UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi कथा भारती Chapter 3 पंचलाइट

UP Board Solutions for Class 12 Samanya Hindi कथा भारती Chapter 3 पंचलाइट

पंचलाइट कहानी 

लेखक पर आधारित प्रश्न

1 . फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ का जीवन परिचय देते हुए उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए ।।

उत्तर – – लेखक परिचय- प्रेमचन्दोत्तर युग के प्रमुख कहानीकार फणीश्वारनाथ ‘रेणु’ जी का जन्म 4 मार्च सन् 1921 ई० को बिहार प्रान्त के पूर्णिया जिले के औराही हिंगना नामक ग्राम में हुआ था ।। इण्टर तक शिक्षा प्राप्त करने के उपरान्त रणु’ जी’ स्वतन्त्रताआन्दोलन में कूद पड़े और इस आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निर्वाह करने के कारण अनेक बार इन्हें जेल भी जाना पड़ा ।। ये समाजवादी विचारधारा से प्रभावित रहे हैं ।। बिहार-आन्दोलन में अपना सकारात्मक योगदान देते हुए रेणु’ जी ने सरकार द्वारा प्रदत्त ‘पद्मश्री’ की उपाधि तथा आर्थिक सहायता राशि वापस लौटा दी थी ।। 11 अप्रैल सन् 1977 ई० को ‘रेणु’ जी का निधन हो गया ।।

कृतियाँ- ‘रेणु’ जी ने प्रमुख रूप से कहानी व उपन्यास विद्या के क्षेत्र को अपनी लेखनी से समृद्ध किया ।। इनकी प्रमुख कृतियाँ इस प्रकार हैं
कहानी- आदिम रात्रि की महक (कहानी-संग्रह), रसपिरिया, पंचलाइट, तीसरी कसम, तीन बिन्दियाँ, लाल पान की बेगम, ठुमरी (कहानी-संग्रह), उच्चाटन ।।
उपन्यास- मैला आँचल, जुलूस, दीर्घतपा, कलंकमुक्ति, परती परिकथा, कितने चौराहे ।।

2 . फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ के कथा-शिल्प एवं शैली पर प्रकाश डालिए ।।

उत्तर – – कथा-शिल्प एवं शैली- ‘रेणु’ जी में संवेदना और निरीक्षण की अपूर्व शक्ति है ।। हिन्दी कथा-जगत में इनका उदय एक ऐतिहासिक घटना है ।। कथा में आंचलिकता का सन्निवेश तो इनका वैशिष्ट्य है ही, शिल्प के स्तर पर भी इन्होंने रिपोर्ताज की शैली का उपयोग करके किस्सागोई को नई दिशा दी है और उसका संस्कार किया है ।। इनकी कहानियों में सूक्ष्म ताने-बाने का अपूर्ण कौशल लक्षित होता है ।। गहरी संवेदनशीलता, ध्वनि-चित्रात्मकता और सघन संगीतात्मकता इनकी कथा-शैली की उल्लेखनीय विशेषताएँ हैं ।। प्रभाव-बिम्बों की योजना द्वारा कहानी के वातावरण को वास्तविक और चित्रोपम बनाने में ये सिद्धहस्त हैं ।। इनकी कहानियों का रचना-विधान औपन्यासिक कहा जा सकता है ।। उनमें पात्रों, घटनाओं और भाव-चित्रों का बाहुल्य है ।। कथावस्तुओं की बहुलता और उनके बिखराव को ये अत्यन्त सधे ढंग से एक विशेष बिन्दु अथवा मुहूर्त की ओर मोड़ देते हैं, जिसके फलस्वरूप कहानी का प्रभाव सघन, मार्मिक और स्थायी हो उठता है ।। बिहार के ग्राम्यांचलों से निजी स्तर पर जुड़े होने के कारण इनकी कथा-भाषा में इनकी रोजमर्रा की शब्दावली बड़े सहज, किन्तु व्यंजक रूप में घुल-मिल गई है ।।

इनकी सुप्रसिद्ध लम्बी कहानी ‘तीसरी कसम’; हिन्दी में लम्बी कहानियों की परम्परा का सूत्रपात करती है ।। इस कहानी का फिल्मांकन भी हो चुका है ।। ग्रामीण परिस्थितियों और वातावरण के अनुसार ‘रेणु’ जी के कथोपकथन स्वाभाविक, संक्षिप्त सरल एवं रोचक हैं ।। ग्रामीण मुहावरों और कहावतों के जीवन्त प्रयोग इनकी भाषा में जहाँ-तहाँ देखने को मिलते हैं ।। अंग्रेजी शब्दों का आंचलिक प्रयोग भी इनकी कहानियों में खूब हुआ है ।। इनकी रचनाओं में आंचलिक भाषा की मिठास और वास्तविक सौन्दर्य देखते ही बन पड़ता है ।।

पाठ पर आधारित प्रश्न

1 . ‘पंचलाइट’ कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखिए ।।

उत्तर – – महतो टोली में कुछ लोग अशिक्षित हैं ।। वे रामनवमी के मेले से पेट्रोमेक्स’ खरीद लाते हैं ।। ये सीधे-सादे लोग उसे पंचलाइट (या पंचलैट) कहते हैं ।। पंचलाइट खरीदने के बाद बचे हुए दस रुपयों से वे पूजा की सामग्री खरीदते हैं सभी खुश हैं, इसी उपलक्ष में कीर्तन का आयोजन किया जाता है ।। टोली के सभी लोग पंचलैट देखने के लिए इकट्ठे हो जाते हैं ।। सरदार ने ‘पंचलैट’ खरीदने का पूरा किस्सा लोगों को सुनाया ।। टोली के सभी लोग सरदार व दीवान को श्रद्धा भरी नजरों से देख रहे थे ।। अब प्रश्न है कि ‘पंचलैट’ जलाएगा कौन? उन सीधे-सादे लोगों में कोई भी पेट्रोमेक्स जलाना नहीं जानता है और पहली ही बार दूसरी टोली के लोगों से ‘पंचलैट’ जलवाना वे अपना अपमान समझते हैं ।। निर्णय लिया गया कि दूसरी पंचायत के आदमी से पंचलैट नहीं जलवाया जाएगा, चाहे वह बिना जले ही पड़ा रहे ।। पंचों के चेहरे उतर गए थे ।। आज किसी ने अपने घर में ढिबरी भी नहीं जलाई थी ।। राजपूत टोली के लोग उनका मजाक बनाते हैं ।। वे हँसते-हँसते पागल हो रहे हैं, कहते हैं- “कान पकड़कर पंचलैट के सामने पाँच बार उठो-बैठो, तुरन्त जलने लगेगा ।। ” उनके द्वारा बनाए गए मजाक को महतो टोली के लोगों ने धैर्यपूर्वक सहन किया ।। वहीं गुलरी काकी की बेटी मुनरी बैठी थी ।। वह जानती थी कि गोधन पंचलैट जलाना जानता है ।। वह गोधन से प्रेम करती है, पंचायत ने गोधन का हुक्का-पानी बन्द कर रखा है ।। मुनरी अपनी सहेली कनेली को यह बात बताती है और कनेली इस बात को पंचों तक पहुँचा देती है कि गोधन पंचलैट जलाना जानता है ।। जाति की प्रतिष्ठा का प्रश्न है, गोधन को बुलाया जाए या नहीं, इस विषय को लेकर पंच सोच में पड़ जाते हैं तथा अन्त में उसे बुलाने का निर्णय किया जाता है ।।

सरदार ‘गोधन’ को बुलाने के लिए छड़ीदार को भेजता है लेकिन उसके कहने से ‘गोधन’ नहीं आता है ।। इसके बाद गुलरी काकी उसे मनाकर ले आती है ।। ‘गोधन’ आकर ‘स्प्रिट’ माँगता है ।। ‘स्प्रिट’ का नाम सुनकर सभी उदास हो जाते हैं लेकिन गोधन ‘गरी’ के तेल से ही पंचलैट’ जला देता है ।। सभी प्रसन्न हो जाते हैं ।। पंच गोधन को पुन: जाति में ले लेते हैं ।। कीर्तन शुरू होता है ।। सभी उच्च स्वर से ‘महावीर स्वामी की जय’ बोलते हैं ।। मुनरी प्रेमभरी दृष्टि से गोधन को देखती है ।। सरदार गोधन से कहता है- “तुमने जाति की इज्जत रखी है, तुम्हारा सात खून माफ ।। खूब गाओ सलीमा का गाना ।। ” गोधन ने मुनरी की ओर देखा तो उसकी पलकें झुक गईं ।। गुलरी काकी गोधन को रात के खाने पर आने का निमन्त्रण देती है ।। प्रस्तुत कहानी का शीर्षक ‘पंचलाइट’ पूरी कथा को स्वयं में समाहित किए हुए है ।। ग्रामीण बोलचाल तथा आचंलिक प्रभाव से युक्त इसका शीर्षक इसके मूलभाव को स्पष्ट करने वाला है तथा ग्रामीण परिवेश का यथार्थ चित्रण करने में भी यह समर्थ है ।। इसका शीर्षक संक्षिप्त व सारगर्भित है; अतः स्पष्ट है कि कहानी का शीर्षक सर्वथा उपयुक्त एवं सार्थक है ।।

2- ‘पंचलाइट’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता बताइए ।।

उत्तर – – कहानी का शीर्षक ‘पंचलाइट’ पूरी कथा को स्वयं में समाहित किए हुए है ।। ग्रामीण बोलचाल तथा आचंलिक प्रभाव से युक्त इसका शीर्षक इसके मूलभाव को स्पष्ट करने वाला है तथा ग्रामीण परिवेश का यथार्थ चित्रण करने में भी यह समर्थ है ।। इसका शीर्षक संक्षिप्त व सारगर्भित है; अतः स्पष्ट है कि कहानी का शीर्षक सर्वथा उपयुक्त एवं सार्थक है ।।

3 . ‘पंचलाइट’कहानी में कहानीकार का क्या उद्देश्य निहित है?
उत्तर – – ग्रामवासी जाति के आधार पर किस प्रकार टोलियों में विभक्त हो जाते हैं और परस्पर ईर्ष्या-द्वेष के भावों से भरे रहते हैं, इसका बड़ा ही सजीव और यथार्थ चित्रण इस कहानी में किया गया है ।। परोक्ष रूप से रेणु जी ने ग्राम-सुधार की प्रेरणा भी दी है ।। इसी के साथ कहानीकार ने यह भी सिद्ध किया है कि आवश्यता बड़े-से-बड़े संस्कार और निषेध को अनावश्यक सिद्ध कर देती है ।।

4 . ‘पंचलाइट’ कहानी के आधार पर गोधन का चरित्र-चित्रण कीजिए ।।

उत्तर – – ‘पंचलाइट’ फणीश्वरनाथ रेणु’ की एक आंचलिक कहानी है ।। यह कहानी ग्रामीण जीवन पर आधारित है ।। इसमें ग्रामवासियों की मन: स्थिति की वास्तविकता झलक देखने को मिलती है ।। गोधन इस कहानी का एक मुख्य पात्र है, जिसे समाज के लोग बहिष्कृत कर देते हैं ।। गोधन के चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं

(i) योग्य युवक- ‘गोधन’ ‘पंचलाइट’ कहानी का ऐसा पात्र है जो अशिक्षित होते हुए भी योग्य है ।। पेट्रोमेक्स जलाने के कार्य को उसकी बिरादरी का कोई भी व्यक्ति नहीं जानता, परन्तु वह उसे जला देता है ।।

(ii) गुणवान्- गोधन अशिक्षित होते हुए भी गुणवान् है ।। उसके इसी गुण के कारण टोले का सरदार उसकी सभी गलतियों को माफ कर देता है तथा उसे फिर से अपने टोले में सम्मिलित कर लेता है ।।

(ii) विवेकी- गोधन अशिक्षित अवश्य है; किन्तु वह विवेकी है ।। पेट्रोमेक्स जलाने के लिए जब स्पिरिट उपलब्ध नहीं थी तो उसने ‘गरी’ के तेल से ही मेट्रोमेक्स को जला दिया था ।।

(iv) वर्ग भेद से दूर- गोधन और मुनरी परस्पर स्नेह रखते हैं ।। गोधन जाति-पाँति, ईष्या-द्वेष आदि के चक्कर में नहीं पड़ता ।। वह मानवीय गुणों का समर्थक है ।। उसके लिए सभी व्यक्ति एक समान हैं ।।

(v) निडर- गोधन में निडरता का गुण भी है ।। वह गाने गाकर तथा आँख मटकाकर मुनरी के प्रति अपने प्रेम को प्रकट कर देता है ।। अत: कहा जा सकता है कि गोधन ग्रामीण परिवेश में पलने-बढ़ने वाला उपर्युक्त गुणों से युक्त एक आदर्श लड़का है ।।

5 . ‘पंचलाइट’ कहानी के प्रमुख स्त्री पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए ।।

उत्तर – – मुनरी; श्री फणीश्वरनाथ रेणु’ कृत ‘पंचलाइट’ कहानी की एक प्रमुख स्त्री-पात्र है ।। इसके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नवत् हैं
(i) साधारण ग्रामबाला- मुनरी, महतो टोली की भोली-भाली ग्रामबाला है ।। वह गुलरी काकी की बेटी है ।।
(ii) परम्परावादी- मुनरी एक परम्परावादी लड़की है ।। वह टोली से बहिष्कृत गोधन नामक युवक को मन-ही-मन चाहती है, किन्तु परम्परा की बेड़ियों में जकड़ी होने के कारण यह बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने का साहस नहीं कर पाती ।।
(iii) गुणों पर रीझने वाली- मुनरी गोधन द्वारा गाना गाने और आँख मटकाकर अपने प्रेम को प्रदर्शित करने पर रीझ जाती है और मन-ही-मन गोधन को चाहने लगती है ।।
(iv) नारी सुलभ शील और संकोच- मुनरी ने नारी सुलभ शील और संकोच पर्याप्त मात्रा में है ।। पेट्रोमेक्स न जलाने पर उसे स्वंय यह जानकारी देने में लज्जा आती है कि गोधन पेट्रोमेक्स जलाना जानता है ।।
(v) बुद्धिमती- मुनरी लज्जाशील और संकोची होने के साथ-साथ बुद्धिमती भी है ।। जो बात वह लज्जावश स्वयं नहीं कह पाती, उसे अपनी सहेली कनेली के माध्यम से कहलवा देती है

“कनेली! . .”चिगो, चिधs-5,चिन . . .”कनेली मुस्कराकर रह गयी-गोधन .”तो बन्द है ।। मुनरी बोली-तूकह तो सरदार से ।।
गोधन जानता है पंचलैट बालना ।। ‘ कनेली बोली ।। ” निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि मुनरी एक भोली-भाली और लज्जालु ग्रामीण बालिका है ।।

6 . आंचलिक कहानी क्या हैं? ‘पंचलाइट’ कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए ।।


उत्तर – – आंचलिक कहानी में किसी विशेष अंचल, क्षेत्र अथवा उसके किसी एक भाग का चित्रण किया गया है ।। इसमें स्थानीय दृश्यों, प्रकृति, जलवायु, लोकगीत, बातचीत के विशिष्ट ढंग, मुहावरे, लोकोक्तियाँ, भाषा व उच्चारण की विकृतियाँ, लोगों की स्वभावगत या व्यवहारगत विशेषताओं, नैतिक मान्यताओं आदि का समावेश बड़ी कुशलता, सर्तकता और सावधानी से किया जाता है ।। इस दृष्टि से ‘पंचलाइट’ कहानी एक सफल आंचलिक कहानी है ।। आंचलिकता के प्रायः सभी गुण उसमें विद्यमान हैं; यथा
(i) इस कहानी में बिहार प्रदेश के ग्राम्यांचल और उसके वातावरण का चित्रण हुआ है ।।
(ii) इस कहानी में बिहार के ग्रामीण अंचल की सामाजिक परिस्थितियों पर आधारित इस तथ्य पर प्रकाश डाला गया है कि वहाँ के लोग किस प्रकार जाति के आधार पर टोलियों में बँट जाते हैं ।। उनमें परस्पर ईर्ष्या-भाव और द्वेष-भाव भरा हुआ है और वे रूढ़िवादिता से ग्रस्त हैं ।।
(iii) इसमें बिहार के ग्रामीण अंचल की नैतिकता मान्यताओं और जनता की मनोवृत्तियों का चित्रण भी हुआ है ।। एक टोली के पेट्रामैक्स (पंचलाइट) को दूसरी टोली का व्यक्ति नहीं जला सकता; क्योंकि इससे टोली का अनादर होता है ।।
(iv) इस कहानी में स्थानीय भाषा में बातचीत के विशिष्ट ढंग ने उसे आंचलिक बना दिया है; जैसे-

“सरदार ने अपनी स्त्रीसे कहा-साँझको पूजा होगी; जल्दी से नहा-धोकर चौका-पीढ़ा लगाओ ।। “
“कितने में लालटेन खरीद हुआ महतो?”

(v) कहानीकार ने ग्रामीण अंचल के रीति-रिवाजों, अन्धविश्वासों और रूढ़ियों का भी विशिष्ट चित्रण किया है ।। ‘पंचलाइट’ आने पर उसका पूजन, कीर्तन, प्रसाद वितरण सभी इसी अन्धविश्वास का परिचायक है ।।
इस प्रकार ‘पंचलाइट’ कहानी में आंचलिकता पर आधारित प्रायः सभी विशेषताएँ प्रतिबिम्बित हुई हैं ।।

7 . कहानी कला की दृष्टि से पंचलाइट’ कहानी की विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए ।।


उत्तर – – फणीश्वरनाथ रेणु जी हिन्दी-जगत् के सुप्रसिद्ध आंचलिक कथाकार है ।। अनेक जन-आन्दोलनों से वे निकट से जुड़े रहे, इस कारण ग्रामीण अंचलों से उनका निकट का परिचय है ।। उन्होंने अपने पात्रों की कल्पना किसी कॉफी हाउस में बैठकर नहीं की, अपितु वे स्वयं अपने पात्रों के बीच रहे हैं ।। बिहार के अंचलों के सजीव चित्र इनकी कथाओं के अलंकार है ।। ‘पंचलाइट’ भी बिहार के आंचलिक परिवेश की कहानी है ।। कहानी-कला की दृष्टि से इस कहानी की समीक्षा (विशेषताएँ) निम्नवत् है
(i) शीर्षक- कहानी का शीर्षक ‘पंचलाइट’; एक सार्थक और कलात्मक शीर्षक है ।। यह शीर्षक संक्षिप्त और उत्सुकतापूर्ण है ।। शीर्षक को पढ़कर ही पाठक कहानी को पढ़ने के लिए उत्सुक हो जाता है ।। पंचलाइट’ का अर्थ है ‘पेट्रोमेक्स’ अर्थात् ‘गैस की लालटेन’ ।। शीर्षक ही कथा का केन्द्र-बिन्दु है ।।
(ii) कथानक- महतो-टोली के सरपंच पेट्रोमेक्स खरीद लाये हैं, परन्तु इसे जलाने की विधि वहाँ कोई नहीं जानता ।। दूसरे टोले वाले इस बात का मजाक बनाते हैं ।। महतो टोले का एक व्यक्ति पंचलाइट जलाना जानता है और वह है-‘गोधन’, किन्तु वह बिरादरी से बहिष्कृत है ।। वह ‘मुनरी’ नाम की लड़की का प्रेमी है ।। उसकी और प्रेम की दृष्टि रखने और सिनेमा का गीत गाने के कारण ही पंच उसे बिरादरी से बहिष्कृत कर देते हैं ।। मुनरी इस बात की चर्चा करती है कि गोधन पंचलाइट जलाना जानता है ।। इस समय जाति की प्रतिष्ठा का प्रश्न है, अत: गोधन को पंचायत में बुलाया जाता है ।। वह पंचलाइट को स्पिरिट के अभाव में गरी के तेल से ही जला देता है ।। अब न केवल गोधन पर लगे सारे प्रतिबन्ध हट जाते हैं वरन् उसे मनोनुकूल आचरण की भी छूट मिल पाती है ।। पंचलाइट की रोशनी में गाँव में उत्सव मनाया जाता है ।। प्रस्तुत कहानी में कहानीकार ने यह सिद्ध करने का प्रयास किया है कि आवश्यकता किसी भी बुराई को अनदेखा कर देती है ।। कथानक संक्षिप्त, रोचक, सरल, आंचलिक और यथार्थवादी है ।। कौतूहल और गतिशीलता के अलावा इसमें मुनरी तथा गोधन का प्रेम-प्रसंग बड़े स्वाभाविक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है ।।

(iii) पात्र तथा चरित्र चित्रण- रेणु जी ने इस कहानी में सामान्य ग्रामीण वातावरण के सीधे-सादे लोगों को पात्रों के रूप में चुना है ।। कहानी के पात्र वर्गगत हैं ।। कहानीकार ने स्वयं ग्रामीण यथार्थ को भोगा है, इस कारण पात्र-और चरित्र-चित्रण स्वाभाविक तथा सजीव है ।। कहानी के पात्र दो वर्ग के हैं, एक वर्ग में रूढ़िवाद, जातिवाद तथा ईर्ष्या आदि दोष व्याप्त हैं, तो दूसरे वर्ग में गोधन और मुनरी हैं ।। ये जाति-पाँति या रोग-द्वेष के चक्कर में नहीं पड़ते ।। गोधन निडर है, वह गाने गाकर तथा आँख मटकाकर अपने प्रेम को प्रदर्शित कर देता है, परन्तु मुनरी भोली-भाली, लज्जाशील ग्रामीण बालिका है ।। लेखक ने पात्रों का चयन बड़ी चतुराई से किया है ।। इस कहानी के सभी पात्र सजीव प्रतीत होते हैं ।। कहानी में ग्रामवासियों की मनोवृत्ति का परिचय बड़े जीवन्त और यथार्थ रूप में प्रस्तुत किया गया है ।। ग्रामीण समूह के चरित्र को उभारने में लेखक को विशेष सहायता मिली है ।।

(iv) कथोपकथन- प्रस्तुत कहानी के संवाद संक्षिप्त, सरल तथा रोचक हैं ।। ग्रामीण परिस्थितियों और वातावरण के अनुसार स्वाभाविक संवादों की रचना की गयी है ।। बिहार के ग्रामीण अंचल की पृष्ठभूमि पर लिखी गयी इस कहानी में वहाँ के बोलचाल के शब्दों का प्रयोग करके रेणु जी ने संवादों की स्वाभाविका को बढ़ा दिया है ।। संवादों की स्वाभाविकता का एक उदाहरण देखिए


मुनरी ने चालाकी से अपनी सहेली कनेली के कान में बात डाल दी-कनेली! . . .” चिगो, चिध-s-s, चिन” .” ।। कनेली मुस्कुराकर रह गयी-गोधन””तो बन्द है ।। मुनरी बोली- तू कह तो सरदार से! ‘
गोधन जानता है पंचलैट बालना ।। ‘ कनेली बोली ।।
कौन, गोधन? जानता है बालना? लेकिन”””” ।।

ग्रामीणों का सीधापन भी संवादों में स्पष्ट झलकता है; यथा- “सरदार ने गोधन को बहुत प्यार से पास बुलाकर कहा- तुमने जाति की इज्जत रखी है ।। तुम्हारा सात खून माफाखूब गाओ सलीमा कागाना ।। ” गुलरी काकी बोली- आज रात में मेरे घर में खाना गोधन ।। भाषा-शैली- फणीश्वरनाथ रेणु की भाषा की विशेषता उनके द्वारा किये गये ग्रामीण शब्दों के सटीक प्रयोग में है ।। उन्होंने अंग्रेजी के शब्दों का आंचलिक प्रयोग बहुत सुन्दर रूप में प्रस्तुत किया है; जैसे-पंचलैट, सलीमा आदि ।। ग्रामीण मुहावरों का प्रयोग भी सुन्दर बन पड़ा है; जैसे–’धुरखेल करना’, ‘सात खून माफ’ इत्यादि ।। इस कहानी में व्यंग्यात्मक शैली का प्रयोग है ।। साथ ही चित्रात्मक, रमणीय और कलात्मक शैली के द्वारा आंचलिक रंग भरते हुए कहानी की रचना की गयी है ।।
भाषा-शैली का एक उदाहरण द्रष्टव्य है- “सब किये-कराये पर पानी फिर रहा था ।। सरदार, दीवान और छड़ीदार के मुँह में बोली नहीं ।। पंचों के चेहरे उतर गये थे ।। किसी ने दबी आवाज में कहा- कल-कब्जे वाली चीज का नखरा बहुत बड़ा होता है ।। “
(vi) देश-काल और वातावरण- फणीश्वरनाथ रेणु’ आंचलिक लेखक हैं ।। इन्होंने इस कहानी में बिहार के ग्रामीण जीवन का सजीव चित्रण किया है ।। ‘पंचलाइट’ के माध्यम से ग्रामीण वातावरण का चित्रण करते हुए ग्रामवासियों के मनोविज्ञान, ईर्ष्या, अन्धविश्वास और कुरीतियों का भी चित्रण हुआ है ।। पंचलाइट आने पर महतो टोली का गर्व, पंचलाइट की पूजा की तैयारी, जलाना न आने पर मान-अपमान का प्रश्न आदि तथ्य, ग्रामीण वातावरण को साकार कर देते हैं ।। ग्रामीणों में अशिक्षा, अन्धविश्वास और मिथ्या प्रदर्शन की भावना है ।। निश्चय ही देश-काल और वातावरण के सजीव चित्रण का सतत प्रयास किया गया है; जैसे– “टोले-भर के लोग जमा हो गये, औरत-मर्द, बूढ़े-बच्चे सभी काम-काज छोड़कर दौड़ आये- चल रे चल! अपना पंचलैट आया है, पंचलैट! छड़ीदार अगनू महतो रह-रहकर लोगों को चेतावनी देने लगा- हाँ, दूर से, जरा दूर से! छू-छा मत करो, ठेस न लगे ।। ”

(vii) उद्देश्य- इस कहानी के द्वारा रेणु जी ने अप्रत्यक्ष रूप से ग्राम-सुधार की कोशिश की है ।। गोधन के द्वारा ‘पेट्रोमेक्स’ जलाने पर उसकी सभी गलतियाँ माफ कर दी जाती हैं, जिससे स्पष्ट है कि आवश्यकता बड़े-से-बड़े रूढ़िगत संस्कार और परम्परा को व्यर्थ साबित कर देती है ।। कहानी का आरम्भ, मध्य और अन्त मनोरंजक व कौतूहलवर्द्धक है ।। पाठक के मन में जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि आगे क्या होगा? इनकी ‘पंचलाइट’ कहानी भी कहानी-कला के सभी पहलुओं पर खरी उतरती है ।।

8 . पात्र-योजना तथा चरित्र-चित्रण की दृष्टि से ‘पंचलाइट’कहानी की समीक्षा कीजिए ।।

उत्तर – – रेणु जी ने इस कहानी में सामान्य ग्रामीण वातावरण के सीधे-सादे लोगों को पात्रों के रूप में चुना है ।। कहानी के पात्र वर्गगत हैं ।। कहानीकार ने स्वयं ग्रामीण यथार्थ को भोगा है, इस कारण पात्र-और चरित्र-चित्रण स्वाभाविक तथा सजीव है ।। कहानी के पात्र दो वर्ग के हैं, एक वर्ग में रूढ़िवाद, जातिवाद तथा ईर्ष्या आदि दोष व्याप्त हैं, तो दूसरे वर्ग में गोधन और मुनरी हैं ।। ये जाति-पाति या रोग-द्वेष के चक्कर में नहीं पड़ते ।। गोधन निडर है, वह गाने गाकर तथा आँख मटकाकर अपने प्रेम को प्रदर्शित कर देता है, परन्तु मुनरी भोली-भाली, लज्जाशील ग्रामीण बालिका है ।। लेखक ने पात्रों का चयन बड़ी चतुराई से किया है ।। इस कहानी के सभी पात्र सजीव प्रतीत होते हैं ।। कहानी में ग्रामवासियों की मनोवृत्ति का परिचय बड़े जीवन्त और यथार्थ रूप में प्रस्तुत किया गया है ।। ग्रामीण समूह के चरित्र को उभारने में लेखक को विशेष सहायता मिली है ।।

9 . कथोपकथन की दृष्टि से ‘पंचलाइट’ कहानी का मूल्यांकन कीजिए ।।

उत्तर – – प्रस्तुत कहानी के संवाद संक्षिप्त, सरल तथा रोचक हैं ।। ग्रामीण परिस्थितियों और वातावरण के अनुसार स्वाभाविक संवादों की रचना की गयी है ।। बिहार के ग्रामीण अंचल की पृष्ठभूमि पर लिखी गयी इस कहानी में वहाँ के बोलचाल के शब्दों का प्रयोग करके रेणु जी ने संवादों की स्वाभाविका को बढ़ा दिया है ।। संवादों की स्वाभाविकता का एक उदाहरण देखिए


मुनरी ने चालाकी से अपनी सहेली कनेली के कान में बात डाल दी- कनेली!” . . .” चिगो, चिध-5-5, चिन””” ।। कनेली मुस्कुराकर रह गयी-गोधन””तो बन्द है ।। मुनरी बोली-तू कह तो सरदार से! ‘
गोधन जानता है पंचलैट बालना ।। ‘ कनेली बोली ।।
कौन, गोधन? जानता है बालना? लेकिन ।।


ग्रामीणों का सीधापन भी संवादों में स्पष्ट झलकता है; यथा- “सरदार ने गोधन को बहुत प्यार से पास बुलाकर कहातुमने जाति की इज्जत रखी है ।। तुम्हारा सात खून माफाखूब गाओ सलामी कागाना ।। “
गलरी काकी बोली- आज रात में मेरे घर में खाना गोधन ।।

10 . ‘पंचलाइट’ कहानी की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए ।।

उत्तर – – फणीश्वरनाथ रेणु की भाषा की विशेषता उनके द्वारा किये गये ग्रामीण शब्दों के सटीक प्रयोग में है ।। उन्होंने अंग्रेजी के शब्दों का आंचलिक प्रयोग बहुत सुन्दर रूप में प्रस्तुत किया है; जैसे-पंचलैट, सलीमा आदि ।। ग्रामीण मुहावरों का प्रयोग भी सुन्दर बन पड़ा है; जैसे–’धुरखेल करना’, ‘सात खून माफ’ इत्यादि ।। इस कहानी में व्यंग्यात्मक शैली का प्रयोग है ।। साथ ही चित्रात्मक, रमणीय और कलात्मक शैली के द्वारा आंचलिक रंग भरते हुए कहानी की रचना की गयी है ।।
भाषा-शैली का एक उदाहरण द्रष्टव्य है- “सब किये-कराये पर पानी फिर रहा था ।। सरदार, दीवान और छड़ीदार के मुँह में बोली नहीं ।। पंचों के चेहरे उतर गये थे ।। किसीने दबी आवाज में कहा- कल-कब्जे वाली चीज का नखरा बहुत बड़ा होता है ।।

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