Up board social science class 10 chapter 24 उच्च न्यायालय- संगठन तथा शक्तियाँ

Up board social science class 10 chapter 24 उच्च न्यायालय- संगठन तथा शक्तियाँ

Up board social science class 10 chapter 24 उच्च न्यायालय- संगठन तथा शक्तियाँ
Up board social science class 10 chapter 24 उच्च न्यायालय- संगठन तथा शक्तियाँ

उच्च न्यायालय- संगठन तथा शक्तियाँ


लघुउत्तरीय प्रश्न
प्रश्न—-1. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति किस प्रकार होती है?

उ०- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश तथा राज्य के राज्यपाल से परामर्श कर की जाती है। उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति मुख्य न्यायाधीश से परामर्श पर करता है।
प्रश्न—-2. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की योग्यताओं तथा कार्यकाल पर प्रकाश डालिए।
उ०- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के पद के लिए योग्यताएँ- उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए व्यक्ति में निम्नलिखित योग्यताएँ होनी चाहिए
(i) वह भारत का नागरिक हो।
(ii) उसकी आयु 62 वर्ष से अधिक न हो।
(iii) वह 10 वर्ष से अधिक किसी न्यायिक पद पर कार्य कर चुका हो।
(iv) वह एक से अधिक उच्च न्यायालयों में 10 वर्ष तक अधिवक्ता रह चुका हो।
(v) राष्ट्रपति की दृष्टि में विख्यात न्यायविद् होते हुए संसद द्वारा निर्धारित योग्यताएँ रखता हो।
कार्यकाल- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक अपने पद पर कार्य करते हैं। इससे पूर्व स्वयं अपने पद से त्यागपत्र दे सकते हैं अथवा दुराचार या अयोग्यता के आधार पर उन्हें भी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की
भाँति पद से हटाया जा सकता है। 3. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को उनके पद से हटाने की क्या प्रक्रिया है? उ०- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को उनके पद से अयोग्यता या दुराचार के आधार पर संसद के दो-तिहाई बहुमत से
महाभियोग पारित करके हटाया जा सकता है। 4. उच्च न्यायालय अपने अपीलीय क्षेत्राधिकार में कौन-से तीन प्रकार के मुकदमे सुन सकता है? उ०- उच्च न्यायालय अपने अपीलीय क्षेत्राधिकार में निम्न तीन प्रकार के मुकदमे सुन सकता है
(i) वह उन विवादों की अपील सुन सकता है, जिसमें ₹10,000 की धनराशि या उसी मूल्य की संपत्ति का प्रश्न जुड़ा है।
(ii) वे फौजदारी के मुकदमे जिनमें सत्र न्यायालय ने अपराधी को चार वर्ष की सजा दी हो।
(iii) सत्र न्यायालय को अपराधी को मृत्यु दंड देने से पूर्व उच्च न्यायालय की अनुमति अवश्य लेनी पड़ती है।
प्रश्न—- 5. उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आने वाले किन्हीं दो विषयों पर प्रकाश डालिए।
उ०- उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आने वाले दो विषय निम्नलिखित हैं
(i) न्यायिक पुनर्निरीक्षण- उच्च न्यायालय को न्यायिक पुनर्निरीक्षण का भी अधिकार प्राप्त है। वह केंद्र या राज्य सरकार द्वारा बनाए गए किन्हीं भी ऐसे कानूनों को, जो संविधान तथा मौलिक अधिकारों के विरुद्ध हो, अवैध घोषित कर सकता है।
(ii) अभिलेख न्यायालय- उच्च न्यायालय अपनी समस्त कार्यवाहियों और निर्णयों को प्रकाशित करवाकर अभिलेख के रूप में सुरक्षित रखता है। ये निर्णय राज्य के सभी न्यायालयों द्वारा मान्य होते हैं। इन्हें ‘मिसाल’ के रूप में जनपदीय
न्यायालयों में प्रस्तुत किया जा सकता है।
प्रश्न—- 6. उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए कौन-कौन से लेख जारी करता है?
उ०- उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए निम्नलिखित लेख जारी करता है
(i) बंदी प्रत्यक्षीकरण (ii) परमादेश (iii) प्रतिषेध (iv) अधिकार पृच्छा (v) उत्प्रेषण
प्रश्न—- 7. उच्च न्यायालय के तीन प्रमुख महत्व बताइए।
उ०- उच्च न्यायालय के तीन महत्व निम्नलिखित हैं
(i) उच्च न्यायालय की स्थिति राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ी महत्वपूर्ण है। (ii) उच्च न्यायालय राज्य विधानमंडल पर अंकुश लगाकर उसे अपनी सीमाओं का ध्यान दिलाता रहता है।
(iii) उच्च न्यायालय न्यायिक पुनर्निरीक्षण द्वारा संविधान के विरुद्ध बने नियमों को अवैध घोषित कर विधानमंडल की
निरंकुशता पर अंकुश लगाता है।

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न—-1. उच्च न्यायालय के संगठन तथा उसके न्यायाधीशों के कार्यकाल का वर्णन कीजिए।
उच्च न्यायालय का संगठन- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से वह अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करके उच्च न्यायालय का संगठन करता है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा राज्य के राज्यपाल से भी परामर्श करता है। मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में वरिष्ठता का ध्यान रखा जाता है। संविधान के अनुच्छेद 216 में उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या नियत करने का अधिकार राष्ट्रपति को है। वह राज्य की जनसंख्या तथा कार्यभार देखते हुए न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है। कार्य की अधिकता के कारण वह अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियक्ति भी कर सकता है, जिनका कार्यकाल 2 वर्ष का होता है। उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालय में इस समय एक मुख्य न्यायाधीश तथा 160 न्यायाधीशों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 81 न्यायाधीश कार्यरत है। उत्तर प्रदेश का उच्च न्यायालय इलाहाबाद में है, जिसकी खंडपीठ लखनऊ नगर में स्थापित की गई है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद के लिए योग्यताएँ- उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए व्यक्ति में निम्नलिखित योग्यताएँ होनी चाहिए
(i) वह भारत का नागरिक हो।
(ii) उसकी आयु 62 वर्ष से अधिक न हो।
(iii) वह 10 वर्ष से अधिक किसी न्यायिक पद पर कार्य कर चुका हो। (iv) वह एक से अधिक उच्च न्यायालयों में 10 वर्ष तक अधिवक्ता रह चुका हो।
(v) राष्ट्रपति की दृष्टि में विख्यात न्यायविद् होते हुए संसद द्वारा निर्धारित योग्यताएँ रखता हो।
कार्यकाल तथा वेतन-भत्ते- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक अपने पद पर कार्य करते हैं। इससे पूर्व वे स्वयं अपने पद से त्यागपत्र दे सकते हैं अथवा दुराचार या अयोग्यता के आधार पर उन्हें भी सर्वोच्च
न्यायालय के न्यायाधीशों की भाँति पद से हटाया जा सकता है।
प्रश्न—-2. उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उ०- उच्च न्यायालय की शक्तियाँ ( अधिकार और कार्य)- संपूर्ण राज्य उच्च न्यायालय का कार्यक्षेत्र होता है। संसद चाहे तो
अन्य पड़ोसी राज्य को भी उसी उच्च न्यायालय से संबद्ध कर सकती है। (देखें उच्च न्यायालय और उनके अधिकार क्षेत्र की ऊपर दी गई तालिका)। उच्च न्यायालय को अग्रलिखित शक्तियाँ तथा अधिकार प्राप्त हैं, उन्हीं के अनुरूप वह अपने कार्यों का संपादन करता है(i) प्रारंभिक क्षेत्राधिकार- उच्च न्यायालय के प्रारंभिक क्षेत्राधिकार के अंतर्गत वे विवाद आते हैं, जो प्रारंभिक स्तर पर सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। उच्च न्यायालय के प्रारंभिक क्षेत्राधिकार निम्नवत् हैं
(क) वह विवाद, जो मौलिक अधिकारों से संबंधित है, सीधा उच्च न्यायालय में दायर किया जा सकता है। न्यायालय मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए निम्न लेख जारी करता है- बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध,
अधिकार पृच्छा तथा उत्प्रेषण।
(ख) विवाह विच्छेद, (तलाक) वसीयत, न्यायालय की मान-हानि, नव वैधिक विवाद एवं सम प्रमाण विवाद आदि उच्च न्यायालय के प्रारंभिक क्षेत्र से जुड़े हैं।
(ग) उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के अतिरिक्त अन्य विवादों में भी लेख जारी करने का अधिकार रखता है।
(घ) चुनाव याचिकाएँ भी उच्च न्यायालय के प्रारंभिक अधिकार के अंतर्गत आती हैं, वही इन पर निर्णय देता है।
(ii) अपीलीय क्षेत्राधिकार- उच्च न्यायालय अधीनस्थ न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपीलें सुनता है। उसे दीवानी,
फौजदारी तथा राजस्व संबंधी मुकदमों की अपीलें सुनने का अधिकार है। उसके अपीलीय क्षेत्राधिकार में निम्नलिखित विवाद आते हैं
(क) वह उन विवादों की अपील सुन सकता है, जिसमें ₹10,000 की धनराशि या उसी मूल्य की संपत्ति का प्रश्न
जुड़ा है।
(ख) वे फौजदारी के मुकदमे जिनमें सत्र न्यायालय ने अपराधी को चार वर्ष की सजा दी हो। (ग) सत्र न्यायालय को अपराधी को मृत्यु दंड देने से पूर्व उच्च न्यायालय की अनुमति अवश्य लेनी पड़ती है।
(घ) राजस्व के मुकदमों की अपीलें भी उच्च न्यायालय में की जा सकती हैं।
(ङ) आयकर, बिक्रीकर तथा अन्य करों से संबंधित विवादों की अपीलें भी उच्च न्यायालय में की जाती हैं। (च) उच्च न्यायालय अपने ही निर्णय के विरुद्ध अपील सुनने का अधिकार रखता है।
(छ) कोई भी ऐसा विवाद जिसमें संविधान की धारा या कानून की व्यवस्था का प्रश्न निहित हो, अपील के रूप में
उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है।
(iii) न्यायिक पुनर्निरीक्षण- उच्च न्यायालय को न्यायिक पुनर्निरीक्षण का भी अधिकार प्राप्त है। वह केंद्र या राज्य सरकार
द्वारा बनाए गए किन्हीं भी ऐसे कानूनों को, जो संविधान तथा मौलिक अधिकारों के विरुद्ध हो, अवैध घोषित कर सकता है।
(iv) अभिलेख न्यायालय- उच्च न्यायालय अपनी समस्त कार्यवाहियों और निर्णयों को प्रकाशित करवाकर अभिलेख के रूप में सुरक्षित रखता है। ये निर्णय राज्य के सभी न्यायालयों द्वारा मान्य होते हैं। इन्हें ‘मिसाल’ के रूप में जनपदीय
न्यायालयों में प्रस्तुत किया जा सकता है।
(v) प्रशासनिक शक्तियाँ ( अधिकार)- उच्च न्यायालय अपनी प्रशासनिक शक्तियों के आधार पर निम्नलिखित कार्यों
का संपादन करता है(क) उच्च न्यायालय को राज्य के समस्त न्यायालयों तथा न्यायाधिकरणों के निरीक्षण करने का अधिकार है।
(ख) उच्च न्यायालय अधीनस्थ न्यायालयों के लिए नियमावली बनाने तथा उसमें परिवर्तन करने का अधिकार रखता
(ग) वह अपने अधीनस्थ न्यायालयों को रिकॉर्ड रखने की विधि के बारे में आदेश दे सकता है।
(घ) वह किसी भी अधीनस्थ न्यायालय से कोई रिकॉर्ड, कागज-पत्र अपने निरीक्षण हेतु मँगवा सकता है।
(ङ) उच्च न्यायालय अपने अधीनस्थ न्यायालयों की शक्ति सीमा के अंतर्गत, उनके कर्तव्यों के अनुपालन कराने पर दृष्टि रखता है।
(च) वह अधीनस्थ न्यायालय से किसी भी मुकदमे को सुनवाई के लिए मँगवाकर निर्णय दे सकता है।
छ) वह मुकदमे को एक अधीनस्थ न्यायालय से दूसरे अधीनस्थ न्यायालय में स्थानांतरित कर सकता है।
(ज) उच्च न्यायालय को अन्य न्यायालयों के न्यायाधीशों की पदोन्नति, अवनति करने और अवकाश, वेतन तथा भत्ते
आदि के विषयों में नियम बनाने का अधिकार है।
(झ) उच्च न्यायालय अपने अधीन काम करने वाले अधिकारियों तथा कर्मचारियों की नियुक्ति करता है और उनके लिए सेवा-शर्ते बनाता है।
प्रश्न—-3. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति की योग्यताएँ क्या हैं? उसके अधिकार-क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उ०- उत्तर के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या- 1 व 2 का अवलोकन कीजिए।
__4. उच्च न्यायालय की स्वतंत्रता हेतु क्या उपाय किए गए हैं? उच्च न्यायालय का महत्व स्पष्ट कीजिए।
उ०- उच्च न्यायालय की स्वतंत्रता- उच्च न्यायालय स्वतंत्र रहकर ही निष्पक्ष न्याय प्रदान कर सकता है। अतः संविधान ने
इसकी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए निम्नलिखित प्रावधान किए हैं
(i) उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को राजनीतिक तथा प्रशासनिक दबाव से मुक्त रखने के लिए इनकी नियुक्ति करने का
अधिकार राष्ट्रपति को दिया गया है।
(ii) उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को वेतन तथा भत्ते राज्य की संचित निधि से दिए जाते है; जिनमें कोई कटौती नहीं की जा सकती।
(iii) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक निर्बाध रूप से कार्य करते हैं, उन्हें अपदस्थ करने का अधिकार संसद को दिया गया है।
(iv) उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों पर न्यायालय में वकालत करने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
(v) राज्य विधानमंडल उच्च न्यायालय के कार्यकलापों तथा निर्णयों पर कोई वाद-विवाद नहीं कर सकता है।
उपर्युक्त व्यवस्थाओं के अनुसार उच्च न्यायालय से यह आशा की जाती है, कि वह स्वतंत्रता, निष्पक्षता तथा निडरता से
अपने कार्यों का संपादन कर न्याय प्रदान करें। उच्च न्यायालय का महत्व- उच्च न्यायालय न्याय का वह विशाल दीपक है, जो राज्यभर में अपने न्याय का प्रकाश बिखेरता है। उच्च न्यायालय के महत्व को निम्नवत् स्पष्ट किया जा सकता है(i) उच्च न्यायालय की स्थिति राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ी महत्वपूर्ण है।
(ii) उच्च न्यायालय राज्य विधानमंडल पर अंकुश लगाकर उसे अपनी सीमाओं का ध्यान दिलाता रहता है।
(iii) उच्च न्यायालय न्यायिक पुनर्निरीक्षण द्वारा संविधान के विरुद्ध बने नियमों को अवैध घोषित कर विधानमंडल की
निरंकुशता पर अंकुश लगाता है।
(iv) उच्च न्यायालय संविधान की व्याख्या तथा सुरक्षा करता है। (v) उच्च न्यायालय विविध लेख जारी करके नागरिकों के मौलिक अधिकारों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करता है।
(vi) उच्च न्यायालय सरकार और जनता के विवादों का निष्पक्ष निपटारा करके जन कल्याण की धारा प्रवाहित करता है।
उच्च न्यायालय अपने स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्णयों द्वारा राज्य के सर्वागीण विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान करता है।
राज्यों में उच्च न्यायालय के न्याय का दीपक जब तक जलता रहेगा, तब तक अपराध का अंधकार छिपा रहेगा।

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