Up Board Class 10 hindi solution chapter 3 क्या लिखूँ गद्य खंड

Up Board Class 10 hindi solution chapter 3 क्या लिखूँ गद्य खंड – पदुम लाल पुन्नालाल बख्शी

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पाठ -3 क्या लिखूं पदुम लाल पुन्नालाल बख्शी
लघु उत्तरीय प्रश्न

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म कहां हुआ था |
उत्तर – पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म 27 मई 18 94 ई० को खैरागढ़ छत्तीसगढ़ में हुआ था |

पदुमलाल पुन्नालाल किस युग के साहित्यकार थे |
उत्तर- पदुमलाल पुन्नालाल द्विवेदी युग के साहित्यकार थे |

बक्शी जी की प्रथम कहानी किस पत्रिका में प्रकाशित हुई उसका नाम क्या था |
उत्तर- बख्शी जी की प्रथम कहानी जबलपुर से निकलने वाली हितकारिणी पत्रिका में प्रकाशित हुई उसका नाम तारिणी था |

बख्शी जी के पिता और पितामह का नाम बताइए |
उत्तर- बक्शी जी के पिता का नाम उमराव बक्शी और पितामह का नाम पुन्नालाल बख्शी था |

सरस्वती पत्रिका का संपादन बक्शी जी ने किस साहित्यकार के बाद किया |
उत्तर – सरस्वती पत्रिका का संपादन बक्शी जी ने महावीर प्रसाद द्विवेदी के बाद किया |

बख्शी जी के दो काव्य संग्रहों के नाम बताइए |
उत्तर – बक्शी जी के दो काव्य संग्रह अश्रुद्ल और शतदल हैं |

बक्शी जी ने किस प्रकार की रचनाएं की हैं |
उत्तर- बक्शी जी ने मुख्य रूप से आलोचनात्मक और निबंधात्मक रचनाएं की हैं |

बख्शी जी की दो अनूदित रचनाओं के नाम बताइए |
उत्तर- बख्शी जी की दो अनूदित रचनाएं – तीर्थ स्थल और प्रायश्चित हैं |

बक्शी जी ने बक्शी जी ने सरस्वती पत्रिका के अतिरिक्त कौन सी पत्रिका का संपादन किया |
उत्तर- बक्शी जी ने सरस्वती पत्रिका के अतिरिक्त मासिक ‘छाया’ का संपादन किया |

पदुमलाल पुन्ना लाल जी का निधन कब हुआ |
उत्तर- पदुमलाल पुन्ना लाल जी का निधन 1971 ई० में हुआ |

Up Board Class 10 hindi solution chapter 3 क्या लिखूँ
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

पदुम लाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय देते हुए उनकी रचनाओं पर प्रकाश डालिए |
उत्तर – पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी द्विवेदी युग के प्रसिद्ध साहित्यकार थे | वे एक कुशल हास्य व्यंगाकार गंभीर विचारक और आलोचक थे | बक्शी जी ने अपने निबंधों में विशेष रुप से ललित निबंधों में बहुत योगदान दिया है | जिसके लिए वह सदैव याद रखे जाएंगे | बख्शी जी अंग्रेजी कवि वर्ड्सवर्थ से बहुत प्रभावित हुए जिन से प्रेरित होकर इन्होंने स्वच्छता वादी कविताएं लिखी | बख्शी जी की प्रसिद्ध का मुख्य आधार आलोचना निबंध लेखन था |
जीवन परिचय – पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म 27 मई 1894 खेरागढ़ छत्तीसगढ़ में हुआ था इनके पिता उमराव बख्शी व् पितामह पुन्नालाल बख्शी प्रतिष्ठित व्यक्ति थे | 14 वीं शताब्दी में बख्सी जी के पूर्वज लक्ष्मीनिधि राजा के साथ मंडला से खैरागढ़ में आए थे तब से यही बस गए | पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी की प्राइमरी की शिक्षा खेरागढ़ में ही संपन्न हुई | 1911 में मैट्रिक की परीक्षा में बैठे | गुलाम अली के निर्देशन पर उनके नाम के साथ उनके पितामह का नाम लिखा गया तब से यह अपना पूरा नाम लिखने लगे | मैट्रिकुलेशन की परीक्षा ये अनुत्तीर्ण हो गये | उसी वर्ष उन्होंने साहित्य जगत में प्रवेश किया | उन्होंने मैट्रिकुलेशन की परीक्षा 1912 में पास की | शिक्षा के लिए उन्होंने बनारस के सेंट्रल हिंदू कॉलेज में प्रवेश लिया | सन् 1913 में लक्ष्मी देवी के साथ उनका विवाह हो गया | 1916 में उन्होंने b.a. की उपाधि प्राप्त की तथा उनकी नियुक्ति राजा नंद गांव में संस्कृत के अध्यापक के पद पर हुई |सन् 1971 में इनकी जीवन लीला समाप्त हो गयी |
रचनाये—

काव्य- अश्रुद्ल, शतदल

आलोचना – विश्व साहित्य हिंदी कहानी साहित्य, हिंदी साहित्य विमर्श, हिंदी उपन्यास साहित्य |

निबंध संग्रह – पञ्च पात्र पद्म वन प्रबंध पारिजात कुछ बिखरे पन्ने कुछ यात्री
4.कहानी संग्रह – झलमला अंजलि

अनूदित – तीर्थ स्थल, प्रायश्चित उन्मुक्ति का निबंध |

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी की भाषा शैली को विस्तार से समझाइए ||
उत्तर – पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी की भाषा सरल और सहज है | उनकी भाषा में जटिलता और रूखापन नहीं है | इनकी भाषा में कहीं-कहीं पर उर्दू के और अंग्रेजी के शब्द भी पाए जाते हैं, जो भाषा के प्रवाह को सरल बनाते हैं | इनकी भाषा एक आदर्श भाषा है बक्शी जी के अनुसार भाषा ऐसी होनी चाहिए जिसमें सभी प्रकार के विषयों का वर्णन किया जा सके बक्शी जी ने अपने कथनात्मक निबंधों में भावात्मक शैली का प्रयोग किया है | जिसमें छोटी छोटी बातें हैं जिनकी सहायता से भावों की अभिव्यंजना बड़ी कुशलता के साथ गुंथी हुई है | यह शैली सरल और सरस है | इसमें चित्रात्मकता सजीवता और गतिशीलता भी है | इनके आलोचनात्मक निबंधों में गंभीर विषयों को प्रस्तुत करने के लिए व्याख्यात्मक शैली का प्रयोग हुआ है जो कहीं-कहीं पर क्लिष्ट हो गई है इनकी रचनाओं में विचारात्मक शैली के भी दर्शन होते हैं |

अंग्रेजी के प्रसिद्ध……………………………………विषय नहीं |
संदर्भ – प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक हिंदी के गद्य खंड के पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी द्वारा लिखित क्या लिखूं नामक निबंध से लिया गया है |
प्रसंग – यहां पर बक्शी जी ने लेखन के लिए आवश्यक विशेष स्थिति और दशाओं का वर्णन किया है व्याख्या – पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी यहां पर लिखने के लिए आवश्यक दशाओं का वर्णन करते हुए कहते हैं कि लेखन के सम्बन्ध में अंग्रेजी भाषा के प्रसिद्ध निबंधकार ए0 जी0 गार्डिनर ने यह स्पष्ट किया है कि लेखन के लिए एक विशेष प्रकार की मानसिक स्थिति का होना बहुत जरूरी है | इस मानसिक स्थिति के संदर्भ में वे लिखते हैं कि जब मन उल्लास अथवा आनंद से भर उठे, ह्रदय में स्फूर्ति और ताजगी के भाव का अनुभव होने लगे, तथा मस्तिष्क में एक दवाब सा उत्पन्न हो जाए तो लेखक स्वत: ही लिखने के लिए बाध्य हो जाता है मनोभावों के अतिरिक्त स्वत: ही कुछ न कुछ लिखने को व्याकुल होने लगता है और लेखनी उसके मन के भावों को व्यक्त करने लगती है इस प्रकार की मनोदशा में लेखक के लिए विषय और शैली का कोई महत्व नहीं होता है उसका उद्देश्य तो अपने विचारों और भावों को व्यक्त करना ही होता है | मन के विचारों एवं भावों पर आधारित कोई भी विषय हो वह उसी विषय पर तब तक लिखता रहता है जब तक उसके मन में आने वाले विचार शांत ना हो जाए तात्पर्य यह है कि किसी भी प्रकार के लेख लिखने के लिए सर्वप्रथम कुछ विशेष प्रकार के मनोभाव या मनोदशा का होना बहुत जरूरी है विशेष मनोभावों से पूर्ण मष्तिष्क के अभाव में कुछ भी लिख पाना संभव नहीं है | लेख के माध्यम से लेखक बताता है कि जैसे हेट को टांगने के लिए किसी विशेष खूंटी की आवश्यकता नहीं होती अर्थात उसे किसी भी खूंटी पर टांग दिया जाता है वेसे ही मनोभावों को को व्यक्त करने के लिए कोई विशेष विषय की आवश्यकता नहीं होती वह तो किसी भी विषय पर व्यक्त किए जा सकते हैं प्रमुख वस्तु तो हैट है जिसे टांगना है खूंटी नहीं | इसी तरह से वस्तु तो मन के भाव है जिन्हें व्यक्त करना है विषय नहीं, जिस पर विचार व्यक्त करने है|
प्रश्न और उत्तर Up Board Class 10 hindi solution chapter 3 क्या लिखूँ गद्य खंड

  1. उपर्युक्त गद्यांश के पाठ का नाम और लेखक का नाम लिखिए |
    उत्तर- पाठ का नाम क्या लिखूं —लेखक का नाम पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
  2. लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है से लेखक का क्या आशय है |
    उत्तर– यहां पर लेखक का आशय है कि जब लेखक के मन में लिखने के लिए कोई उमंग उमड़ती है शरीर में ताजगी आती है मस्तिष्क में विचारों का एक वेग आता है | उस स्थिति में लेखक को मजबूरी में लिखना ही पड़ता है |
  3. हेट और खूंटी का उदाहरण इस गद्यांश में क्यों दिया गया है और क्यों ?
    उत्तर- हेत और खूंटी का उदाहरण यहां पर यह व्यक्त करता है के हेट को किसी भी खूंटी पर टांगा जा सकता है उसी प्रकार अपने मनोभावों को किसी भी विषय पर प्रस्तुत किया जा सकता है |
  4. ए0जी0 गार्डिनर के अनुसार लेखक को निबंध कब लिखना ही पड़ता है |
    उत्तर- ए0जी0 गार्डिनर के अनुसार एक विशेष मानसिक स्थिति में जब मन में उमंग ह्रदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग उत्पन्न होता है तब लेखक को निबंध लिखना ही पड़ता है |

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