Sanskrit vyakaran class 10th उच्चारणस्थान

Sanskrit vyakaran class 10th उच्चारणस्थान कौन सा अक्षर कहाँ से बोला जाता है

उच्चारणस्थान — वर्णों के उच्चारण स्थान में मुख के आन्तरिक अवयवों की – सहायता ली जाती है। मुख के जिस अवयव से जिस वर्ण का उच्चारण किया जाता है, वही उसका उच्चारण स्थान कहलाता है –

अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः

(क) अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः – अ, आ, कवर्ग (क्, ख्, ग् घ् ङ) ह – और विसर्ग (:) का मुख में उच्चारण स्थान कण्ठ है।

इचुयशानां तालुः

(ख) इचुयशानां तालुः – इ, ई, चवर्ग (च्, छ् ज् झ् ञ्) य्, और श् का मुख में उच्चारण स्थान तालु है।

ऋटुरषाणां मूर्धा

(ग) ऋटुरषाणां मूर्धा – ॠ, ॠ, टवर्ग (ट्, ट्, ड्, ढ्, ण) र् और ष् का उच्चारण स्थान मुख में मूर्धा है।

लृतुलसानां दन्ताः

(घ) लृतुलसानां दन्ताः – लृ लृ, तवर्ग (त्, थ्, द्, ध्, न्) ल् और स् का मुख में उच्चारण स्थान दन्त है।

उपूपध्मानीयानामोष्ठौ

(ङ) उपूपध्मानीयानामोष्ठौ — उ, ऊ, पवर्ग (प्, फ्, ब्, भ्, म्) और (उपधमानीय पफ) का उच्चारण स्थान मुख में ओष्ठ है।

ञमङणनानां नासिका च

(च) ञमङणनानां नासिका च– ञ्, म्, ङ् ण्, न् का उच्चारण स्थान पूर्व कथित स्थान के साथ-साथ नासिका भी होता है। जैसे

ङ् = कंठ + नासिका, ञ् = तालु + नासिका, ण् = मूर्धा + नासिका

न्= दन्त + नासिका, म्= ओष्ठ + नासिका।

एदैतोः कण्ठतालुः

(छ) एदैतोः कण्ठतालुः– ए, ऐ का उच्चारण स्थान कण्ठ और तालु है।

ओदौतोः कण्ठोष्ठम्

(ज) ओदौतोः कण्ठोष्ठम् – ओ औ का उच्चारण स्थान कण्ठ और ओष्ठ है।

वकारस्य दन्तोष्ठम्

(झ) वकारस्य दन्तोष्ठम् – व् का उच्चारण स्थान दन्त और ओष्ठ है।

जिह्वामूलीयस्य जिह्वामूलम्

(ञ) जिह्वामूलीयस्य जिह्वामूलम् – जिह्वामूलीय ( क ख ) का उच्चारण स्थान मुख में जिह्वा का मूल है।

नासिकानुस्वारस्य

(ठ) नासिकानुस्वारस्य – अनुस्वार का उच्चारण स्थान केवल नासिका है।

उच्चारण के आधार पर इनको इस प्रकार भी लिखा जा सकता है |

कण्ठ

अ, आ, क् ख् ग् घ् ङ् ह, विसर्ग (:)

तालु

इ, ई, च्, छ् य्. ज्, झ, ञ् श्

दन्त
लृ. लृ. त्, थ्, द, ध, न, ल्. स्

ओष्ठ
उपध्मानीय प फ, उ, ऊ, प्. फ्. ब् भ् म्

नासिका
अनुस्वार ()

कण्ठतालु
ए, ऐ,

कण्ठ + नासिका
ङ्

दन्त + नासिका
न्

कण्ठोष्ठ
ओ, औ,

तालु + नासिका
ञ्

दन्तओष्ठ
ब्

जिह्वामूलीय
कॅ, खँ

ओष्ठ + नासिका
म्

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