Up board solution for class 9 hindi chapter 4 गिल्लू महादेवी वर्मा गद्य खण्ड

Up board solution for class 9 hindi chapter 4 गिल्लू महादेवी वर्मा गद्य खण्ड

Up board solution for class 9 hindi chapter 4 गिल्लू महादेवी वर्मा गद्य खण्ड

4– गिल्लू (महादेवी वर्मा) (क) लघु उत्तरीय प्रश्न


1– महादेवी जी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?
उतर– – महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च, 1907 को फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था ।
2– महादेवी वर्मा को और किस नाम से जाना जाता है ?
उतर– – महादेवी वर्मा को आधुनिक मीरा’ के नाम से जाना जाता है ।
3– महादेवी जी के जीवन परिचय और शिक्षा पर प्रकाश डालिए ।
उतर– – जीवन परिचय- महादेवी जी का जन्म 26 मार्च, 1907 को प्रातः 8 बजे फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था । उनके पिता श्री गोविंद प्रसाद वर्मा भागलपुर के एक कालेज में प्राध्यापक थे । उनकी माता का नाम हेमरानी देवी था । जिनका महादेवी जी पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा । महादेवी वर्मा के मानस बंधुओं में सुमित्रानंदन पंत एवं निराला का नाम लिया जा सकता है । इनका विवाह 1916 में बरेली के पास नवाबगंज कस्बे के निवासी श्री स्वरूप नारायण वर्मा से हुआ । 11 सितंबर 1987 को इलाहाबाद में इनका देहांत हो गया । शिक्षा- महादेवी जी की शिक्षा इंदौर में मिशन स्कूल से प्रारंभ हुई, साथ ही संस्कृत, संगीत तथा चित्रकला की शिक्षा अध्यापकों द्वारा घर पर ही दी जाती थी । 1919 में इन्होंने क्रॉस्थवेट कॉलेज इलाहाबाद में प्रवेश लिया । 1921 में इन्होंने आठवीं कक्षा में प्रांत भर में प्रथम स्थान प्राप्त किया और 1925 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की । सन 1932 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इन्होंने संस्कृत में एम–ए– की परीक्षा उत्तीर्ण की ।


4– ‘दीपशिखा’ काव्य में इन्होंने ( महादेवी )अपनी पीड़ा को कैसे व्यक्त किया है ?
उतर– – ‘दीपशिखा’ काव्य में महादेवी जी ने अपने मन की पीड़ा को इतने स्नेह और श्रृंगार से सजाकर व्यक्त किया कि वह जन
जन की पीड़ा के रूप में स्थापित हुई ।
5– महादेवी जी को कौन-कौन से सम्मान से अलंकृत किया गया ?
उतर– – महादेवी जी को ज्ञानपीठ पुरस्कार, सेकसरिया एवं मंगलाप्रसाद पुरस्कार, डि० लिट की उपाधि और पद्मभूषण की उपाधि से अलंकृत किया गया ।


6– महादेवी जी ने कब अपने काव्य की शुरूआत की ?
उतर– – महादेवी जी ने 1921 से अपने काव्य जीवन की शुरूआत की ।
7– छायावादी युग की सुप्रसिद्ध लेखिका कौन हैं ?
उतर– – छायावादी युग की सुप्रसिद्ध लेखिका महादेवी वर्मा जी हैं ।
8– भारत सरकार द्वारा महादेवी जी को कौन-से सम्मान से नवाजा गया ?
उतर– – भारत सरकार द्वारा महादेवी जी को ‘पद्मभूषण’ की उपाधि से नवाजा गया ।
9– व्यंग्यात्मक शैली के दर्शन महादेवी जी के किस निबंध में होते हैं ?
उतर– – ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ निबंध में महादेवी जी की व्यंग्यात्मक शैली के दर्शन होते हैं ।

(ख) विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
1– महादेवी जी के जीवन परिचय एवं कृतित्व पर प्रकाश डालिए ।
उतर– – महादेवी वर्मा हिंदी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से हैं । वे हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं । आधुनिक हिंदी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें ‘आधुनिक मीरा’ के नाम से भी जाना जाता है । कवि निराला ने उन्हें ‘हिंदी के विशाल मंदिर की सरस्वती’ भी कहा है । महादेवी जी ने स्वतंत्रता के पहले का भारत भी देखा और उसके बाद का भी । वे उन कवियों में से एक हैं, जिन्होंने व्यापक समाज में काम करते हुए भारत के भीतर विद्यमान हाहाकार रुदन को देखा, परखा और करुण होकर अंधकार को दूर करने वाली दृष्टि देने की कोशिश की । न केवल उनका काव्य बल्कि उनके समाज-सुधार के कार्य और महिलाओं के प्रति चेतना भावना भी इस दृष्टि से प्रभावित रहे । उन्होंने मन की पीड़ा को इतने स्नेह और शृंगार से सजाया कि दीपशिखा में वह जन-जन की पीड़ा के रूप में स्थापित हुई और उसने केवल पाठकों को ही नहीं अपितु समीक्षकों को भी गहराई तक प्रभावित किया । जन्म और परिवार- महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च, 1907 को प्रात: 8 बजे फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ । उनके परिवार में लगभग 200 वर्षों या सात पीढियों के बाद पहली बार पुत्री का जन्म हुआ था ।

अत: बाबा बाबू बाँके बिहारी जी हर्ष से झूम उठे और इन्हें घर की देवी – महादेवी मानते हुए पुत्री का नाम महादेवी रखा । उनके पिता श्री गोविंद प्रसाद वर्मा भागलपुर के एक कॉलेज में प्राध्यापक थे । उनकी माता का नाम हेमरानी देवी था । हेमरानी देवी बड़ी धर्म परायण, कर्मनिष्ठ, भावुक एवं शाकाहारी महिला थीं । विवाह के समय अपने साथ सिंहासनासीन भगवान की मूर्ति भी लाई थीं । वे प्रतिदिन कई घंटे पूजा-पाठ तथा रामायण, गीता एवं विनय पत्रिका का पारायण करती थीं और संगीत में भी उनकी अत्यधिक रुचि थी । परंतु उनके पिता गोविंद प्रसाद वर्मा सुंदर, विद्वान, संगीत प्रेमी, नास्तिक, शिकार करने एवं घूमने के शौकीन, मांसाहारी तथा हँसमुख व्यक्ति थे । महादेवी वर्मा के मानस बंधुओ में सुमित्रानंदन पंत एवं निराला का नाम लिया जा सकता है, जो उनसे जीवन-पर्यंत राखी बंधवाते रहे । निराला जी से उनकी अत्यधिक निकटता थी, उनकी पुष्ट कलाइयों में महादेवी जी लगभग चालीस वर्षों तक राखी बाँधती रहीं । शिक्षा- महादेवी जी की शिक्षा इंदौर में मिशन स्कूल से प्रारंभ हुई; साथ ही संस्कृत, संगीत तथा चित्रकला की शिक्षा अध्यापकों द्वारा घर पर ही दी जाती रही । बीच में विवाह आने पर शिक्षा स्थगित कर दी गई । विवाहोपरांत महादेवी जी ने 1919 में क्रॉस्थवेट कॉलेज इलाहाबाद में प्रवेश लिया और कॉलेज के छात्रावास में रहने लगीं ।


1921 में महादेवी जी ने आठवीं कक्षा में प्रांत भर में प्रथम स्थान प्राप्त किया । यहीं पर उन्होंने अपने काव्य जीवन की शुरूआत की । वे सात वर्ष की अवस्था से ही कविता लिखने लगी थीं और 1925 तक जब उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की, वे एक सफल कवयित्री के रूप में प्रसिद्ध हो चुकी थीं । विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी कविताओं का प्रकाशन होने लगा था । कॉलेज में सुभद्रा कुमारी चौहान के साथ उनकी घनिष्ठ मित्रता हो गई । सुभद्रा कुमारी चौहान महादेवी जी का हाथ पकड़ कर सखियों के बीच में ले जाती और कहतीं- “सुनो, ये कविता भी लिखती हैं ।” 1932 में जब उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम०ए० पास किया तब तक उनके दो कविता संग्रह ‘नीहार’ तथा ‘रश्मि’ प्रकाशित हो चुके थे ।
वैवाहिक जीवन- सन् 1916 में उनके बाबा श्री बाँके बिहारी ने इनका विवाह बरेली के पास नवाब गंज कस्बे के निवासी श्री स्वरूप नारायण वर्मा से कर दिया, जो उस समय दसवीं कक्षा के विद्यार्थी थे । श्री वर्मा इंटर करके लखनऊ मेडिकल कॉलेज में बोर्डिंग हाउस में रहने लगे । महादेवी जी उस समय क्रॉस्थवेट कॉलेज इलाहाबाद के छात्रावास में थीं । श्रीमती महादेवी वर्मा को विवाहित जीवन से विरक्ति थी । महादेवी जी का जीवन एक संन्यासिनी का जीवन था । 1966 में पति की मृत्यु के बाद वह स्थायी रूप से इलाहाबाद में रहने लगीं । 11 सितंबर 1987 को इलाहाबाद में इनका देहांत हो गया ।
कृतित्व- महादेवी वर्मा की गणना हिंदी के सर्वश्रेष्ठ कवियों एवं गद्य-लेखकों में की जाती है । महादेवी जी की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं
(अ) निबंध संग्रह- श्रृंखला की कड़ियाँ, साहित्यकार की आस्था, क्षणदा, अबला और सबला । इन रचनाओं में इनके विचारात्मक और साहित्यिक निबंध संगृहीत हैं ।
(ब) संस्मरण और रेखाचित्र- स्मृति की रेखाएँ, अतीत के चलचित्र, पथ के साथी, मेरा परिवार । इन संस्मरणों में इनके ममतामय हृदय के दर्शन होते हैं ।


(स) आलोचना- हिंदी का विवेचनात्मक गद्य
(द) काव्य रचनाएँ- सांध्यगीत, नीहार, रश्मि, नीरजा, यामा, दीपशिखा । इन काव्यों में पीड़ा एवं रहस्यवादी भावनाएँ
व्यक्त हुई हैं ।

2– महादेवी वर्मा की भाषा-शैली की विशेषताएँ लिखिए ।
उतर– – भाषा-शैली- महादेवी वर्मा की कविताओं में कल्पना की प्रधानता है परंतु गद्य में इन्होंने यथार्थ के धरातल पर स्थित रहकर ही अपनी रचनाओं का सृजन किया है । महादेवी जी की भाषा अत्यंत उत्कृष्ट, समर्थ तथा सशक्त है । संस्कृतनिष्ठता इनकी भाषा की प्रमुख विशेषता है । इन्होंने संस्कृतप्रधान शुद्ध साहित्यिक भाषा को ही अपनाया है । इनकी रचनाओं में कहीं-कहीं पर अत्यंत सरल और व्यावहारिक भाषा के दर्शन होते हैं । मुहावरों, लोकोक्तियों का प्रयोग किया गया है । लक्षणा और व्यंजना की प्रधानता इनकी भाषा की महत्वपूर्ण विशेषता है । महादेवी जी की भाषा में चित्रों को अंकित करने तथा अर्थ को व्यक्त करने की अदभुत क्षमता है । महादेवी जी की गद्य शैली बिलकुल अलग है । ये यथार्थवादी गद्य लेखिका थीं । इनकी गद्य शैली में मार्मिकता, बौद्धिकता, भावुकता, काव्यात्मक सौष्ठव तथा व्यंग्यात्मकता विद्यमान है


(अ) चित्रोपम वर्णनात्मक शैली- महादेवी जी चित्रोपम वर्णन करने में सिद्धहस्त हैं । वस्तु, व्यक्ति अथवा घटना का वर्णन करते समय इनकी लेखनी तूलिका बन जाती है, जिससे सजीव शब्दचित्र बनते चले जाते हैं । प्रस्तुत पुस्तक में संकलित ‘गिल्लू’ रेखाचित्र महादेवी जी की कृति ‘मेरा परिवार’ से लिया गया है । इनके निबंधों और रेखाचित्रों में अधिकतर इसी शैली का प्रयोग हुआ है । महादेवी जी की मुख्य शैली भी यही है ।

(ब) विवेचनात्मक शैली- गंभीर और विचारप्रधान विषयों में महादेवी जी ने इस शैली का प्रयोग किया है । इसकी
भाषा गंभीर और संस्कृतनिष्ठ है ।
(स) भावात्मक शैली- महादेवी जी भावुक हृदया होने के साथ-साथ भावमयी कवयित्री भी थीं । हृदय का आवेग जब
रुक नहीं पाता, तब उनकी शैली भावात्मक हो जाती है ।
(द) व्यंग्यात्मक शैली- नारी जीवन की विषमताओं और उन्हें दुःखी देखकर उनकी कोमल लेखनी से तीक्ष्ण व्यंग्य
निकलने लगते हैं । ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’, निबंध में इस व्यंग्यात्मक शैली के दर्शन होते हैं ।


3– हिंदी गद्य-साहित्य में महादेवी वर्मा का स्थान स्पष्ट कीजिए ।
उतर– – हिंदी गद्य-साहित्य में महादेवी वर्मा का स्थान अतुलनीय है । शृंखला की कड़ियाँ’ में स्त्रियों की मुक्ति और विकास के लिए महादेवी जी ने जिस साहस व दृढ़ता से आवाज उठाई है और जिस प्रकार सामाजिक रूढ़ियों की निंदा की है, उससे उन्हें महिला मुक्तिवादी भी कहा गया । महिलाओं व शिक्षा के विकास के कार्यों और जनसेवा के कारण उन्हें समाज सुधारक भी कहा जाता है । उनके संपूर्ण गद्य साहित्य में पीड़ा या वेदना के कहीं दर्शन नहीं होते बल्कि अदम्य रचनात्मक रोष, समाज में बदलाव की अदम्य आकांक्षा और विकास के प्रति सहज लगाव परिलक्षित होता है । हिंदी साहित्य के क्षेत्र में अपने अभूतपूर्व योगदान के कारण महादेवी वर्मा चिरकाल तक स्मरणीय रहेंगी । हिंदी साहित्य जगत सदैव उनका आभारी रहेगा ।

4– ‘गिल्लू’ पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए ।
उतर– – हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध लेखिका महादेवी वर्मा द्वारा लिखित ‘गिल्लू’ रेखाचित्र विधा पर आधारित एक अनुपम रचना है । यह रेखाचित्र उनकी प्रसिद्ध कृति ‘मेरा परिवार’ से संकलित है । प्रस्तुत रचना में गिलहरी जैसे एक अतिसाधारण एवं उपेक्षित प्राणी की चेष्टाओं का सजीव चित्रण करते हुए उसे एक स्मरणीय व्यक्तित्व प्रदान किया गया है । लेखिका लिखती हैं कि पीली जुही के बेल पर लगी कली को देखकर उसे अचानक उस छोटे जीव गिलहरी की याद आ गई, जो कि इस बेल की हरियाली में रहता था और लेखिका को घायल अवस्था में मिला था । उस गिलहरी के बच्चे को लेखिका उठाकर कमरे में ले आई और रूई से उसका रक्त पोंछकर उसके घाव पर पेंसिलीन का मरहम लगाया और रूई की बत्ती से उसे दूध पिलाने का प्रयास किया । तीन दिनों के उपचार के बाद वह इतना स्वस्थ हो गया कि उसने अपने दोनों पंजों से लेखिका की उँगली पकड़ ली । तीन-चार महीनों बाद वह एक वयस्क गिलहरी बन गया और लेखिका ने उसे ‘गिल्लू’ नाम दिया । लेखिका ने उसके रहने की व्यवस्था एक डलिया में रूई बिछाकर कर दी । जहाँ गिल्लू दो वर्ष तक रहा । लेखिका का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए वह विभिन्न उपाय करता था । भूख लगने पर वह चिक-चिक करके लेखिका को सूचना देता था ।

गिल्लू के जीवन के प्रथम वसंत में लेखिका ने उसके लिए खिड़की की जाली का कोना खोल दिया था । लेखिका के बाहर से आने पर वह उसके सिर से पैर तक दौड़ लगाता था । गिल्लू लेखिका को जगह-जगह छिपकर चौंकाता था और लेखिका की थाली में से सफाई के साथ खाना उठाकर खाता था । जब लेखिका को मोटर दुर्घटना में घायल होने के कारण अस्पताल में रहना पड़ा, तब गिल्लू अपना प्रिय पदार्थ काजू भी नहीं खाता था । वह लेखिका की बीमारी में परिचारिका के समान उसका ध्यान रखता था । गिल्लू नए-नए उपाय खोजकर लेखिका के पास ही रहता । सामान्यत: गिलहरियों का जीवनकाल दो वर्ष का होता है । अपने अंत समय में गिल्लू अपने झूले से उतरकर लेखिका के पास आया और लेखिका की उँगली पकड़ ली जैसे कि उसने अपने बचपन में पकड़ी थी, जब वह लेखिका को मिला था । गिल्लू के चिर निद्रा में सोने पर लेखिका ने गिल्लू को उसी सोनजुही की बेल के नीचे समाधि दी, जो उसे बहुत प्रिय थी । लेखिका को उसका, जुही के पीले फूल के रूप में खिलने का विश्वास है, जो उसे संतोष देता है ।

(ग) अवतरणों पर आधारित प्रश्न
1– सोनजुही———— ऊपर आ गया हो ।
संदर्भ- प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘हिंदी’ के ‘गद्य खंड’ में संकलित ‘महादेवी वर्मा द्वारा लिखित ‘गिल्लू’ नामक रेखाचित्र से उद्धृत है ।
प्रसंग- प्रस्तुत गद्यांश में लेखिका ने गिलहरी के बच्चे ‘गिल्लू’ की स्मृतियों का वर्णन किया है ।

व्याख्या- महादेवी जी ने गिलहरी के एक घायल बच्चे के प्राण बचाये । वह दो वर्ष तक महादेवी जी के पास रह कर उन्हें अपने क्रिया-कलाप से चौंकाता रहता था । जब वह मर गया तो महादेवी जी ने सोनजुही की लता के नीचे उसे समाधि दे दी । एक दिन सोनजुही की लता में एक पीली कली को देखकर महादेवी जी को उस छोटे जीव गिल्लू की याद आ गई, जो इस लता की हरियाली में छिपकर बैठा करता था और जब महादेवी जी उस लता के पास पहुँचती थी तो वह (गिल्लू) उनके कंधे पर कूद जाया करता था । जिससे लेखिका चौंक जाती थी । उन दिनों महादेवी जी अपनी सोनजुही की लता में किसी कली को ढूँढ़ती थीं । पर इसके विपरीत आज वे कली को नहीं, अपितु उस छोटे से जीव को ढूँढ़ती हैं, जो इसमें छिपा रहता था और उनके कंधे पर कूदकर उन्हें चौंकाया करता था । परंतु वह तो इस सोनजुही की बेल की मिट्टी में अब मिल गया होगा और महादेवी जी को विश्वास था कि वह किसी दिन सुनहरी (पीली) कली बनकर उन्हें चौंकाने के लिए ऊपर आ चुका होगा ।


प्रश्नोत्तर (अ) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखिका का नाम लिखिए ।
उतर– – पाठ- गिल्लू
लेखिका- महादेवी वर्मा
(ब) सोनजुही क्या है ?
उतर– – ‘सोनजुही’, जुही नामक बेल की एक किस्म है, जो पीली होती है ।
(स) सोनजुही में पीली कली को देखकर लेखिका को किसकी याद आ गई ?
उतर– – सोनजुही में पीली कली को देखकर लेखिका को गिलहरी के बच्चे
(गिल्लू) की याद आ गई । (द) प्रस्तुत गद्यांश में लेखिका किसकी बात कर रही है और वह किसे खोज रही है ?
उतर– – प्रस्तुत गद्यांश में लेखिका गिलहरी के बच्चे (गिल्लू) की बात कर रही है और उसे ही सोनजुही की कली के रूप
में खोज रही है ।

2– अचानक————– प्रयक्त करते हैं ।
संदर्भ- पूर्ववत् प्रसंग- ‘गिल्लू’ रेखाचित्र में लेखिका ने कोमल और लघुप्राण गिलहरी का मानवीय संवेदना और ममता के आधार पर हृदयस्पर्शी चित्रण किया है । एक बार वे सुबह के समय अपने घर के बाहर कुछ कौओं को काँव-काँव करते देखती हैं और अचानक उनके मन में कुछ विचार उठने लगते हैं । उन्हीं विचारों को प्रस्तुत पंक्तियों में दर्शाया गया है ।
व्याख्या- लेखिका कहती हैं कि एक दिन सुबह जब वह कमरे में से बरामदे में आई तो उन्होंने देखा कि दो कौए एक गमले के चारों तरफ अपनी चोंचों से खेल रहे थे । कौआ; जिसे भारतीय (प्राचीन) ग्रंथों में कागभुशुडि के रूप में प्रसद्धि मिली है, बहुत ही विचित्र पक्षी है । कारण यह है कि भारतीय समाज में कौओं की स्थिति अत्यधिक विषम है । कौए के प्रति परस्पर दो विरोधी भाव लोगों के मन में हैं । कौए का आदर भी बहुत होता है तथा उसे अपमानजनक दृष्टि से भी देखा जाता है । इसलिए लेखिका ने कौए को एक साथ अत्यधिक सम्मानित और अत्यधिक अवमानित भी कहा है । हम भारतवासियों की यह धारणा है कि पितृ पक्ष (श्राद्ध के दिनों) में हमारे पूर्वजों की आत्माएँ कौए के रूप में पृथ्वी पर आती हैं । इसी कारण पितृ पक्ष में कौए का सम्मान सबसे अधिक किया जाता है । श्राद्ध के दिनों में अपने पितरों की तृप्ति के लिए लोग कौओं को भोजन कराते हैं । कौए के अतिरिक्त और भी तो पक्षी हैं; जैसे गरुड़, मोर, हंस; परंतु इनमें से कोई भी रूप हमारे पितरों को पसंद नहीं आया । इसके अतिरिक्त कौए का मान हम दूसरे रूप में भी करते हैं ।

घर की मँडेर पर बैठकर जब कौआ अपनी कर्कश वाणी में काँव-काँव करता है तो यह समझा जाता है कि कोई प्रियजन आनेवाला है । हमें ऐसा लगता है कि कौआ हमारे उस प्रिय के आगमन का संदेश लेकर आया है, जो हमसे दूर रह रहा है । किसी के घृणात्मक आचरण अथवा काले रंग को देखकर व्यक्त करते हुए हम उसे ‘कौआ’ कह देते हैं तथा किसी की कर्कश वाणी सुनकर – ‘क्या काँव-काँव की रट लगा रखी है ?’- कह देते हैं । ये दोनों बातें अपमानसूचक हैं । इस प्रकार भारतीय समाज में कौए की स्थिति अत्यधिक सम्मानित तथा अत्यधिक अपमानित; दोनों ही प्रकार की है ।


प्रश्नोत्तर (अ) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखिका का नाम लिखिए ।
उतर– – पाठ- गिल्लू
लेखिका- महादेवी वर्मा
(ब) गद्यांश के अनुसार पुरखों को हमसे कुछ पाने के लिए क्या करना पड़ता है ?
उतर– – गद्यांश के अनुसार पुरखों को हमसे कुछ पाने के लिए कौए के रूप में पृथ्वी पर आना पड़ता है ।
(स) लेखिका ने बरामदे में कौओं को क्या करते देखा ?
उतर– – बरामदे में लेखिका ने कौओं को छुवा-छुवौवल जैसा खेल खेलते देखा ।
(द) कागभुशुण्डि कौन हैं ?
उतर– – पाठ में कागभुशुण्डि का अर्थ ‘कौए’ से है । कागभुशुण्डि तुलसीदास कृत ‘श्रीरामचरितमानस के पात्र हैं, जो किसी शाप के कारण कौआ हो गए थे । उन्होंने गरुड़ को श्रीराम की कथा सुनाई थी ।
(य) कौआ समादरित कैसे होता है ?
उतर– – पितृपक्ष में हम अपने पितरों की तृप्ति के लिए जब कौओं को भोजन कराते हैं तो उन्हें अत्यधिक श्रद्धा और
सम्मान की दृष्टि से देखते है । इस प्रकार कौआ समादरित होता है ।
(र) गद्यांश के अनुसार दूर स्थित प्रियजनों का संदेश हमें किसके द्वारा प्राप्त होता है ?
उतर– – दूर स्थित प्रियजनों के आने का संदेश हमें कौए की कर्कश वाणी (काँव-काँव) के द्वारा मिलता है ।


3– मेरी अस्वस्थता —- —— ठंडक में भी रहता ।
संदर्भ- पूर्ववत्
प्रसंग- लेखिका को गिल्लू द्वारा किया गया स्पर्श अत्यंत ही सुखदायी लगता है ।
व्याख्या- गिल्लू काफी कुछ आत्मीयता का अनुभव करता है । जब लेखिका का शरीर रोगी होता है अथवा वह विषादग्रस्त होती है, तो गिल्लू उसके समीप रहता है । उसके सिरहाने आकर वह अपने मुलायम और छोटे-छोटे पैरों से लेखिका के बालों को सहलाता है । ऐसा किए जाने पर लेखिका अतीव सुख का अनुभव करती है । जब गिल्लू वहाँ से चला जाता है तो लगता है कि किसी सेविका का अभाव हो गया है । लेखिका कहती है कि गर्मियों की दोपहर में जब वह काम कर रही होती थी तो गिल्लू न तो खिड़की से बाहर जाता था और न अपने झूले में बैठता था । उसने लेखिका के समीप रहने का एक उपाय खोज निकाला था । वह लेखिका के पास रखी पानी की सुराही पर लेटा रहता था जिससे वह लेखिका के समीप भी रहता था और ठंडक में भी रहता था ।
प्रश्नोत्तर (अ) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखिका का नाम लिखिए ।
उतर– – पाठ- गिल्लू
लेखिका- महादेवी वर्मा
(ब) परिचारिका किसे कहते हैं ?


उतर– – परिचारिका से तात्पर्य रोगी की देखभाल करने वाली सेविका से है ।
(स) महादेवी जी की अस्वस्थता में उनके बालों को हौले-हौले कौन सहलाता रहता था ?
उतर– – महादेवी जी की अस्वस्थता में गिल्लू उनके बालों को हौले-हौले सहलाता रहता था ।
(द) गर्मियों की दोपहर में गिल्लू की क्या चर्या थी ?
उतर– – गर्मियों की दोपहरी में गिल्लू घर के बाहर नहीं जाता था । वह अपने झूले में भी नहीं बैठता था । वह लेखिका के
पास रखी सुराही पर लेटा रहता था । इस तरह से वह लेखिका के समीप भी रहता था और ठंडक में भी ।


4– गिलहरियों के जीवन —————– पकड़ा था ।
संदर्भ- पूर्ववत् प्रसंग- इन पंक्तियों में लेखिका ने अपने प्यारे जीव गिल्लू के अंत समय की गतिविधियों का मार्मिक चित्रण किया है । व्याख्या- लेखिका बताती हैं कि गिलहरियों का जीवनकाल बहुत लंबा नहीं होता, बल्कि बहुत छोटा होता है । गिलहरियाँ दो साल से अधिक जीवित नहीं रहतीं और गिल्लू को भी उनके पास लगभग दो साल हो गए थे । इस प्रकार उसके इस लोक को छोड़कर परलोक जाने का समय आ गया था । उस दिन गिल्लू ने सारा दिन कुछ भी नहीं खाया और न ही अपने घोंसले को छोड़कर घर से बाहर गया । रात्रि में जब वह मृत्यु की पीड़ा झेल रहा था, तब वह अपने झूले से उतरकर लेखिका के बिस्तर पर आ गया और लेखिका के प्रति अपनी ममता के कारण वह लेखिका की उसी उँगली को पकड़कर उसके हाथ से चिपक गया, जिस उँगली को उसने अपने बचपन में मरणासन्न स्थिति में पकड़ा था । इस समय उसके पंजे अत्यधिक ठंडे हो गए थे । आशय यही है कि इस समय गिल्लू की चेतना धीरे-धीरे समाप्त हो रही थी ।


प्रश्नोत्तर (अ) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखिका का नाम लिखिए ।
उतर– – पाठ- गिल्लू
लेखिका- महादेवी वर्मा
(ब) लेखिका को कैसे अहसास हुआ कि गिल्लू का अंत आ गया है ?
उतर– – गिल्लू ने न दिनभर कुछ खाया और न ही अपने घोंसले को छोड़कर बाहर गया, वैसे भी उसे लेखिका के पास रहते लगभग दो वर्ष हो गए थे; अत: उसकी आयु को पूर्ण हुआ देखकर लेखिका जान गई कि गिल्लू की जीवन यात्रा का अंत आ गया है ।


(स) गद्यांश के आधार पर बताइए कि गिल्लू को लेखिका के पास रहते हुए कितना समय हो गया था ?
उतर– – गिल्लू को लेखिका के पास रहते लगभग दो वर्ष का समय हो गया था; क्योंकि लेखिका को गिल्लू नवजात शिशु के रूप में घायलावस्था में प्राप्त हुआ था और गिलहरियों का जीवनकाल दो वर्षों से अधिक नहीं होता । गिल्लू अब मरणासन्न अवस्था में है; अतः स्पष्ट है कि गिल्लू को लेखिका के पास रहते दो वर्ष बीत गए ।
‘समय में झले से उतरकर उँगली पकडकर हाथ से चिपक जाना, गिल्ल की किस भावना को प्रदर्शित
करता है ?
उतर– – गिल्लू का अपने अंत समय में लेखिका की उँगली पकड़कर उसके हाथ से चिपक जाना यह प्रदर्शित करता है कि
गिल्लू को लेखिका से अत्यधिक प्रेम है ।


5– उसका झूला —————- संतोष देता है ।
संदर्भ- पूर्ववत्
प्रसंग- इन पंक्तियों में लेखिका ने पालतू गिलहरी ‘गिल्लू’ की मृत्यु पर अपनी ममतामयी संवेदना प्रकट की है ।
व्याख्या- लेखिका ने अपनी पालतू गिलहरी गिल्लू के लिए फूल रखने की डलिया में रूई बिछाकर तथा उसे तार से खिड़की पर लटकाकर एक झूला-सा बना दिया था । दो वर्ष की अपनी संपूर्ण आयु व्यतीत कर ‘गिल्लू’ की मृत्यु हो गई । गिल्लू की मृत्यु के पश्चात् लेखिका ने उसका प्रिय झूला उतारकर रख दिया और खिड़की की जाली को खोलकर गिल्लू जाने का जो रास्ता बनाया था, उसे भी बंद कर दिया; क्योंकि अब उससे होकर जानेवाला इस संसार से विदा ले चुका था । यद्यपि गिल्लू इस संसार को छोड़कर जा चुका था । परंतु उसकी नई पीढ़ी की गिलहरियाँ उस खिड़की की जाली के बाहर से चिक-चिक की आवाज करके इधर-उधर कूद-फाँद करती रहती हैं, जिस जाली के पास गिल्लू का झूला लटका रहता था ।
सोनजुही पर भी वंसत आता ही रहता है, पर गिल्लू अब वसंत का आनंद लेने के लिए इस संसार में नहीं है । उसकी स्मृति लेखिका के मन में किसी-न-किसी रूप में बनी ही रहती है । लेखिका अंत में कहती हैं कि गिल्लू को उसी जगह दफना दिया गया है, जो स्थान उसे अत्यंत प्रिया था । वह प्रिय स्थान है- सोनजुही की लता । उसका विश्वास है कि गिल्लू का वह छोटा-सा शरीर किसी-न-किसी वसंत में सोनजुही के पीले फूलों के रूप में विकसित होकर अपनी आभा बिखरेगा । यह विश्वास ही लेखिका को संतोष देता रहता है ।


प्रश्नोत्तर (अ) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखिका का नाम लिखिए ।
उतर– – पाठ- गिल्लू
लेखिका- महादेवी वर्मा
(ब) गिल्लू के न रहने पर लेखिका ने क्या किया ?
उतर– – गिल्लू के न रहने पर लेखिका ने गिल्लू के प्रिय झूले को उतारकर रख दिया और खिड़की की उस जाली को भी
बंद कर दिया, जिससे गिल्लू खिड़की के बाहर आता जाता रहता था ।
(स) ‘सोनजुही पर वसंत आता ही रहता है’ सेलेखिका का क्या अभिप्राय है ?
उतर– – ‘सोनजुही पर वसंत आता ही रहता है ।’ से लेखिका एक तो यह कहना चाहती है कि यह संसार अथवा जीवन
गतिशील है । किसी की मृत्यु पर यह ठहर नहीं जाता, वरन् अपनी गति से चलता रहता है । यही कारण है कि जूही के वसंत का आनंद लेने वाला गिल्लू अब नहीं रहा, फिर भी उस पर वसंत आता रहता है । इस पंक्ति के द्वारा लेखिका यह भी कहना चाहती है कि गिल्लू आज भी उनकी स्मृति में पूर्ववत् बसा है । जब-जब जूही पर वसंत आता है, तब-तब उसकी स्मृति और गाढ़ी हो जाती है ।
(द) लेखिका ने गिल्लू की समाधि कहाँ बनाई ?
उतर– – लेखिका ने गिल्लू की समाधि सोनजुही की लता के नीचे बनाई ।
(य) कौन-सा विश्वास लेखिका को संतोष देता है ?
उतर– – लेखिका का यह विश्वास उसे संतोष देता है कि एक दिन गिल्लू सोनजुही के फूल के रूप में खिलकर उसे
अवश्य चौंकाएगा ।

(घ) वस्तुनिष्ठ प्रश्न
1– महादेवी वर्मा का जन्म हुआ था
(अ) सन् 1897 में (ब) सन् 1907 में (स) सन् 1902 में (द) सन् 1900 में
उतर—
2– निम्न में से महादेवी वर्मा की काव्य रचना है
(अ) पथ के साथी (ब) अबला और सबला (स) क्षणदा (द) नीरजा
उतर—
3– ‘गिल्लू’ रेखाचित्र महादेवी वर्मा की किस कृति से लिया गया है ?
(अ) रश्मि (ब) मेरा परिवार (स) पथ के साथी (द) दीपशिखा
उतर—
4– हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक है
(अ) कबीरदास (ब) बिहारी (स) महादेवी वर्मा (द) भारतेंदु हरिश्चंद्र
उतर—
5– महादेवी वर्मा को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा किस कृति’ के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया ?
(अ) पथ के साथी (ब) नीरजा (स) मेरा परिवार (द) यामा
उतर—
6– महादेवी वर्मा को किसके द्वारा पद्मभूषण की उपाधि से अलंकृत किया गया ?
(अ) काशी विद्यापीठ द्वारा (ब) भारत सरकार द्वारा (स) कुमाऊँ विश्वविद्यालय द्वारा (द) नागरी प्रचरिणी सभा द्वारा
उतर—

(ङ) व्याकरण एवं रचनाबोध
1– निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्गों और प्रत्ययों पर ध्यान दीजिए । विचार कीजिए कि इससे अर्थ में क्या परिवर्तन हो गया है । इसी प्रकार तीन अन्य शब्दों के उदाहरण दीजिए
उपसर्ग- सम्मान, अवमान, सम्मानित, अपवाद, अनायास
प्रत्यय- हरीतिमा, स्वर्णिम, दूरस्थ
उतर– – उपसर्ग- सम्मति, अवगुण, अपमान
प्रत्यय- बुद्धिमान, धनवान, शारीरिक


2– ‘हमारे बेचारे पुरखे न गरुड़ के रूप में आ सकते हैं, न मयूर के, न हंस के’ लेखिका के इस कथन का क्या अभिप्राय
उतर– – लेखिका के इस कथन का अभिप्राय है कि हम भारतवासियों की यह धारणा है कि हमारे पूर्वजों की आत्माएँ पितृपक्ष (श्राद्ध के दिनों) में कौए के रूप में पृथ्वी पर आती हैं । कौए के अतिरिक्त दूसरे और भी तो पक्षी हैं, जो सुंदर हैं- जैसे गरुड़, मयूर और हंस, वे इन पक्षियों के रूप में पृथ्वी पर अवतीर्ण नहीं होते । वे तो केवल कौए के रूप में ही आते हैं ।

3– वाक्य-विश्लेषण कीजिए
निकट जाकर देखा, गिलहरी का छोटा-सा बच्चा है, जो सम्भवत: घोंसले से गिरा पड़ा है और अब कौए जिसमें सुलभ आहार खोज रहे थे ।
वाक्य-विश्लेषण- लेखिका के अनुसार जब वह अपने बरामदे में सुबह के समय टहल रही थी तो अचानक उसकी नजर बरामदे में रखे गमले पर पड़ी जिसमें एक गिलहरी का बच्चा किसी घोंसले से गिर गया था । जिस पर कौओं की नजर पड़ चुकी थी और अब वे उसे अपना भोजन बनाने ही वाले थे । अत: उपर्युक्त वाक्य में लेखिका द्वारा एक गिलहरी के बच्चे को कौओं का आहार बनने से बचाने के विषय में बताया गया |

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