UP BOARD SOLUTION FOR SOCIAL SCIENCE CLASS 10 पाठ–49 आर्थिक विकास में राजस्व की आवश्यकता (केंद्र, राज्य, स्थानीय निकायों की आय के स्रोत; व्यय की मदें, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर)

UP BOARD SOLUTION FOR SOCIAL SCIENCE CLASS 10 पाठ–49 आर्थिक विकास में राजस्व की आवश्यकता (केंद्र, राज्य, स्थानीय निकायों की आय के स्रोत; व्यय की मदें, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर)

पाठ–49 आर्थिक विकास में राजस्व की आवश्यकता (केंद्र, राज्य, स्थानीय निकायों की आय के स्रोत;
व्यय की मदें, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर)
प्रश्न—- 1. कर का अर्थ तथा महत्व बताइए।

उ०- ‘कर’ का अर्थ- नागरिकों द्वारा सरकार को दिया जाने वाला अनिवार्य भुगतान ‘कर’ कहलाता है। दूसरे शब्दों में, “कर वह। अनिवार्य अंशदान है, जो एक करदाता सरकार को चुकाता है।” कर चुकाने के लिए करदाता कानूनी रूप से बाध्य होता है। कर का महत्व- ‘कर’ लगाने का महत्व निम्नवत् है(i) करों द्वारा सरकार को आय प्राप्त होती है। (ii) करारोपण से सरकार हानिकारक पदार्थों के उपयोग पर नियंत्रण लगाती है। (iii) करारोपण से समाज में व्याप्त आर्थिक विषमता दूर हो जाती है। (iv) करों से प्राप्त आय का उपयोग सरकार राष्ट्र के आर्थिक विकास में करती है। (v) करारोपण वस्तुओं की मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण लगाने का रामबाण उपाय है।
(vi) ‘कर’ बचतों को बढ़ावा देकर पूँजी निर्माण में सहायक बनाते हैं।

2. कर की परिभाषा और प्रकार लिखिए।

उ०- कर की परिभाषा- “कर सरकार को दिए जाने वाले उस अनिवार्य अंशदान को कहते हैं, जो सबके सामान्य हित के लिए किए जाने वाले खर्चों के भुगतान में अदा किया जाता है और जिसका मिलने वाले विशेष लाभों से कोई संबंध नहीं होता।”
कर मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं- प्रत्यक्ष कर तथा अप्रत्यक्ष कर।

3. प्रत्यक्ष कर से क्या तात्पर्य है? प्रत्यक्ष कर की दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर – प्रत्यक्ष कर का अर्थ- वह कर प्रत्यक्ष कर कहलाता है, जिसका भुगतान उसी व्यक्ति को करना पड़ता है, जिस पर यह लगाया जाता है। दूसरे शब्दों में, “करदाता जिस कर का भुगतान दूसरों पर नहीं टाल सकता, प्रत्यक्ष कर कहलाता है।” प्रत्यक्ष कर की दो विशेषताएँ(i) प्रगतिशीलता- प्रत्यक्ष कर करदाता की क्षमता के अनुसार लगाए जाने के कारण प्रगतिशील होते हैं। ये कर आय की
असमानता को दूर करने के गुण के कारण प्रगतिशीलता को वहन करते हैं। (i) मितव्ययिता- प्रत्यक्ष करों के पीछे कानूनी बाध्यता होने के कारण, इन्हें करदाता स्वयं अदा कर देता है। अतः इनके
एकत्रीकरण में सरकार की मितव्ययिता बनी रहती है।

4. अप्रत्यक्ष कर से क्या आशय है? इसकी दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उ०- अप्रत्यक्ष कर का अर्थ- वह कर जिसका भार करदाता दूसरे लोगों पर टाल देता है, अप्रत्यक्ष या परोक्ष कर कहलाता है।
एक दुकानदार को विविध वस्तुओं पर सरकार को वाणिज्यकर (बिक्री कर) देना पड़ता है, जिसे वह अपने ग्राहकों से वसूलकर सरकार के पास जमा कर देता है। दूसरे शब्दों में, “वह कर, जिसे करदाता दूसरों पर टालने में सफल हो जाता है,

अप्रत्यक्ष या परोक्ष कर कहा जाता है।” बिक्री कर, उत्पाद कर, वाणिज्य कर, सीमा शुल्क, मनोरंजन कर तथा सेवा कर इन करों के उदाहरण है। अप्रत्यक्ष कर की दो विशेषताएँ(i) सुविधाजनक- अप्रत्यक्ष कर सुविधाजनक होते हैं, क्योंकि सरकार इन्हें नागरिकों की बजाय उत्पादकों, आयातकों _और व्यापारियों से सुगमता से प्राप्त कर लेती है। (ii) न्यायपूर्ण- परोक्ष कर न्यायपूर्ण होते हैं। ये कर उपभोक्ता वस्तुओं पर लगाए जाते हैं, अतः इनका भार समाज के सभी वर्गों को झेलना पड़ता है।

5. प्रत्यक्ष कर तथा अप्रत्यक्ष कर में चार अंतर लिखिए।

उ०- प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर में चार अंतर निम्नवत् हैं

6. अप्रत्यक्ष करों के चार गुणों का वर्णन कीजिए।

उ०- अप्रत्यक्ष करों के चार गुण निम्नलिखित हैं(i) चोरी की संभावना कम- परोक्ष करों की चोरी करना संभव नहीं है। उदाहरण के लिए, जब भी उपभोक्ता कोई वस्तु खरीदता है, वाणिज्य कर का भुगतान उसे करना ही पड़ता है। (ii) विविधता- अप्रत्यक्ष करों में विविधता का गुण निहित रहता है, क्योंकि नागरिकों को इन्हें विविध रूपों में चुकाना ही
पड़ता है। (iii) लोचदार- अप्रत्यक्ष कर लोचदार होते हैं। सरकार इन करों में वृद्धि करके पर्याप्त आय प्राप्त करने में सफल हो जाती है। (iv) विस्तृत आधार- अप्रत्यक्ष कर समाज के सभी वर्गों के लोगों द्वारा चुकाए जाते हैं। अत: इनका आधार विस्तृत रहता है।

7. राजस्व का अर्थ बताइए।

उ०- लोकतंत्र में सरकार जनहित तथा समाज कल्याण के साथ-साथ आर्थिक विकास हेतु अनेक कार्य करती है। यह कार्य वह विभिन्न संसाधनों द्वारा पूरा करती है। ये संसाधन धन के माध्यम से तथा धन राजस्व के माध्यम से जुटाया जाता है। राजस्व का शाब्दिक अर्थ है, राज्य का धन’ अर्थात् राजस्व राज्य का वह धन है, जो वह विभिन्न साधनों से जुटाता है। अर्थशास्त्र की भाषा में सरकार की आय-व्यय की क्रियाओं का लेखा-जोखा राजस्व कहलाता है। राजस्व को लोक वित्त या सार्वजनिक
वित्त भी कहते हैं।

8. केंद्र सरकार की आय के किन्हीं दो स्रोतों का उल्लेख कीजिए।

उ०- केंद्र सरकार की आय के चार स्रोत निम्नवत् हैं(i) आयकर- आय पर लगने वाला प्रत्यक्ष कर आयकर केंद्र सरकार लगाती है, जो उसकी आय का मुख्य स्रोत है। केंद्र
सरकार कृषि की आय को छोड़कर निर्धारित न्यूनतम आय की सीमा से ऊपर की आय पर कर लगाकर आय प्राप्त करती है। केंद्र सरकार प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अपने वार्षिक बजट में आयकर की दरें निश्चित करती है। आयकर से

प्राप्त राजस्व का कुछ भाग वित्त आयोग की सिफारिश पर राज्यों को बाँटा जाता है। (i) निगम कर- केंद्र सरकार राष्ट्रीय और विदेशी व्यावसायिक कंपनियों की वार्षिक आय पर जो कर लगाती है, उसे
‘निगम कर या कार्पोरेट टैक्स’ कहा जाता है। यह प्रत्यक्ष कर निगम की संपूर्ण आय पर एक निश्चित दर से लगाया
जाता है।

9. राज्य सरकार के चार स्रोत लिखिए।

उ०- राज्य सरकार की आय के चार स्रोत निम्नवत् हैं(i) भू-राजस्व- सरकार राज्य के किसानों से उनकी भूमि पर लगान लगाकर भू-राजस्व प्राप्त करती है। भू-राजस्व राज्य सरकार की आय का एक प्रमुख स्रोत है। जमींदारी उन्मूलन के बाद से सरकार के भू-राजस्व में बहुत वृद्धि हुई है। (ii) राज्य उत्पाद शुल्क- राज्य सरकार मादक पदार्थ; जैसे- शराब, भाँग तथा अफीम आदि पर आबकारी शुल्क लगाकर राज्य उत्पाद शुल्क वसूल करके भारी आय प्राप्त करती है। (iii) व्यापार कर- राज्य सरकार व्यापारियों तथा दुकानदारों से व्यापार कर प्राप्त कर अपनी आय बढ़ाती है।
(iv) मनोरंजन कर- राज्य सरकार सिनेमाओं, सर्कसों, मेलों तथा प्रदर्शनियों से मनोरंजन कर वसूलकर आय प्राप्त करती है।

10. राज्य सरकार के व्यय की प्रमुख मदें लिखिए।

उ०- राज्य सरकार के व्यय की प्रमुख मदें निम्नलिखित हैं(i) कृषि विकास
(ii) पशुपालन (iii) सहकारिता एवं सामूहिक विकास कार्य (iv) सिंचाई की व्यवस्था (v) उद्योग एवं व्यापार
(vi) शिक्षा तथा जीवन (vii) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ (viii) परिवहन का विकास (ix) प्रशासनिक कार्य
(x) कानून व्यवस्था (xi) ऋणों का भुगतान
_ (xii) कर संग्रह आदि

क11. नगरपालिका परिषद् की आय के चार स्रोतों का उल्लेख कीजिए।

उ०- (i) सीमा या सीमांत कर से आय- बाहर से रेलवे द्वारा ढोकर लाए जाने वाले माल पर सीमांत कर लगता है, जो स्थानीय निकाय की आय का स्रोत होता है। (ii) मार्ग कर- स्थानीय निकाय मार्ग में पड़ने वाले पुलों, सड़कों, नदियों से गुजरने वाले वाहनों से टोल टैक्स वसूलकर आय बढ़ाते हैं। (iii) यात्री कर- तीर्थ स्थलों पर बाहर से आने वाले यात्रियों से यात्री कर वसूलकर स्थानीय निकाय अपनी आय बढ़ाते हैं। (iv) तहबजारी- सड़क किनारे ठेले लगाने वालों तथा फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों से स्थानीय निकाय के अधिकारी तहबजारी वसूलकर, उसकी आय बढ़ाते हैं।

12. ग्राम पंचायत की आय के चार स्रोत तथा व्यय की चार मदों का उल्लेख कीजिए। उ०- ग्राम पंचायत की आय के चार स्रोत(i) भूमि पर उपकर- राज्य सरकार जो भूमिकर लेती है, उसका कुछ अंश स्थानीय निकायों को वितरित कर दिया जाता है, जो उनकी आय का स्रोत बन जाता है। (ii) काँजी हाउस- जिला पंचायत काँजी हाउस में आवारा पशुओं को रखने तथा बाद में छोड़ने के लिए जुर्माना लेकर आय प्राप्त करती है। (iii) संपत्ति कर- यह कर ग्रामीण स्थानीय निकाय व्यक्तियों की कुल संपत्ति अथवा व्यापार और उद्योग से प्राप्त होने वाली आय से वसूल करते है।

(iv) पथकर से प्राप्त आय- पुलों, सड़कों तथा घाटों पर ग्रामीण निकाय पथकर वसूलकर आय जुटाते हैं।

13. प्रत्यक्ष करों के चार अवगुण लिखिए। उ०- प्रत्यक्ष करों के चार अवगुण निम्नवत हैं(i) असुविधाजनक- प्रत्यक्ष कर विस्तृत लेखा-जोखा तैयार कर उनका विस्तृत विवरण रखने के कारण असुविधाजनक रहते हैं। इसके लिए करदाता आयकर अधिकारी या सी.ए. की मदद लेता है। (ii) कष्टदायक- प्रत्यक्ष कर कष्टदायक होते हैं, क्योंकि इनका भुगतान करदाता को स्वयं प्रत्यक्ष रूप से करना पड़ता है।
वेतनभोगी लोगों के वेतन से ही कर की निश्चित राशि काटकर वेतन का भुगतान किया जाता है, जो उन्हें कष्टकर लगता है। (ii) कर चोरी की संभावना- प्रत्यक्ष कर आय के अनुरूप निश्चित दर पर अनिवार्य रूप से चुकाने पड़ते हैं। अतः व्यापारी वर्ग अपनी आय को कम दिखाकर करों की चोरी करने में सफल हो जाता है। (iv) अधिक खर्चीले- प्रत्यक्ष करों का क्षेत्र व्यापक होने के कारण, इन्हें एकत्र करने में सरकार को भारी व्यय करना पड़ता है।

14. प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष करों का पारस्परिक संबंध स्पष्ट कीजिए।

उ०- प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष कर एक-दूसरे के पूरक हैं। एक संतुलित और न्यायोचित कर प्रणाली का अस्तित्व दोनों ही करों के समन्वय पर टिका होता है। प्रो० डी. मार्को के शब्दों में, “प्रत्यक्ष और परोक्ष कर एक-दूसरे के पूरक हैं और परस्पर एक-दूसरे के दोषों को दूर करते हैं।” दोनों ही प्रकार के करों से समाज में धन और आय के वितरण की असमानता को दूर करना सुगम होता है। प्रो० प्रेस्ट के शब्दो में, “प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर सरकार द्वारा आय के पुनवितरण के दो परस्पर पूरक
ढंग हैं।”

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

1. क्रेद्र सरकार की आय के स्रोतों का वर्णन कीजिए।

उ०- केंद्र सरकार की आय के स्रोत- केंद्र सरकार की आय के स्रोतों को निम्नलिखित दो भागों में बाँटा गया है क र स्रोत- केंद्र सरकार को करों के स्रोतों के माध्यम से निम्नवत् आय प्राप्त होती है(i) आयकर- आय पर लगने वाला प्रत्यक्ष कर आयकर केंद्र सरकार लगाती है, जो उसकी आय का मुख्य स्रोत है। केंद्र सरकार कृषि की आय को छोड़कर निर्धारित न्यूनतम आय की सीमा से ऊपर की आय पर कर लगाकर आय प्राप्त करती है। केंद्र सरकार प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अपने वार्षिक बजट में आयकर की दरें निश्चित करती है। आयकर से प्राप्त राजस्व का कुछ भाग वित्त आयोग की सिफारिश पर राज्यों को बाँटा जाता है। (ii) निगम कर- केंद्र सरकार राष्ट्रीय और विदेशी व्यावसायिक कंपनियों की वार्षिक आय पर जो कर लगाती है, उसे _ ‘निगम कर या कार्पोरेट टैक्स’ कहा जाता है। यह प्रत्यक्ष कर निगम की संपूर्ण आय पर एक निश्चित दर से लगाया जाता है। (iii) उपहार कर- किसी व्यक्ति द्वारा दिए गए कुल उपहारों के एक निश्चित मूल्य से अधिक राशि होने पर, केंद्र सरकार
उस पर जो कर लगाती है, उसे उपहार कर कहते हैं। शिक्षण संस्थाएँ तथा धार्मिक संस्थान इस कर से मुक्त रहते हैं। (iv) संपत्ति कर- केंद्र सरकार अविभाजित हिंदू परिवारों की निर्धारित मूल्य से अधिक संपत्ति पर जो कर लगाती है, उसे संपत्ति कर कहा जाता है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क- केंद्र सरकार नशीली वस्तुओं को छोड़कर अन्य सभी वस्तुओं के उत्पादन पर जो कर लगाती है, उसे केंद्रीय उत्पाद शुल्क कहा जाता है। उत्पाद शुल्क से प्राप्त आय का एक निश्चित भाग वित्त आयोग की
सिफारिश पर राज्य सरकारों को दिया जाता है। (vi) सीमा शुल्क- केंद्र सरकार देश से बाहर जाने वाले माल पर निर्यात शुल्क तथा बाहर से आने वाले माल पर आयात
शुल्क लगाती है। सामूहिक रूप से दोनों करों को सीमा शुल्क कहा जाता है।
U.P. Series
(285)
सामाजिक विज्ञान-10

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