Sanskrit Vyakaran class 10th प्रयत्न कितने प्रकार का होता है

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प्रयत्न दो प्रकार का होता है

१. आभ्यन्तर प्रयत्न। २. बाह्य प्रयत्न।

१. आभ्यन्तर प्रयत्न –

१. इनमें से आभ्यन्तर प्रयत्न के पाँच भेद होते हैं

क. स्पृष्ट- (कादयोमावसाना स्पर्शाः) क से लेकर म तक सभी वर्गों का स्पृष्ट आभ्यन्तर प्रयत्न है।

ख. ईषद् स्पृष्ट- य्. व्. र्, ल्, अन्तस्थों का ईषद्स्पृष्ट आभ्यन्तर प्रयत्न है।

ग. विवृत – अ से लेकर औ तक के सभी स्वरों का विवृत आभ्यन्तर प्रयत्न है।

घ. ईषद् विवृत – श्, ष, स् और ह् वर्णों का ईषद् विवृत आभ्यन्तर प्रयत्न है।

ङ. संवृत – ह्रस्व अ का उच्चारण संवृत आभ्यन्तर प्रयत्न के अन्तर्गत आता है।

२. बाह्यप्रयत्न –

बाह्य प्रयत्न ११ प्रकार का होता है विवार, संवार, श्वास, – नाद, घोष, अघोष, अल्पप्राण, महाप्राण, उदात्त, अनुदात्त, स्वरित ।

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