दामोदर घाटी अथवा भाखड़ा नांगल बाँध बहुउद्देशीय परियोजना

दामोदर घाटी अथवा भाखड़ा नांगल बाँध बहुउद्देशीय परियोजना का विस्तार पूर्वक वर्णन

प्रश्न — दामोदर घाटी अथवा भाखड़ा नांगल बाँध बहुउद्देशीय परियोजना का सविस्तार वर्णन कीजिए।

 उ०- दामोदर घाटी परियोजना- पं० बंगाल, बिहार तथा झारखंड राज्यों का शोक कहलाने वाली दामोदर तथा उसकी सहायक नदियों पर 1948 ई० में 8 बाँध बनाए गए। अतीत में दामोदर नदी अपनी भंयकर बाढ़ के लिए कुख्यात रही है। इसकी बाढ़ से लगभग 18,000 वर्ग किमी० भूमि प्रभावित रहती थी। पश्चिम बंगाल और बिहार राज्यों की यह सम्मिलित योजना दामोदर घाटी परियोजना के नाम से विख्यात है। इस परियोजना की व्यवस्था के लिए दामोदर घाटी विकास निगम की स्थापना की गई। इस निगम द्वारा दामोदर नदी की बाढ़ को नियंत्रित करने तथा छोटा नागपुर क्षेत्र के बहुमुखी विकास के लिए दामोदर घाटी परियोजना का निर्माण किया गया। यह विश्व की दूसरी सबसे बड़ी परियोजना है। इस परियोजना में तिलैया, मैथान, कोनार, पंचेत पहाड़ी, बोकारो, बाल पहाड़ी, बर्नपुर व दुर्गापुर नामक स्थानों पर आठ बाँध बनाए गए हैं। परियोजना के लाभ- दामोदर घाटी परियोजना पं० बंगाल, बिहार तथा झारखंड राज्यों के लिए बड़ी उपयोगी सिद्ध हुई है। इस परियोजना के प्रमुख लाभ निम्नवत हैं

(i) इस परियोजना ने पं० बंगाल, बिहार तथा झारखंड राज्यों को दामोदर नदी में आने वाली विनाशकारी बाढ़ों द्वारा होने वाले विनाश से बचा दिया है।

 (ii) इस परियोजना में निकाली गई नहरें लगभग 8 लाख हेक्टेयर भूमि सींचकर अन्न उत्पादन बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुई हैं।

(iii) इस परियोजना ने इस क्षेत्र में चावल, जूट और गन्ना का उत्पादन कई गुना बढ़ा दिया है।

 (iv) झारखंड राज्य में शहतूत के वृक्षों पर रेशम के कीड़े पालने का धंधा विकसित हुआ है।

 (v) इस परियोजना में बनी बिजली ने औद्योगीकरण को सुदृढ़ आधार प्रदान किया है।

भाखड़ा नांगल बाँध परियोजना- यह देश की अब तक की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना है। पंजाब राज्य में सतलुज नदी के जल को सिंचाई और विद्युत निर्माण के उपयोग में लाने हेतु भाखड़ा नांगल परियोजना का निर्माण किया गया है। यह परियोजना सन् 1969 ई० में बनकर तैयार हुई जिस पर 235 करोड़ रूपए व्यय हुए। इसमें पंजाब के रोपड़ नामक स्थान से 80 किमी० ऊपर उत्तर की ओर ‘भाखड़ा’ नामक गाँव के निकट एक विशाल बाँध बनाया गया है। भाखड़ा बाँध के पीछे विशाल गोविंद सागर नामक कृत्रिम झील में जल एकत्र किया गया है, यह झील 88 किमी० लंबी तथा 2 से 8 किमी० चौड़ी है। इसकी जल धारण क्षमता लगभग 780 हजार हक्टेअर मीटर है। इस बाँध की ऊँचाई 235 मीटर तथा लंबाई 518 मीटर है। यह एशिया महाद्वीप का सबसे ऊँचा बाँध है। भाखड़ा बाँध से 13 किमी० नीचे नांगल नामक दूसरा बाँध बनाया गया है जो 29 मीटर ऊँचा, 315 मीटर लंबा तथा 121 मीटर चौड़ा है। इस बाँध से 64 किमी० लंबी नागल पन-विद्युत नहर निकाली गई है। इस परियोजना में निकाली गई नहरों की कुल लंबाई 4500 किमी० है। इन नहरों से 27 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है।

परियोजना के लाभ- भाखड़ा नांगल परियोजना से मुख्य रूप में निम्नलिखित लाभ हुए हैं(i) भाखड़ा नांगल परियोजना से निकाली गई नहरों ने पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान राज्यों में खेतों की सिंचाई करके

कृषि उत्पादन को बढ़ा दिया है।

  • सिंचाई की सुविधाएँ बढ़ने से खेतों ने अधिक अन्न उगा कर, सोना पैदा कर दिया है।
  • इस परियोजना के विद्युत गृहों में लगभग 12 लाख किलोवाट बिजली बनती है।
  • (iv) बिजली का उपयोग नलकूप चलाने, नगरों में प्रकाश करने तथा उद्योग-धंधे चलाने में किया जाता है।
  •  (v) नांगल में स्थापित नांगल फर्टिलाइजर का कारखाना उर्वरक बनाने में अग्रणी बन गया है।

 (vi) गोविंद सागर झील से मछलियाँ पकड़ी जाती हैं, तथा वन क्षेत्रों से लकड़ी के लठे ढोए जाते हैं।

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