विद्या पर संस्कृत निबंध || essay on Vidya in Sanskrit language

essay on Vidya in Sanskrit language
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विद्या पर संस्कृत निबंध || essay on Vidya in Sanskrit language

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विद्या पर निबंध [2010, 12, 13]

विद्या पर निबंध से संबंधित अन्य शीर्षक जिन पर कई बार बोर्ड परीक्षा में पूछा गया है ।

[विद्वान् सर्वत्र पूज्यते, विद्या विहीनः पशुः (2007), विद्यायाः महत्त्वम् (2009, 11), विद्याधनं सर्वधनं प्रधानम् (2010,12,13 ), विद्या ददाति विनयम् (2010,14), विद्या महिमा (2011,15)]


1 – अस्मिन् संसारे विद्या एव सर्वप्रधानं धनमस्ति ।

2 – विद्याधनं चौरोऽपि चोरयितुं न शक्नोति, नृपः अपहर्तुं न शक्नोति।

3 – विद्यावन्तः जनाः विद्वांसः कथ्यन्ते । विद्या मानवं हिताय योजयति।

4- सुभाषितेषु एतद् पद्यम् अति प्रसिद्धाः –
‘’विद्या ददाति विनयं, विनयात् याति पात्रताम् ।
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति, धनाद् धर्मः ततः सुखम् ।

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5 – विद्या माता इव रक्षति, पिता इव हिते मियुङ्क्ते, कीन्ती इवै खेदम् अपमयति ।

6 – विद्या सर्बसुखानां परमं कारणम् अस्ति।

7 – विद्येयी यावज्जीवं तृप्तिर्भवति ।

8 – विद्ययाऽमृतम् अश्नुते ।

9 – विद्या विनयं ददाति विनयात् पात्रताम्, पात्रतायाः धनम्, धनाद् धर्म, ततः सुखं प्राप्नोति मनुष्यः

10 – विदुषः पुरुषस्य सर्वत्र सम्मानः भवति।

11 – राजा तु स्वदेशे पूज्यते, परन्तु विद्वान् सर्वत्र पूज्यते ।

12 – रूपयौवनसम्पन्नोऽपि विद्याहीनः जनः न शोभते ।

13 – राजसु विद्यैव पूज्यते, धनं न पूज्यते ।

14 – विद्याविहीनः नरः पशुतुल्यः भवति

15 – अत: सर्वे नराः स्वपुत्रान् पुत्रींश्च पाठयेयुः ।

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