Up Board class 10 science विद्युत चुंबकीय प्रेरण

Up Board class 10 science विद्युत चुंबकीय प्रेरण

पाठ -9 विद्युत चुंबकीय प्रेरण

यहाँ UP Board कक्षा 10 वीं विज्ञान अध्याय : विधुत चुम्बकीय प्रेरण के पहले भाग के लिए स्टडी नोट्स उपलब्ध करवाए जा रहें हैं। विधुत चुम्बकीय प्रेरण यूपी बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान का सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है। इसलिए, छात्रों को इस अध्याय को अच्छी तरह तैयार करना चाहिए। यहां दिए गए नोट्स यूपी बोर्ड की कक्षा 10 वीं विज्ञान बोर्ड की परीक्षा 2021 और आंतरिक परीक्षा में उपस्थित होने वाले छात्रों के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगे। इस लेख में हम जिन टॉपिक को कवर कर रहे हैं वह यहाँ अंकित हैं:
A) फैराडे के विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण सम्बन्धी नियम
B) . विद्युत-चुम्बकीय प्रेरण का प्रायोगिक प्रदर्शन
C)  लेन्ज का नियम
D)  लेन्ज के नियम की व्याख्या
E) . फ्लेमिंग के दाएँ हाथ का नियम तथा प्रेरित धारा की दिशा

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न


प्रश्न 1. विद्युत चुंबकीय प्रेरण से क्या तात्पर्य है? प्रेरित विद्युत वाहक बल को परिभाषित कीजिए ।
उत्तर- विद्युत चुंबकीय प्रेरण- “जब किसी बंद परिपथ से संबंधित चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है तो उस परिपथ में एक विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है और इसी विद्युत वाहक बल के कारण परिपथ में धारा बहने लगती है। यह धारा केवल तभी तक बहती है जब तक कि चुंबकीय फ्लस्क में परिवर्तन होता रहता है। इस घटना को विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहते है।”
प्रेरित विद्युत वाहक बल- जब किसी परिपथ में विद्युत ऊर्जा के स्रोत के अनुपस्थित रहने पर भी विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है तो इस प्रकार का विद्युत वाहक बल प्रेरित विद्युत वाहक बल कहलाता है।

प्रश्न 2. चुंबकीय फ्लक्स से क्या तात्पर्य है? इसका SI मात्रक लिखिए।
उत्तर- चंबकीय फ्लक्स – चुंबकीय क्षेत्र में किसी बिंद पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता एवं इसकी दिशा चुंबकीय बल रेखाओं द्वारा प्रदर्शित की जाती है। चुंबकीय क्षेत्र में स्थित किसी तल से उसके लंबवत् गुजरने वाली संपूर्ण बल रेखाओं की संख्या ही उस तल का चुंबकीय फ्लक्स कहलाता है। इसे के (फाई) से प्रदर्शित करते हैं। यदि A क्षेत्रफल का कोई तल, B प्रबलता के चुंबकीय क्षेत्र में उसके लंबवत् रखा हो, तो

एकांक क्षेत्रफल के अभिलंबवत् गुजरने वाली बल रेखाओं की संख्या = B

.. A क्षेत्रफल से अभिलंबवत् गुजरने वाली बल रेखाओं की संख्या = BA

अर्थात् चुंबकीय फ्लक्स ɸ= BA.. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. … (i)

यदि तल का अभिलंब चुंबकीय क्षेत्र से θ कोण बनाता हो, तब तल से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स ɸ = BA cosθ

चुंबकीय फ्लक्स का मात्रक वेबर या न्यूटन x मीटर/ऐम्पियर होता है।

समीकरण (i) से, ::

.. चुंबकीय क्षेत्र B = ɸ/A
अतः चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता का मात्रक वेबर/मीटर2 है, इसे चुंबकीय फ्लक्स घनत्व भी कहते हैं।

प्रश्न 3. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियमों को लिखिए।

उत्तर- फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम- फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण संबंधी नियम निम्न प्रकार हैं

पहला नियम- जब किसी परिपथ में से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो परिपथ में एक प्रेरित विद्युत वाहक उत्पन्न हो जाता है, जिसका परिमाण चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की ऋणात्मक दर के बराबर होता है।

यदि प्रारंभ में किसी परिपथ से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स ɸ1 क हो तथा Δt समयांतराल के पश्चात् यह बदलकर ɸ2 , हो जाए, तब परिपथ प्रेरित विद्युत वाहक बल

                             E = – (ɸ21)/Δt = Δɸ/Δt

जहाँ  Δɸ= ɸ2 – ɸ1

यदि समयांतराल Δt अनंत सूक्ष्म है, तो  t → dt तथा ɸ→ dɸ

        तब e = -dɸ/dt

यदि dɸ वेबर में तथा dt सेकंड में हो, तो प्रेरित विद्युत वाहक बल e वोल्ट में होगा। यदि परिपथ में कोई कुंडली है, जिसमें तार के N फेरे हैं, तो प्रत्येक फेरे में विद्युत वाहक बल प्रेरित होगा तथा सभी फेरों के विद्युत वाहक बल जुड़ जाएँगे।

अतः पूरी कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल e  = -n Δɸ/Δt जहाँ Nɸ कुंडली में फ्लक्स ग्रंथिकाओं की संख्या है।

 दूसरा नियम- किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल अथवा प्रेरित विद्युत धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है, जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है, इसे लेंज का नियम भी कहते हैं।

 प्रश्न 4. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम लिखिए तथा प्रेरित विद्युत वाहक बल का सूत्र लिखिए।

उत्तर- फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम- दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 3 के अंतर्गत देखिए।

प्रेरित विद्युत वाहक बल का सूत्र e = – (ɸ21)/Δt = Δɸ/Δt

जहाँ Nɸकुंडली में फ्लक्स ग्रंथिकाओं की संख्या है तथा Δt समयांतराल है।

प्रश्न 5. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियमों को लिखिए। प्रेरित वि० वा० बल की दिशा किस प्रकार ज्ञात की जाती है?

 उत्तर- फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम- दीर्घ उत्तरीय प्रश्न संख्या 3 के अंतर्गत देखिए।

प्रेरित वि०वा० बल की दिशा फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियमों के द्वारा ज्ञात की जा सकती है।

प्रश्न 6. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण संबंधी नियम बताइए। प्रेरित धारा की दिशा किस प्रकार निर्धारित की जाती है?

 उत्तर- फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण संबंधी नियम – इसके लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के प्रश्न संख्या-3 का अवलोकन कीजिए।

प्रेरित धारा की दिशा– प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम के अनुसार ज्ञात की जा सकती है। “यदि दाएँ हाथ का अंगूठा और उसके पास वाली दोनों अंगुलियों को एक-दूसरे के लंबवत् फैलाएँ, तब यदि पहली अंगुली चुंबकीय क्षेत्र की दिशा तथा अँगूठा चालक के चलने की दिशा को प्रदर्शित करे, तो बीच वाली अंगुली चालक में प्रेरित धारा की दिशा बताएगी।

प्रश्न 7. फैराडे के विद्युत चुंबकीय नियम लिखिए। इस सिद्धांत पर आधारित किसी यंत्र का नाम बताइए।

फैराडे के विद्युत चुंबकीय नियम- इसके लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के प्रश्न संख्या 3 का अवलोकन कीजिए। विद्युत चुंबकीय नियम के सिद्धांत पर आधारित यंत्र का नाम विद्युत धारा डायनेमो या प्रत्यावर्ती धारा डायनेमो है।
प्रश्न 8. विद्युत चुंबकीय प्रेरण से क्या अभिप्राय है?

उत्तर- विद्युत चुंबकीय प्रेरण- ओस्टेंड ने सन् 1820 में यह आविष्कार किया था कि जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। फैराडे ने यह विचार दिया कि इसका विपरीत प्रभाव भी पाया जाना चाहिए अर्थात् चुंबकीय क्षेत्र से विद्युत धारा उत्पन्न हो जानी चाहिए। इसकी खोज में सन् 1831 में फैराडे ने इंग्लैंड में तथा लगभग उसी समय हैनरी ने अमेरिका में अनेक प्रयोग किए। फैराडे के कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं
प्रयोग 1
कुंडली के दोनों सिरे एक धारामापी से जुड़े हैं। जब हम छड़ चुंबक के उत्तरी ध्रुव (N) को चुंबक | कुंडली की ओर को चलाते हैं तो धारामापी में एक क्षणिक विक्षेप होता है। इससे पता चलता है कि चुंबक की गति से कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होती है। चुंबक को कुंडली से दूर ले जाने पर धारामापी में क्षणिक विक्षेप विपरीत दिशा में होता है अर्थात् अब कुंडली में धारा पहले से विपरीत दिशा में प्रवाहित होती है। इसी प्रकार, यदि चुंबक के दक्षिणी ध्रुव S को कुंडली के समीप लाएँ अथवा दूर हटाएँ तो धारामापी में क्षणिक विक्षेप पहले से विपरीत दिशाओं में होते हैं। धारामापी में विक्षेप केवल तब तक होता है जब तक कि चुंबक गतिशील है। चुंबक के रुकते ही विक्षेप भी लुप्त हो जाता है अर्थात् धारा बंद हो जाती है। यदि चुंबक को स्थिर रखकर कुंडली को चुंबक की ओर लाएँ अथवा चुंबक से दूर ले जाएँ तब भी धारामापी में उसी प्रकार विक्षेप होते हैं। इससे यह पता चलता है कि कुंडली में धारा कुंडली तथा चुंबक के बीच सापेक्ष गति से उत्पन्न होती है। इसमें कोई अंतर नहीं पड़ता कि चुंबक गतिशील है अथवा कुंडली। चुंबक अथवा कुंडली को जितनी तेजी से चलाया जाता है धारामापी में उतना ही अधिक विक्षेप होता है अर्थात् धारा उतनी ही अधिक प्रबल होती है।

यदि कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ा दें अथवा कुंडली के भीतर नर्म लोहे की छड़ रख दें तो भी धारा की प्रबलता बढ़ जाती है। फैराडे के प्रयोगों की व्याख्या- फैराडे ने इस प्रयोग की व्याख्या चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन के आधार पर की। जब एक कुंडली को किसी चुंबक से कुछ दूरी पर रखते हैं तो चुंबक की फ्लक्स रेखाओं की एक निश्चित संख्या कुंडली में से होकर गुजरती है। यदि चुंबक तथा कुंडली में से किसी एक को चलाएँ तो कुंडली में से होकर गुजरने वाली फ्लक्स रेखाओं की संख्या (चुंबकीय फ्लक्स) में परिवर्तन होने लगता है, कुंडली को चुंबक के समीप लाने पर कुंडली में से गुजरने वाली फ्लक्स रेखाओं की संख्या बढ़ने लगती है तथा दूर ले जाने पर घटने लगती है। इसी फ्लक्स परिवर्तन के कारण कुंडली में एक वि०वा०ब० स्थापित होता है तथा धारा प्रवाहित होती है। इस वि०वा०ब० को ‘प्रेरित वि०वा०ब०’ तथा धारा को ‘प्रेरित धारा’ कहते हैं। चुंबकीय फ्लक्स परिवर्तन के कारण वि०वा०ब० के प्रेरित होने की घटना को ‘विद्युत चुंबकीय प्रेरण’ कहते हैं। up board class 10 social science full solution chapter 44 सेवाएँ (परिवहन, दूरसंचार, व्यापार)

प्रश्न 9. लेंज का नियम समझाइए तथा इसके दो उदाहरण दीजिए। प्रेरित धारा से आप क्या समझते हैं? या प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने का लेंज का नियम लिखिए। उत्तर- लेंज का नियम- प्रेरित विद्युत वाहक बल सदैव उस कारण का विरोध करता है जिसके द्वारा वह स्वयं उत्पन्न होता है। अत: यदि कुंडली के चुंबकीय फ्लक्स में वृद्धि होती है तो प्रेरित विद्युत वाहक बल कुंडली के चुंबकीय फ्लक्स को घटाने की कोशिश करता है और यदि कुंडली के चुंबकीय फ्लक्स में कमी होती है तो प्रेरित विद्युत वाहक बल चुंबकीय फ्लक्स को बढ़ाने की कोशिश करता है। अर्थात् यदि (ɸ21) धनात्मक है तो प्रेरित विद्युत वाहक बल e ऋणात्मक होगा और यदि ((ɸ21) ऋणात्मक है तो e धनात्मक होगा।
e= _K(ɸ21)/Δt
यदि कुंडली में तार के चक्करों की संख्या n हो तो e= _Kn (ɸ21)/Δt

e= _Kn Δɸ/Δt


MKS प्रणाली में K =1

अत: e= _n Δɸ/Δt


स्पष्ट है कि अधिक विद्युत वाहक बल e के लिए n अधिक औरΔt कम होना चाहिए अर्थात् कुंडली में चक्करों की संख्या अधिक और फ्लक्स परिवर्तन का समय कम से कम होना चाहिए।

प्रेरित धारा की दिशा- फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम के अनुसार प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात की जाती है। यदि दाएँ हाथ का अंगूठा और उसके पास वाली दोनों अंगुलियों को एक-दूसरे के लंबवत् फैलाएँ, तब यदि पहली अंगुली चुंबकीय क्षेत्र की दिशा तथा अँगूठा चालक के चलने की दिशा को प्रदर्शित करे, तो बीच वाली अंगुली चालक में प्रेरित धारा की दिशा बताएगी।

प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने का लेंज का नियम- “इस नियम के अनुसार, “किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है, जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है।”
उदाहरण- (i) प्रत्यावर्ती धारा डायनेमो, (ii) दिष्ट धारा जनित्र

प्रश्न 10. फ्लेमिंग का दाएँ हाथ का नियम लिखिए।
उत्तर- फ्लेमिंग के दाएँ हाथ का नियम- यदि हमारे दाएँ हाथ का अंगूठा तथा उसके पास वाली दोनों अंगुलियों को एक-दूसरे के लंबवत् फैलाएँ, तब यदि पहली अंगुली चुंबकीय क्षेत्र की दिशा तथा अंगूठा चालक के चलने की दिशा को प्रदर्शित करे, तो बीच वाली अंगुली चालक में प्रेरित धारा की दिशा बताएगी।

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