Up board class 10 social science chapter 35: मानवकृत आपदाएँ (विस्फोट वैश्विक तापन, ओजोन क्षरण, रेडियोधर्मिता कारण एवं प्रबंधन)

Up board class 10 social science chapter 35: मानवकृत आपदाएँ (विस्फोट वैश्विक तापन, ओजोन क्षरण, रेडियोधर्मिता कारण एवं प्रबंधन)

UP BOARD CLASS 10 SOCIAL SCIENCE CHAPTER 6
UP BOARD CLASS 10 SOCIAL SCIENCE CHAPTER 35 मानवकृत आपदाएँ

पाठ–35 मानवकृत आपदाएँ (विस्फोट वैश्विक तापन, ओजोन क्षरण, रेडियोधर्मिता कारण एवं प्रबंधन)
लघुउत्तरीय प्रश्न
प्रश्न—-1. मानवकृत आपदा क्या है? मानवकृत दो आपदाओं के नाम लिखिए।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से जहाँ मानव ने विकास की नई-नई बुलंदियों को हासिल किया है। वहीं आपदाओं के रूप में विनाश के द्वार भी खोल दिए हैं। मानव की क्रियाओं के कारण जिन संकटों का उदय हुआ है, उन्हें मानवकृत आपदाएँ कहते हैं। दूसरे शब्दों में ‘मानव की क्रियाओं और त्रुटियों के कारण उत्पन्न होने वाली विनाशकारी घटनाओं को मानवकृत आपदाएँ कहते हैं।’ नाभिकीय विस्फोट, रासायनिक दुर्घटना, परिवहन दुर्घटनाएँ, ओजोन क्षरण, ग्रीन हाउस प्रभाव,
रेडियोधर्मी- प्रदूषण आदि मानवकृत आपदाएँ हैं।
प्रश्न—- 2. वैश्विक तापन के दो कारण क्या हैं? उसे रोकने के दो उपाय सुझाइए।

उ०- वैश्विक तापन के दो कारण
(i) वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड गैस की मात्रा में अत्यधिक वृद्धि होना।
(ii) खनिज तेल तथा अन्य ईंधनों के प्रयोग में अपार वृद्धि हो जाना।
वैश्विक तापन को रोकने के दो उपाय
(i) वायुमंडल में बढ़ रही कार्बन डाई ऑक्साइड गैस की मात्रा पर प्रभावी नियंत्रण लगाना। (ii) खनिज तेल तथा अन्य ईंधनों को जलाने पर प्रतिबंध लगाकर उसे सीमित करना।

प्रश्न —ओजोन परत में क्षरण से क्या आशय है? इसके लिए उत्तरदायी दो कारण लिखिए।
उ०- वायुमंडल में अवस्थित ओजोन गैस की परत पृथ्वी का रक्षा कवच कही जाती है क्योंकि यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पैराबैंगनी किरणों को रोककर उनके दुष्प्रभाव से पृथ्वी की रक्षा करती है। वैश्विक तापन और ग्रीन हाउस प्रभाव से ओजोन गैस की परत के पतली होने को ओजोन गैस की परत का क्षरण कहते हैं। इसके लिए उत्तरदायी दो कारण निम्न प्रकार हैं
(i) रासायनिक अभिक्रियाओं का बढ़ता प्रभाव।
(ii) क्लोरोफ्लोरोकार्बन परमाणु द्वारा ओजोन के अणुओं का विनाश करना।


प्रश्न—- 4. ग्रीन हाउस प्रभाव के लिए दो उत्तरदायी कारण क्या हैं? इसे रोकने के दो उपाय लिखिए।
उ०- ग्रीन हाउस प्रभाव के दो उत्तरदायी कारण निम्नवत् हैं
(i) लकड़ी, कोयला, खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस आदि जैविक ईंधन ग्रीन हाउस गैस के जनक हैं।
(ii) औद्योगिक संस्थानों की भट्टियों से निकलने वाला धुआँ ग्रीन हाउस प्रभाव बढ़ाने वाला मुख्य स्त्रोत है। ग्रीन हाउस प्रभाव को रोकने के दो उपाय निम्नवत् हैं
(i) वायुमंडल में बढ़ रही कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा को कम करना।
(ii) कारखानों से निकलने वाली घातक तथा विषैली गैसों पर प्रभावी नियंत्रण लगाना।


प्रश्न—- 5. रेडियाधर्मी प्रदूषण क्या है? इसे रोकने के दो उपाय लिखिए।
उ०- रेडियाधर्मी प्रदूषण- यूरेनियम तथा थोरियम परमाणु खनिजों के विखंडन की प्रक्रिया में रेडियोधर्मी पदार्थों की सक्रियता
के कारण वायुमण्डल में फैलने वाला हानिकारक प्रभाव रेडियाधर्मी प्रदूषण कहलाता है। पर्यावरण प्रदूषण के माध्यम से रेडियोधर्मी तत्व मानव की अस्थियों में घुसकर कैंसर जैसे भयानक रोगों को जन्म देते हैं।
रेडियोधर्मी प्रदषण को रोकने के उपाय- (i) परमाणु विस्फोटों पर तुरंत प्रभावी रोक लगनी चाहिए, (ii) परमाणु ऊर्जा
रियेक्टर बस्तियों से दूर लगाए जाने चाहिए।
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न —भूमंडलीय तापन क्या है? इसके लिए कौन-कौन से कारण उत्तरदायी हैं? इसे रोकने के उपाय सुझाइए।
उ०- भूमण्डलीय तापन- औद्योगिक विकास, दहन क्रियाओं और वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मात्रा बढ़ने से
जैवमंडल के ताप में जो निरंतर वृद्धि हो रही है, उसे वैश्विक तापन अथवा ग्लोबल वार्मिंग या भूमंडलीय तापन कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, “वायुमंडल के औसत तापमान में निरंतर वृद्धि होने की प्रक्रिया को वैश्विक तापन कहा जाता है।” भूमंडलीय तापन की यह समस्या धीरे-धीरे आपदा का रूप धारण करती जा रही है। भूमंडलीय तापन के कारण- भूमंडलीय तापन की समस्या निम्नलिखित कारणों से उत्पन्न हो रही है
(i) वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मात्रा में भारी वृद्धि हो जाना।
(ii) वनों का भारी विनाश हो जाना।
(iii) भूमि के उपयोग के स्वरूप में भारी फेर-बदल हो जाना।
(iv) खनिज तेल तथा अन्य ईंधनों के प्रयोग में अपार वृद्धि हो जाना।
(v) औद्योगिकरण का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाना।
(vi) जनसंख्या के आकार एवं विस्तार में आश्चर्यजनक वृद्धि हो जाना।
(vii) कृषि उत्पादन के कारण वाष्पोत्सर्जन की मात्रा का बढ़ जाना।
(viii) फ्रिज तथा रेफ्रीजरेशन से फ्लोरोकार्बन की मात्रा में भारी वृद्धि हो जाना।


भूमंडलीय तापन के दुष्प्रभाव– भूमंडलीय तापन के दुष्प्रभावों से समूचा विश्व आहत हो रहा है। इसके प्रमुख दुष्प्रभाव निम्न हैं(i) जलवायु-चक्र में परिवर्तन आने से अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
(ii) वायुमंडल में निरंतर उष्णता बढ़ने से पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि के कारण जीव-जगत त्रस्त हो रहा है।
(iii) तापमान बढ़ने से पर्वत शिखरों पर ग्लेशियर पिघल रहे हैं।
(iv) ग्लेशियर पिघलने से महासागरों में जल-स्तर बढ़ने से बाढ़ आने की संभावना उत्पन्न हो गई है।
(v) वायुमंडल के हरित गृह प्रभाव में वृद्धि हो रही है।
भूमंडलीय तापन का निराकरण- भूमंडलीय तापन का निराकरण निम्न उपायों से किया जा सकता है
(i) वायुमंडल में बढ़ रही कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मात्रा पर प्रभावी नियंत्रण लगाना।
(ii) वनों के विनाश को रोककर, वृक्षारोपण पर बल देना।
(iii) भूमि उपयोग व्यवस्था को वैज्ञानिक ढंग से लागू करना।
(iv) खनिज तेल तथा अन्य ईंधनों के जलाने पर प्रतिबंध लगाकर उसे सीमित बनाना।
(v) औद्योगिकरण के बढ़ते स्तर को घटाना।
(vi) तीव्र गति से बढ़ रही जनसंख्या पर प्रभावी रोक लगाना।
(vii) कृषि में हरित क्रांति को सही ढंग से लागू कराना।
(viii) पर्यावरण के संतुलन को ठीक से बनाए रखना।


प्रश्न—-2. हरित गृह प्रभाव (ग्रीन हाउस प्रभाव) के लिए कौन-कौन से कारण उत्तरदायी हैं? इसे रोकने के उपाय बताइए।
उ०- ग्रीन हाउस प्रभाव (हरित गृह प्रभाव)- पृथ्वी के चारों ओर गैसों का जो विशाल आवरण है, वह वायुमंडल कहलाता है। सूर्य की किरणें पहले भूतल को गर्म करती हैं, गर्म तल को छूकर ही वायुमंडल गर्म होता है। वायुमंडल का यह आवरण सूर्य की किरणें भीतर तो आने देता है, परंतु उन्हें बाहर नहीं जाने देता है। ठीक वैसे ही जैसे काँच का बना घर तापमान को भीतर तो आने देता है परंतु उसके लौटने में बाधक बन जाता है। वायुमंडल के इस प्रभाव को ही ग्रीन हाउस प्रभाव कहा जाता है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण कार्बन डाइऑक्साइड तथा विषैली गैसों का दुष्प्रभाव एक मोटा सा आवरण बना लेता है, जिससे
पृथ्वी के निकट तापमान बढ़ता रहता है। इसी से ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण- ग्रीन हाउस प्रभाव की उत्पत्ति के लिए निम्नलिखित कारण उत्तरदायी होते हैं
(i) कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन तथा हाड्रोजन गैसें ग्रीन हाउस प्रभाव को बढ़ाने में सहायक हैं।
(ii) लकड़ी, कोयला, खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस आदि जैविक ईंधन ग्रीन हाउस प्रभाव के जनक हैं।
(iii) स्वचालित वाहनों में जीवाश्म ईंधन के प्रयोग से निकलने वाला धुंआ तथा कार्बन, ग्रीन हाउस प्रभाव को बढाता है।
(iv) औद्योगिक संस्थानों में भट्टियों से निकलने वाला धुंआ ग्रीन, हाउस प्रभाव बढ़ाने वाला मुख्य स्रोत है।
(v) ज्वालामुखी के उद्गार से निकलने वाला धुंआ, राख तथा गैसें ग्रीन हाउस प्रभाव को जन्म देती हैं।
(vi) वनस्पतियों की सड़न से उत्पन्न दुर्गंधमय गैसें ग्रीन हाउस प्रभाव की जन्मदाता हैं।
(vii) वनों के अंधाधुंध कटान होने से ग्रीन हाऊस प्रभाव में निरंतर वृद्धि हुई है। ग्रीन हाउस दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने के उपाय- ग्रीन हाउस दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित उपाय काम में लाए जा सकते हैं
(i) वायुमंडल में बढ़ रही कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को कम करना।
(ii) वृक्षारोपण द्वारा हरित पट्टी क्षेत्र को बढ़ाना।
(iii) कारखानों से निकलने वाली घातक तथा विषैली गैसों पर प्रभावी नियंत्रण लगाना। (iv) जेट वायुयानों से छोड़ी जाने वाली विषैली गैसों पर रोक लगाना।
(v) क्लोरोफ्लोरोकार्बन तथा मोनो ऑक्साइड गैसों को वायुमंडल में मिलने से रोकना।

Up board class 10 social science chapter 30 देश की आंतरिक सुरक्षा-व्यवस्था


प्रश्न—-3. रेडियोधर्मी प्रदूषण के क्या कारण हैं? इसे रोकने के उपाय बताइए। उ०- रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण निम्नवत् हैं
(i) मानवीय भूल, तकनीकी अकुशलता या कुप्रबंध एवं अव्यवस्था जिसके फलस्वरूप परमाणु ईधन संयंत्रों में विस्फोट या
रेडियोधर्मी पदार्थो। के रिसाव के कारण तबाही की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
(ii) मानवीय दुष्प्रवृतियाँ; जो युद्ध, आतंकवाद या राजनीतिक स्वार्थों के वशीभूत होती रहीं हैं; भी नाभिकीय विस्फोट का
कारण होती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा दूसरे विश्व युद्ध में जापान के नागासाकी व हिरोशिमा नगरों व वियतनाम
युद्ध के दौरान राजनीतिक स्वार्थों के कारण ही परमाणु बमों का प्रयोग किया गया था।
(iii) नाभिकीय विखंडन के फलस्वरूप इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन, न्यूट्रान तथा एल्फा, बीटा, गामा किरणें वायुमण्डल में मिलकर हानिकारक बनाकर रेडियाधर्मी प्रदूषण को जन्म देते हैं।
रेडियोधर्मी प्रदूषण पर नियंत्रण करने के उपाय- रेडियोधर्मी प्रदूषण पर नियंत्रण करना नितांत आवश्यक है। इसे नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं
(i) परमाणु विस्फोटों पर तुरंत प्रभावी रोक लगा देनी चाहिए। (ii) परमाणु ऊर्जा रिएक्टर्स बस्तियों से दूर लगाए जाने चाहिए।
(iii) परमाणु ऊर्जा रिएक्टर्स में रख-रखाव के साथ-साथ दुर्घटनाओं से निबटने की चाक-चौबंद व्यवस्था की जानी चाहिए।
(iv) परमाणु शक्ति का उपयोग चिकित्सा, शांति और औद्योगिक कार्यों के लिए ही किया जाना चाहिए।
(v) युद्ध तथा सैन्य अस्त्र-शस्त्रों के उपयोग के लिए परमाणु शक्ति का उपयोग तुरंत प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए।
(vi) पर्यावरण की समय-समय पर जाँच कराकर परमाणु तत्वों की उपस्थिति की जाँच कराई जानी चाहिए। (vii) परमाणु कचरे को सुरक्षित रूप से भूमि में गहराई पर दबा देना चाहिए। (viii) अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाकर भी रेडियोधर्मी प्रदूषण पर रोक लगाई जा सकती है।
वास्तव में रेडियोधर्मी प्रदूषण मानव की ही देन है, वही उस पर ठीक ढंग से नियंत्रण बना सकता है।


प्रश्न—-4. रेडियोधर्मी प्रदूषण के स्रोत कौन-कौन से हैं? इसके दुष्प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
उ०- रेडियोधर्मी प्रदूषण के स्त्रोत- रेडियोधर्मी प्रदूषण निम्नलिखित स्रोतों से उत्पन्न होता है|
(i) परमाणु परीक्षण के लिए जो नाभिकीय विस्फोट किए जाते हैं, उनसे निकलने वाले तत्व रेडियोधर्मी प्रदूषण के स्रोत
होते हैं जो अपने विकिरण द्वारा समस्त जैवमंडल के घटकों को प्रभावित करते हैं।
(ii) परमाणु भट्टियों में परमाणु ईंधन का प्रयोग होता है, उनसे निकलने वाले तत्व प्रदूषण के स्रोत होते हैं।
(iii) परमाणु ऊर्जा के संयंत्रों (बिजलीघरों) में दुर्घटनाएँ होने के फलस्वरूप रिसने वाली गैसें, रेडियोधर्मी प्रदूषण के स्रोत बन जाती हैं।

(iv) परमाणु बम तथा हाइड्रोजन बम के निर्माण में यूरेनियम, थोरियम, पोलोनियम का प्रयोग होता है। इनसे रेडियोधर्मी
पदार्थ का छोटे-छोटे कणों के रूप मे वायुमंडल में फैलाने का खतरा बना रहता है।
(v) खनिज पदार्थों का खनन करते समय प्रकृति में विद्यमान अनेक रेडियोधर्मी तत्व धूल के साथ उड़कर वायुमंडल में पहुँचकर रेडियोधर्मी प्रदूषण के स्रोत बन जाते हैं।
(vi) चिकित्सा के क्षेत्र में प्रयुक्त होने वाले एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड तथा सी०टी० स्कैन आदि में रेडियोधर्मी पदार्थों का
बर्हिगमन होता है,जो रेडियोधर्मी प्रदूषण के स्रोत बन जाते हैं।
(vii) अनुसंधानशालाओं में परमाणु विकास के लिए जो शोध कार्य चलते हैं, उनसे निकलने वाले रेडियो धर्मी तत्व, रेडियोधर्मी प्रदूषण के स्रोत बन जाते हैं।

रेडियोधर्मी प्रदूषण के दुष्परिणाम- रेडियोधर्मी प्रदूषण एक खतरनाक मानवकृत आपदा है। इसके मानव के जीवन पर निम्नलिखित दुष्प्रभाव पड़ते हैंरेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण मानव के शरीर में खून की कमी, बालों का झड़ना, ल्यूकोमिया तथा अस्थियों का कैंसर
जैसे रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
(ii) यह प्रदूषण तंत्रिका तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
(iii) इस प्रदूषण के कारण गर्भ से विकलांग शिशुओं का जन्म होता है।
(iv) परमाणु विस्फोट के समीप का 16 किमी० का क्षेत्र वनस्पति विहीन हो जाता है।
(v) रेडियोधर्मी प्रदूषण तीव्र वर्षा तथा तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं को जन्म देकर विनाश का कारण बनता है।

(vi) रेडियोधर्मी प्रदूषण पशुओं तथा अन्य जीवों को भारी हानि पहुँचाता है।
(vii) रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण कीट-पंतगों का जीवन-चक्र ही बदल जाता है।


प्रश्न—- 5. नाभिकीय परमाणु विस्फोट जनित आपदाओं पर लेख लिखिए।
उ०- नाभिकीय परमाणु विस्फोट- नाभिकीय ऊर्जा से युक्त परमाणु बमों के विस्फोट से उत्पन्न आपदा ‘नाभिकीय विस्फोट आपदा’ कहलाती है। परमाणु बमों के परीक्षण, युद्ध के समय परमाणु बमों के हमले (अमेरिका द्वारा जापान पर परमाणु बमों से हमला), परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में रेडियोधर्मी पदार्थों के रिसाव आदि से इस प्रकार की आपदाएँ उत्पन्न होती हैं। इस प्रकार के विस्फोट या रिसाव से निकलने वाले एल्फा, बीटा तथा गामा विकिरणों से जान व माल की भारी तबाही होती है। ऐसे विकिरण नाभिकीय अणुओं के विखण्डन से उत्पन्न होते हैं। कारण- नाभिकीय विस्फोटों के पीछे दो मूल कारण निहित होते हैं

(i) मानवीय भूल व अकुशलता– मानव की भूल, अव्यवस्था, अकुशलता, कुप्रबंध आदि के कारण परमाणु संयंत्रों में विस्फोट या रेडियोधर्मी पदार्थों के रिसाव के कारण भारी तबाही की स्थिति उत्पन्न होती है
(ii) मानवीय दुष्प्रवृतियाँ– युद्ध, आतंकवाद आदि की घटनाएँ मानव के राजनीतिक स्वार्थों तथा दुष्प्रवृतियों के कारण
होती हैं। नाभिकीय परमाणु विस्फोट के स्रोत, प्रभाव तथा नियंत्रण के उपाय- इसके लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या
3 व 4 में रेडियाधर्मी प्रदूषण संबंधी स्रोत, दुष्प्रभाव एवं नियंत्रण के उपायों का अवलोकन कीजिए।

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