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UP BOARD CLASS 10 SOCIAL SCIENCE CHAPTER 5 FULL SOLUTION फ्रांसीसी क्रांति-कारण तथा परिणाम

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फ्रांसीसी क्रांति-कारण तथा परिणाम UP BOARD CLASS 10 SOCIAL SCIENCE CHAPTER 5 FULL SOLUTION

लघुउत्तरीय प्रश्न

1. फ्रांसीसी क्रांति का तत्कालीन कारण क्या था?

उ०- फ्रांसीसी क्रांति का तत्कालीन कारण वहाँ के तत्कालीन शासक लुई सोलहवाँ और उसकी महारानी की निरंकुशता, अन्याय, अयोग्यता और विलासिता थी।

2. “प्रत्येक क्रांति कुछ दार्शनिकों के विचारों से प्रभावित होती है।” इस कथन की पुष्टि में दो क्रांतियों और उनसे
संबंधित दार्शनिकों का उल्लेख कीजिए?

उ०- किसी भी क्रांति को जन्म देने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका दार्शनिक और साहित्यकारों की होती है। दार्शनिक अपने
विचारों से और साहित्यकार अपने साहित्य से क्रांति का आह्वान करते हैं और जनसमूह उनसे प्रभावित होकर क्रांति का शंखनाद कर देते हैं। अमेरिका की क्रांति को सफल बनाने में जैफरसन्, टॉमसपेन, जॉन मिल्टन आदि लेखकों और दार्शनिकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके विचारों से प्रेरित होकर उपनिवेशों के निवासी तन, मन और धन से क्रांति की गतिविधियों के साथ जुड़ गए। फ्रांसीसी क्रांति का अग्रदूत फ्रांस का महान दार्शनिक रूसो था। उसका मत था कि “मनुष्य स्वतंत्र रूप से जन्मा है, परंतु वर्तमान में उसे अनेक बेड़ियों में जकड़ रखा है।” रूसो ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘सोसल कॉन्ट्रेक्ट’ में क्रांतिकारी विचारों से जनमानस में प्रेरणा जगाकर उन्हें क्रांतिकारी गतिविधियों से जोड़ा। इस प्रकार फ्रांस की राजनीति में रूसों व अन्य दार्शनिकों
का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

3. फ्रांस की क्रांति में दार्शनिकों के योगदान का संक्षेप में वर्णन कीजिए। उ०- इंग्लैंड में क्रांति सन् 1688 ई० में हुई। इसके लिए उत्तरदायी दो कारण निम्नलिखित हैं
(i) फ्रांस की क्रांति में रूसो के योगदान- इसके लिए लघु उत्तरीय प्रश्न संख्या-2 के उत्तर का अवलोकन कीजिए। (ii) फ्रांस की क्रांति में मॉण्टेस्क्यू का योगदान- मॉण्टेस्क्यू एक प्रतिभाशाली विचारक और राजनीति का विश्लेषक था। UP BOARD CLASS 10 SOCIAL SCIENCE CHAPTER 5 FULL SOLUTION फ्रांसीसी क्रांति-कारण तथा परिणाम
उसने ‘दि स्पिरिट ऑफ लॉज’ नामक पुस्तक की रचना की। उसका मत था, “सामाजिक आवश्यकताओं का उपभोग करने का अधिकार सभी को है। इनके लिए संघर्ष करना चाहिए।” उसने लोकतंत्र की स्थापना पर बल देकर क्रांतिकारियों का मार्गदर्शन किया। वह अधिकार पाने का पक्षधर बनकर क्रांतिदूत बन गया। (iii) फ्रांस की क्रांति में वाल्टेयर का योगदान- वाल्टेयर फ्रांस का एक प्रसिद्ध दार्शनिक एवं ख्याति प्राप्त लेखक था।
उसने राजतंत्र और निरंकुश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए क्रांति करने को प्रेरित किया। उसके इन विचारों ने क्रांति को जन्म देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसने कलम की धार से क्रांति की अग्नि को प्रज्वलित किया।

4. फ्रांस की क्रांति के तीन महत्व बताइए?

उ०- फ्रांस की क्रांति विश्व इतिहास की एक महान घटना थी। इसके तीन महत्व निम्नलिखित हैं
(i) फ्रांस की क्रांति के फलस्वरूप यूरोप में निरंकुश शासन का लगभग अंत हो गया।

(ii) इस क्रांति की देखा-देख यूरोप के अन्य देशों में भी क्रांतियाँ हुई।

(iii) यूरोपीय देशों में लोकतांत्रिक सिद्धांतों का प्रसार हुआ।

5. फ्रांस में 14 जुलाई राष्ट्रीय पर्व के रूप में क्यों मनाई जाती है? उ०- फ्रांस में क्रांतिकारियों ने 14 जुलाई, 1789 ई० को बस्तील की जेल के फाटक तोड़कर सभी कैदियों को मुक्त कर दिया था जिससे क्रांति तेजी से शहरों, कस्बों और गाँवों में फैल गई। यह घटना फ्रांस में निरंकुश शासन के पतन की श्रृंखला की पहली कड़ी थी क्योंकि उन दिनों बस्तील की जेल राजा के अत्याचार और निरंकुशता की प्रतीक थी। इसीलिए 14 जुलाई को, बस्तील के दुर्ग के पतन के कारण, फ्रांस में प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है।

6. नेपोलियल बोनापार्ट कौन था? वह क्यों प्रसिद्ध हुआ? UP BOARD CLASS 10 SOCIAL SCIENCE CHAPTER 5 FULL SOLUTION फ्रांसीसी क्रांति-कारण तथा परिणाम

उ०- नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस की क्रांति की ही देन था। क्रांति की अवधि में ही उसने शक्ति, कौशल और अनुभव का संचय किया। वह फ्रांस की सेना का सेनापति बन गया। 1799 ई० में उसने सेना की डायरेक्टरी को भंग कर दिया और स्वयं फ्रांस का तानाशाह बन गया। नेपोलियन ने अपनी प्रतिभा के बल पर फ्रांस को यूरोप का समृद्ध और शक्तिसंपन्न राष्ट्र बना दिया। 1804 ई० में वह फ्रांस का सम्राट बना। उसने फ्रांस को सैन्यशक्ति की दृष्टि से शक्तिसंपन्न बना लिया था। यही कारण था कि उसकी सेनाओं ने 1805 ई० में आस्ट्रिया को, 1806 ई० में प्रशा को तथा 1807 ई० में रूस को धूल चटा दी। उसने व्यापार निषेध नियम लागू करके इंग्लैंड पर निशाना साधा। किन्तु मित्र राष्ट्रों की सेनाओं ने उसे 1813 ई० में लिपजिंग में तथा बाद में 1815 ई० में वाटर लू में अंतिम रूप से पराजित कर दिया। 5 मई, 1821 ई० में सेंट हेलना द्वीप पर उसका स्वर्गवास हो गया।

7. बास्तील दुर्ग का पतन कब हुआ? इसका क्या परिणाम निकला?

उ०- बास्तील के दुर्ग में फ्रांस के राजनीतिक बंदियों को रखा जाता था। यह दुर्ग राजा के अत्याचारों का केन्द्र बन गया था। पेरिस की क्रांतिकारी जनता ने एकत्रित होकर बास्तील के दुर्ग पर आक्रमण कर दिया और वहाँ के सभी हथियार लूटकर, कैदियों को मुक्त कराकर दुर्ग को तोड़ दिया। यह घटना 14 जुलाई, 1789 ई० में घटी। इस प्रकार फ्रांस में बास्तील के दुर्ग के पतन के साथ ही फ्रांस को स्वतन्त्रता मिली।

8. टेनिस कोर्ट की शपथ का संबंध किस क्रांति से था। इसका क्या परिणाम हुआ?

उ०- टेनिस कोर्ट की शपथ का संबंध फ्रांसीसी क्रांति से था। फ्रांस की संसद में तीन सदनों की व्यवस्थाएँ थीं। तीनों सदनों के सदस्य पृथक-पृथक भवनों में सभाएँ करते थे।

* विस्तृत उत्तरीय प्रश्न— UP BOARD CLASS 10 SOCIAL SCIENCE CHAPTER 5 FULL SOLUTION फ्रांसीसी क्रांति-कारण तथा परिणाम

1. फ्रांसीसी क्रांति के कारणों की विवेचना कीजिए।

उ०- फ्रांस की क्रांति के कारण- फ्रांस की क्रांति अचानक ही नहीं हो गई। फ्रांस की सड़ी-गली, पुरातन और दोषपूर्ण राजनीतिक व्यवस्था से त्रस्त जनता में जो जनाक्रोश धधक रहा था, वह निम्नलिखित कारणों से जनक्रांति बनकर भड़क उठा

(i) राजनीतिक कारण- फ्रांस की क्रांति निरंकुशता और राजतंत्र शासन-व्यवस्था के कारण उत्पन्न हुई। इसे जन्म देने में निम्नलिखित राजनीतिक कारण उत्तरदायी थे

(क) राजा की निरंकुशता और स्वेच्छाचारिता- फ्रांस का राजा निरंकुश और स्वेच्छाचारी था, अतः उसके

अन्याय और शोषण से मुक्ति पाने के लिए जनता ने क्रांति का सहारा ले लिया।

(ख) पादरी वर्ग एवं कुलीन वर्ग की विलासिता- फ्रांस की जनता करों के बोझ से दबकर रोटी पाने के लिए

बिलख रही थी; जबकि शासक वर्ग वैभवपूर्ण जीवन जी रहा था। फ्रांस की दु:खी जनता ने उनकी विलासिता से

बचने के लिए क्रांति का मार्ग चुन लिया।

(ग) शासन की पक्षपातपूर्ण नीति- फ्रांस के शासन की नींव पक्षपात पर टिकी थी। वहाँ समाज का उच्च वर्ग करों

से मुक्त था और आनंदपूर्वक जी रहा था; जबकि निम्नवर्ग करों के बोझ में सिर से पैर तक दबा हुआ दयनीय

जीवन जीने को विवश था। शासन का यही पक्षपातपूर्ण व्यवहार फ्रांस में जनक्रांति का कारण बना।

(घ) सैन्य अंसतोष- फ्रांस के शासकों को अनेक युद्ध लड़ने पड़े, जिससे सैनिकों में भारी असंतोष फैल गया था।

सैनिक शांति स्थापित करवाने के उद्देश्य से क्रांतिकारियों के सहयोगी बन गए।

(ii) सामाजिक कारण- फ्रांस का तत्कालीन समाज वर्ग-भेद के दोषों से ग्रसित था, अतः फ्रांस की क्रांति भड़काने में निम्नलिखित सामाजिक कारणों ने अपना योगदान दिया

(क) वर्ग-संघर्ष- फ्रांस का उच्चवर्ग सुखी और विलासी जीवन जी रहा था। पादरी वर्ग और कुलीन वर्ग विशेषाधिकारों से संपन्न था; जबकि जनसाधारण वर्ग कर, ऋण, शोषण तथा अभावों से ग्रसित था। जनसाधारण वर्ग ने इन सबसे मुक्ति पाने के लिए क्रांति का पथ चुन लिया।

(ख) बेरोजगारी- फ्रांस में सर्वत्र बेरोजगारी का साम्राज्य था। जनसाधारण बेरोजगारी और कृषि की हीन दशा से जूझ रहा था। उसने इन सबसे छुटकारा पाने के लिए क्रांति का बिगुल बजा दिया।

(ग) शोषण और अन्याय- फ्रांस का पादरी और कुलीन वर्ग अपने भोग-विलासों के लिए अधिक कर लगाकर

जनसाधारण वर्ग के साथ अन्याय और शोषण करने में जुटा था। अत: जनसामान्य ने शोषण और अन्याय से बचाव का एकमात्र मार्ग क्रांति को बना लिया।

(घ) पुरातन सामाजिक व्यवस्था- फ्रांस के समाज में प्राचीन सामांतवादी, पुरोहितवादी और कुलीनतंत्रवादीसड़ी-गली व्यवस्था चली आ रही थी, जिससे बचने के लिए जनसाधारण वर्ग क्रांति करने के लिए विवश हो गया।

(iii) आर्थिक कारण- कहावत है कि क्रांति के बीज देश की अर्थव्यवस्था में छुपे होते हैं। यह कहावत फ्रांस की क्रांति पर एकदम चरितार्थ होती है। फ्रांस की तत्कालीन डाँवाँडोल आर्थिक दशा ने निम्नलिखित कारणों से क्रांति का विस्फोट कराया

(क) धन का दुरुपयोग- फ्रांस के शासक, सामंत और पादरी जनता के गाढ़े पसीने की कमाई को विलासिता मेंउड़ा रहे थे, अत: जनता ने उस दुरुपयोग को रोकने के लिए क्रांति का मार्ग अपना लिया।

(ख) धन का असमान वितरण- फ्रांस में पादरी और कुलीन वर्ग समृद्ध था; जबकि जनसाधरण वर्ग एक-एक पैसे

के लिए तरस रहा था। समाज में धन के इस असमान वितरण ने क्रांति को और भी निकट ला दिया।

(ग) निर्धनता- फ्रांस में राजकोष रिक्त था, बेरोजगारी और कृषि की हीन दशा के कारण सर्वत्र निर्धनता व्याप्त थी, अतः फ्रांस की जनता ने दु:खी होकर क्रांति का मंत्र फूंक दिया।

(घ) कृषकों का अंसतोष- फ्रांस के सामंत कृषकों का शोषण करने में जुटे थे। वे उनसे उनकी उपज का 35%तक लगान बलपूर्वक वसूलते थे, जिससे उनकी निर्धनता ने उन्हें असंतोष के भावों से भर दिया। बस, भूखा
किसान क्रांति के हवन-कुंड में अपने सहयोग की आहुति देने में जुट गया।

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(iv) फ्रांस के दार्शनिकों की प्रेरणा- कहावत है कि प्रत्येक क्रांति में महान दार्शनिकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यह कहावत फ्रांस की क्रांति पर एकदम सटीक उतरती है। फ्रांस के निम्नलिखित दार्शनिकों ने क्रांतिकारियों को प्रेरित किया (क) रूसो- रूसो फ्रांस का महान दार्शनिक था। उसका मत था कि “मनुष्य स्वतंत्र रूप में जन्मा है; परंतु वर्तमान में उसे अनेक बेड़ियों में जकड़ रखा है।” रूसो ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘सोशल कॉन्ट्रेक्ट’ (सामाजिक समझौता) में क्रांतिकारी विचारों से क्रांतिकारियों में प्रेरणा जगाई, जिससे जनमानस स्वतंत्रता पाने के लिए क्रांति के साथ जुड़ गया। अतः फ्रांस की क्रांति में रूसो एवं अन्य दार्शनिकों ने अग्नि में घी का कार्य किया।

(ख) मॉण्टेस्क्यू- मॉण्टेस्क्यू एक प्रतिभाशाली विचारक और राजनीति का विश्लेषक था। उसने ‘दि स्पिरिट ऑफ
लॉज’ नामक पुस्तक की रचना की। उसका मत था, “सामाजिक आवश्यकताओं का उपभोग करने का अधिकार सभी को है। इनके लिए संघर्ष करना चाहिए।” उसने लोकतंत्र की स्थापना पर बल देकर क्रांतिकारियों
का मार्गदर्शन किया। वह अधिकार पाने का पक्षधर बनकर क्रांतिदूत बन गया।

(ग) वाल्टेयर- वाल्टेयर फ्रांस का एक प्रसिद्ध दार्शनिक एवं ख्याति प्राप्त लेखक था। उसने राजतंत्र और निरंकुश
शासन को उखाड़ फेंकने के लिए क्रांति करने को प्रेरित किया। उसके इन विचारों ने क्रांति को जन्म देने में एक
महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसने कलम की धार से क्रांति की अग्नि को प्रज्वलित किया।

(v) अन्य कारण- फ्रांस की क्रांति में कुछ घटनाओं का विशेष महत्व है। उनके बारे में जाने बिना फ्रांस की क्रांति की पृष्ठभूमि को समझना कठिन ही नहीं, असंभव भी है। फ्रांस की क्रांति के लिए निम्नलिखित तत्कालीन घटनाएँ भी उत्तरदायी थीं | UP BOARD CLASS 10 SOCIAL SCIENCE CHAPTER 5 FULL SOLUTION फ्रांसीसी क्रांति-कारण तथा परिणाम

(क) टेनिस कोर्ट की शपथ (ख) राष्ट्रीय महासभा का अधिवेशन (ग) बास्तील दुर्ग का पतन (क) टेनिस कोर्ट की शपथ- फ्रांस की संसद(स्टेटस जनरल) में तीन सदन थे। 6 मई, 1789 ई० को लुई
सोलहवें तथा उसके वित्तमंत्री नेकर ने तीनों सदनों के सदस्यों को पृथक-पृथक भवनों में सभाएँ करने की व्यवस्थाएँ दीं। तृतीय सदन का नेतृत्व मीराबों के हाथों में था, जहाँ उसने क्रांति करने की घोषणा कर दी। 20 जून, 1789 ई० को जब तृतीय सदन के सदस्य सभाभवन पहुंचे तो उसे बंद पाया। सम्राट और विशेष वर्ग के लोग सभा होने देना नहीं चाहते थे। इसलिए तृतीय सदन के सदस्य निकट ही स्थित ‘टेनिस कोर्ट’ के भवन में एकत्र हो गए। इस भवन में सभा करके इसे राष्ट्रीय अधिवेशन घोषित कर दिया गया तथा नया संविधान बनाने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई। इस सभाभवन में मीराबों की अध्यक्षता में यह शपथ ली गई, “हम यहाँ से उस समय तक नहीं हटेंगे, जब तक हम देश के लिए संविधान का निर्माण नहीं कर लेते, भले ही हमारे विरुद्ध संगीनों से ही क्यों न काम लिया जाए।” यह घटना फ्रांस के इतिहास में ‘टेनिस कोर्ट की शपथ’ के नाम से विख्यात है। टेनिस कोर्ट की शपथ की यह घटना फ्रांस के स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम चिंगारी थी, अतः सम्राट ने
विवश होकर एक सप्ताह बाद ही ‘राष्ट्रीय असेंबली’ को मान्यता दे दी।

(ख) राष्ट्रीय महासभा का अधिवेशन- 27 जून, 1789 ई० में राष्ट्रीय महासभा का अधिवेशन हुआ, जिसने
स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की स्थापना के लिए 20 सितंबर, 1791 ई० तक महान कार्य किए। उसी ने
क्रांति को सफल बनाया और फ्रांस को नया संविधान दिया। (ग) बास्तील दुर्ग का पतन- बास्तील की जेल में फ्रांस के राजनीतिक बंदियों को रखा जाता था। यह दुर्ग राजा के अत्याचारों का प्रतीक बन गया था। पेरिस की जनता क्रांतिकारियों के साथ जुलूस बनाकर जा रही थी। राजा ने वित्त मंत्री नेकर को जैसे ही बरखास्त किया- अफवाह फैल गई कि सम्राट बल प्रयोग कर जुलूस को रोकेगा। अतः जुलूस में एकत्र लोगों ने हथियार लेकर बास्तील की जेल को तोड़ दिया और सभी हथियार लूटकर, कैदियों को मुक्त कर दिया। 14 जुलाई, 1789 ई० में घटी यह घटना निरंकुश शासन पर पहला प्रहार था। इसीलिए प्रतिवर्ष 14 जुलाई को फ्रांस का स्वतंत्रता दिवस मनाया जाने लगा। UP BOARD CLASS 10 SOCIAL SCIENCE CHAPTER 5 FULL SOLUTION फ्रांसीसी क्रांति-कारण तथा परिणाम

2— फ्रांसीसी क्रांति के परिणामों को स्पष्ट कीजिए।

उ०- फ्रांस की क्रांति के परिणाम- फ्रांस की क्रांति को विश्व-इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में याद किया जाता है। इस क्रांति के निम्नलिखित परिणाम हुए

(i) फ्रांस की क्रांति ने फ्रांस और उसके समाज में चली आ रही विकृत पुरातन व्यवस्था को समाप्त कर दिया। (ii) फ्रांस की क्रांति ने वहाँ के जनसाधारण वर्ग को निरंकुशता और शोषण से मुक्ति दिला दी।

(iii) फ्रांस की क्रांति ने समूचे विश्व में स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के आदर्शों का जयघोष कर दिया।

(iv) फ्रांस की क्रांति ने मानव अधिकारों की घोषणा कर शोषित मानवता के घावों को भर दिया। (v) फ्रांस की क्रांति की सफलता रूस की क्रांति की प्रेरणा स्रोत बन गई। (vi) फ्रांस की क्रांति यूरोप में राष्ट्रीयता का विकास करने में बड़ी सहायक सिद्ध हुई।

(vii) फ्रांस की क्रांति ने राजतंत्र व्यवस्था को गहरी कब्र में दबाकर साम्यवाद को फूलने-फलने का अवसर दिया। (viii) फ्रांसीसी क्रांति कृषि विकास, औद्योगीकरण तथा व्यापार के विस्तार में मील का पत्थर सिद्ध हुई।

(ix) फ्रांस की क्रांति ने धर्मनिरपेक्षता के साथ-साथ संप्रभुता के सिद्धांत का भी पथ प्रशस्त किया।
(x) फ्रांसीसी-क्रांति ने फ्रांस में साहित्य, शिक्षा, विज्ञान और सैन्य-बल को गौरवपूर्ण बनाने में बड़ा योगदान दिया।

3. बास्तील दुर्ग के क्या कारण थे? इसके क्या परिणाम हुए?

उ०- उत्तर के लिए लघु उत्तरीय प्रश्न संख्या-7 के उत्तर का अवलोकन कीजिए।

4– टेनिस कोर्ट की शपथ तथा बास्तील के दुर्ग के पतन की घटनाओं के सन्दर्भ में फ्रांस की क्रांति का विवरण दीजिए।

उ०- उत्तर के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या-1 के उत्तर का अवलोकन कीजिए।

5– फ्रांस की क्रांति के प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।

उ०- उत्तर के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या-2 के उत्तर का अवलोकन कीजिए।

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