर्जा
(ii) पवन ऊर्जा
(iii) बायो गैस ऊर्जा
(iv) भूतापीय ऊर्जा
(v) ज्वारीय ऊर्जा
(vi) औद्योगिक कूड़े-कचरे से उत्पन्न ऊर्जा
(vii) सागरीय लहरों से उत्पन्न ऊर्जा
गैर-परंपरागत (वैकल्पिक) ऊर्जा स्रोतों का महत्व- गैर-परंपरागत ऊर्जा के नवीन स्रोतों ने अंधकार में डूबती मानवता को तिनके का सहारा बनकर उबार लिया है । वर्तमान दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले टी०वी०, फ्रिज, माइक्रोवेव, ए.सी. तथा अन्य उपकरण इन साधनों के बिना शांत और निर्जीव पड़े रहते हैं ||गैर-परंपरागत ऊर्जा के महत्व को निम्नवत् व्यक्त किया जा सकता है
(i) गैर-परंपरागत ऊर्जा के स्रोतों ने पारंपरिक ऊर्जा के स्रोतों का स्थान लेकर मानवता को इनके अभाव के गंभीर संकट में फँसने से बचाया है ।
(ii) गैर-परंपरागत ऊर्जा के स्रोतों ने मानव के दैनिक जीवन को सुगम और सुखद बना दिया है ।
(iii) गैर-परंपरागत ऊर्जा के स्रोतों ने कृषि, परिवहन तथा उद्योगों को नवजीवन दिया है ।
(iv) गैर-परंपरागत ऊर्जा के स्रोतों ने धूप, पवन, जल, भूगर्भीय ताप, ज्वारशक्ति तथा लहरों की शक्ति के साथ-साथ कूड़ा करकट जैसे व्यर्थ पड़े रहने वाले पदार्थों को ऊर्जा में बदलकर इनको महत्वपूर्ण संसाधन बना दिया है ।
(v) ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोत पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं क्योंकि इनसे प्रदूषण बहुत कम होता है ।
(vi) ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोत नवीकरणीय स्रोत हैं, इनकी सेवाएँ मानवमात्र को सदैव मिलती रहेंगी।

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