up board class 10 hindi full solution chapter 7 sanskritk khand

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up board class 10 hindi full solution chapter 7 sanskritk khand छान्दोग्य उपनिषद षष्ठोध्याय


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में लिखिए :

प्रश्न –श्वेतकेतुः कः?
उत्तर – श्वेतकेतुः आरुणेयपुत्र: आसीत् |

प्रश्न –आरुणि श्वेतकेतुं किम् अकथयत्?
उत्तर – आरुणि श्वेतकेतुं अकथयत् यत् श्वेतकेतो वस ब्रह्मचर्यम्। न वै सोम्यास्मत्कुलीनोअननूच्य ब्रह्मबन्धुरिव भवतीति |

प्रश्न –कः ब्रह्मचर्यवासम् अकरोत् ?
उत्तर – श्वेतकेतुः ब्रह्मचर्यवासम् अकरोत् |

प्रश्न –श्वेतकेतुः ब्रह्मचर्यवासाय कुत्र अगच्छत्?
उत्तर – श्वेतकेतुः ब्रह्मचर्यवासाय गुरुकुलम् अगच्छत् |

प्रश्न –श्वेतकेतुः कति वर्षाणि सर्वान् वेदान अपठत् ?
उत्तर – श्वेतकेतुः द्वादशवर्षाणि सर्वान् वेदान अपठत्|

प्रश्न –क: आरुणिम् गुरुरूपेण स्वीकरोति ?
उत्तर – श्वेतकेतुः आरुणिम् गुरुरूपेण स्वीकरोति |

अनुवादात्मक प्रश्न — up board class 10 hindi full solution chapter 7 sanskritk khand पाठ का हिंदी अनुवाद

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांशों का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए
(क) श्वेतकेतुर्हारुणेय आस—————ब्रह्मबन्धुरिव भवतीति।
श्वेतकेतुर्हारुणेय आस त ह पितोवाच श्वेतकेतो वस ब्रह्मचर्यम्। न वै सोम्यास्मत्कुलीनोऽननूच्य ब्रह्मबन्धुरिव भवतीति।।
सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्य खण्ड हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी के संस्कृत खण्ड के छान्दोग्य उपनिषद् षष्ठोध्याय: नामक पाठ से लिया गया है |
अनुवाद – आरुणि का पुत्र श्वेतकेतु था उससे एक बार पिता ने कहा हे श्वेतकेतु तुम ब्रह्मचर्य का पालन करो क्योंकि हमारे कुल में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं हुआ जो ब्रह्म बंधु के समान लगता हो |
(ख) स ह द्वादशवर्ष उपेत्य—————तमादेशमप्राक्ष्यः।
स ह द्वादशवर्ष उपेत्य चतु विशतिवर्षः सर्वान् वेदानधीत्य महामना अनूचानमानी स्तब्ध एयाय। त ह पितोवाच श्वेतकेतो यन्नु सोम्येदं महामना अनूचानमानी स्तब्धोऽस्युत तमादेशमप्राक्ष्यः।
अनुवाद – 12 वर्ष तक आश्रम जाकर 24 वर्ष की उम्र तक श्वेतकेतु समस्त वेदों को पढ़कर स्वाभिमानी पांडित्य मना अहंकार युक्त होकर लौटा | तो उसके पिता ने कहा श्वेतकेतु तुम जो इस तरह से अमनस्वी पांडित्य मना और अभिमान से युक्त हो तुमने कौन सी विशेषता पाई है |
(ग) येनाश्रुत श्रुतं भवत्यमतं—————आदेशो भवतीति।
(घ) यथा सोम्यैकेन लोहमणिना– ———-लोहमित्येव सत्यम्।
(ङ) यथा सोम्यैकेन नखनिकृन्तनेन ——————-आदेशो भवतीति।

येनाश्रुत – श्रुतं भवत्यमतं मतमविज्ञातं विज्ञातमिति। कथं नु भगवः स आदेशो भवतीति।। न वै नूनं भगवन्तस्त एतदवेदिषुर्यद्ध्येतदवेदिष्यन् कथं मे नावक्ष्यन्निति भगवा “स्त्वेव मे तद्ब्रवीत्विति तथा सोम्येति होवाच।। यथा सोम्यैकेन नखनिकृन्तनेन सर्वं कार्णायसं विज्ञात स्याद्वाचारम्भणं विकारो नामधेयं कृष्णायसमित्येव सत्यमेव सोम्य स आदेशो भवतीति।।

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अनुवाद- जिसके समझ लेने पर आश्रित पदार्थ का ज्ञान हो जाता है जो अतार्किक है उसे तार्किक भी याद हो जाए और अविज्ञात भी ज्ञात होता है अनिश्चित भी निश्चित हो जाता है क्या तुमने गुरु से पूछा है| पिता आरुणि ने कहा है श्वेतकेतु जिस प्रकार मिट्टी के पात्रों को देखकर उनके मिट्टी द्वारा बने होने का आभास नहीं किया जा सकता किंतु वास्तव में भी मिट्टी के बने होते हैं अर्थात उन बर्तनों में मिट्टी तत्व होता है यही सत्य है पिता आरुणि ने कहा हे श्वेतकेतु जिस प्रकार चुम्बक को देखकर उसके लोहे द्वारा बने होने का आभास नहीं किया जा सकता किन्तु वास्तव में चुम्बक लोहे का बना होता है अर्थात चुंबक में लौह तत्व होता है यही सत्य है पिता अरुण ने आगे कहा हे श्वेतकेतु जिस प्रकार नेल कटर को देखकर उसके कांसे से द्वारा बने होने का आभास नहीं किया जा सकता किंतु वास्तव में वह काँसे का बना होता है अर्थात नेल कटर में कांसत्व होता है यही सत्य है |
(च) न वै नूनं भगवन्तस्त——————तथा सोम्येति होवाच।
अनुवाद – पिता के एसा कहने पर श्वेतकेतु: ने कहा आप ही मेरे पूज्यनीय गुरूजी है जिसने मुझे आत्म बोध कराया |

up board class 10 hindi full solution chapter 7 sanskritk khand संस्कृत व्याकरण

निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए
(क) ऋग्वेद सबसे प्राचीन ग्रन्थ है।
ऋग्वेद प्राचीनतम ग्रन्थ: अस्ति |
(ख) उपनिषद् ज्ञान के लिये महत्त्वपूर्ण है।
उपनिषद् ज्ञानाय महत्त्वपूर्ण: अस्ति|
(ग) आरुणि ने श्वेतकेतु को आत्मतत्त्व का उपदेश दिया है।
(घ) औपनिषद् दर्शन ही सम्यग्दर्शन है।

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व्याकरणात्मक प्रश्न —

निम्नलिखित शब्दों में सन्धि-विच्छेद कीजिए—
पितोवाच, ब्रह्मबन्धुरिव, वेदानधीत्य, कार्णायसं, सोम्येति, होवाच।
पितोवाच == पिता + उवाच
ब्रह्मबन्धुरिव =ब्रह्मबन्धु:+इव
श्वेतकेतुर्हारुणेय =श्वेतकेतु: + आरुणेय
भगवंतस्त =भगवंत: + त
भवतीति= भवति +इति
कार्णायसं = कार्ण + अयसं
सोम्येति = सोम्य + इति
मृन्मयम् = मृत् +मयम्
होवाच = हा + उवाच
कुलीनोऽननूच्य = कुलीन: + अननूच्य
लौहमित्येव = लोहम्+इति+एव

निम्नलिखित धातुओं में लकार, पुरुष एवं वचन बताइए
वसति, भवन्तु, कथयन्ति, गच्छतु, पठतु, हसताम्।
वसति = लट् लकार प्रथम पुरुष एकबचन
भवन्तु = लट् लकार प्रथम पुरुष बहुबचन
कथयन्ति = लट् लकार प्रथम पुरुष बहुबचन
गच्छतु = लोट् लकार प्रथम पुरुष एकबचन
पठतु = लोट् लकार प्रथम पुरुष एकबचन
हसताम् = लोट् लकार प्रथम पुरुष द्विबचन

यूपी बोर्ड हिंदी संस्कृत खंड अध्याय 5 का संपूर्ण हल

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